Saturday, June 12, 2021
- Advertisement -
HomeUttarakhand NewsHaridwarलोक-संस्कृति कलाकार गजुला देवी का देहांत

लोक-संस्कृति कलाकार गजुला देवी का देहांत

- Advertisement -
0
  • गुलजार देवी के निधन से उत्तराखंड सहित कलाकारों में शोक 

जनवाणी ब्यूरो |

हरिद्वार: भिलंगना क्षेत्र की ग्यारहगांव हिंदाव पट्टी के ढुंग बजियालगांव की लोक-संस्कृति कलाकार गजुला देवी के देहांत का समाचार मिला, जब हम बहुत छोटे थे, तब सुनते थे कि इनके साथ पं. जवाहरलाल नेहरू भी नाचे थे।

ढुंग गांव के गिराज और शिवजनी जी की जोड़ी ढोल वादन एवं उनकी पत्नियों की जोड़ी लोकनृत्य में प्रसिद्ध थी।

इसी कारण स्व. इंद्रमणि बडोनी ने 1956 के गणतंत्र दिवस की परेड में उत्तरप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के लिए इस जोड़ी को प्रशिक्षित किया था और वे इस टीम को उत्तरप्रदेश की ओर से गणतंत्र दिवस समारोह में नई-दिल्ली के राजपथ पर ले जाने में सफल हुए।

स्व. बडोनी स्वयं लोकनृत्य की टीम का हिस्सा थे और उनके साथ केदारनृत्य टीम में चौंरा अखोड़ी के अन्य लोग भी थे। टीम का केदारनृत्य प्रदर्शन इतना सफल रहा कि इसे पंडित नेहरू के विशेष आग्रह पर पुनः राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया।

वहीं पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू देखकर इतने भावविभोर हो गये कि वो स्वयं को नृत्य में थिरकने से नहीं रोक पाये। ये ढोल की थाप और केदारनृत्य की सचमुच की विशेषता है, बूढ़ों में भी जोश आ जाता है।

नेहरू के आगे माला देवी और पीछे गजुला देवी हैं, गजुला देवी का कल ही टिहरी गढ़वाल के ढ़ुंग बजियाल गांव में निधन हो गया है। गुलजार देवी के निधन से उत्तराखंड सहित कई कलाकारों में शोक उत्पन्न है।

What’s your Reaction?
+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_img

Most Popular

- Advertisment -

Recent Comments