- अनदेखी- लापरवाही पड़ सकती है भारी
- भूख न लगना और वजन गिरना भी है बोन टीबी का लक्षण
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: केस-1– आवास विकास की रहने वाली उम्मेद कुमारी (52 वर्ष) कई वर्ष से हाई शुगर से परेशान चल रही हैं। कुछ समय पहले से उम्मेद कुमारी की एक हाथ की कोहनी पूरी तरह काम नहीं कर रही है। वह उठ ही नहीं रही है। कोहनी के पूरा न खुलने को लेकर वह हलकान थीं। मोहल्ले के एक डाक्टर को दिखाया तो उन्होंने कुछ दवाएं लिख दीं पर उससे आराम न हुआ। एक और डाक्टर के पास गईं तो उसने शुगर कंट्रोल करने की सलाह दी पर रोग कम होने की बजाय बढ़ता गया। उम्मेद के जोड़ों में असहनीय दर्द के साथ ही भूख लगनी भी बंद हो गयी और वजन तेजी से गिरने लगा। पिलखनी स्थित मेडिकल कालेज में दिखाने और वहां के चिकित्सक की सलाह पर जब उन्होंने जांच करायी तो पता चला कि उन्हें ‘बोन टीबी’ है।
केस-2
नुमाइश कैंप के रवि धींगरा की उम्र साठ साल है। वह काफी समय से शुगर से पीड़ित हैं। कुछ दिनों पहले उनके दोनों घुटनों में अचानक जकड़न भी आ गयी। दर्द इतना कि उनका उठना बैठना भी मुश्किल हो गया। उन्हें भी पहले यही लगा कि यह सब शुगर की वजह से है पर जब उन्होंने जब जिला अस्पताल में जांच कराई तो पता चला कि उन्हें भी ‘बोन टीबी’ है।
यह दर्द सिर्फ उम्मेद कुमारी और रवि धींगरा का ही नहीं, बल्कि ऐसे तमाम अन्य लोग हैं जो कोहनियों के न खुलने, घुटनों के न मुड़ने अथवा हड्डियों की अन्य समस्या से ग्रसित हैं और वह इसको शुगर बढ़ने का कारण मान लेते हैं, जबकि ऐसे लोगों को यह समस्या बोन टीबी के कारण भी हो सकती है। सही समय से उपचार न होने से मरीज के अपाहिज होने का खतरा रहता है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. रणधीर सिंह बताते हैं -वैसे तो टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों, श्वसन तंत्र और पाचन तंत्र को प्रभावित करती है। लेकिन कुछ मामलों में यह नाखून व बालों को छोड़कर शरीर के अन्य किसी भी अंग में भी हो सकती है। हड्डियों में होने वाली टीबी को मस्कुलोस्केलेटल टीबी भी कहा जाता है। वह बताते हैं- टीबी दो तरह की होती है। पहला पल्मोनरी टीबी और दूसरा एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी। जब टीबी फैलती है, तो इसे एक्स्ट्रापल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस (ईपीटीवी) कहा जाता है।
ईपीटीबी एक रूप को हड्डी व जोड़ की टीबी के नाम से भी जाना जाता है। बोन टीबी हाथों के जोड़ों, कोहनियों और कलाई, रीढ़ की हड्डी पीठ को भी प्रभावित करती है। टीवी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। टीबी रोगी के संपर्क में आने के बाद यह फेफड़ों या लिम्फ नोड्स से रक्त के माध्यम से हड्डियों, रीढ़ या जोड़ों में जा सकती है।
बोन टीबी के लक्षण:
बोन टीबी के लक्षण शुरुआती दौर में नजर नहीं आते हैं। शुरुआत में इसमें दर्द नहीं होता है लेकिन जब व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित हो जाता है तो इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। इनमें जोड़ों का दर्द, थकान, बुखार, रात में पसीना, भूख न लगना, वजन का कम होना आदि शामिल है।
बोन टीबी का उपचार:
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. रणधीर सिंह कहते हैं- बोन टीबी का उपचार पूरी तरह संभव है। इसका नि:शुल्क -उपचार किया जाता है और दवाएं भी सभी सरकारी चिकित्सालयों में मुफ्त दी जाती हैं। इतना ही नहीं निक्षय पोषण योजना के तहत पोषण के लिए पांच सौ रुपये की धनराशि प्रतिमाह मरीज के खाते में सीधे स्थानान्तरित की जाती है। दवा, परहेज और पौष्टिक तत्वों से भरपूर संतुलित आहर लेने से बोन टीवी पूरी तरह ठीक हो जाती है।

