Sunday, January 23, 2022
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शहर में होर्डिंग माफियाओं का कब्जा

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  • अवैध रूप से लगाये जा रहे होर्डिंग, निगम की ओर से पांच एजेंसियों को दिया ठेका
  • कैंट बोर्ड की ओर से एक एजेंसी को दिया गया ठेका
  • ठेकेदार करते हैं मनमानी तीन कैटेगिरी में बांटा शहर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में होर्डिंग माफियाओं का ही राज है। जहां देखों वहां होर्डिंग्स नजर आते हैं। नगर निगम से लेकर कैंट बोर्ड के क्षेत्र में भी हार्डिंग के लिये ठेकेदारों की मनमानी नजर आती है। नगर निगम में जहां पांच एजेंसियों पर इसका ठेका है। वहीं, कैंट बोर्ड में एक कंपनी को इसका ठेका दिया गया है। इन ठेकेदारों की मनमानी से नगर निगम को लगातार चूना लगता है, लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं की जाती है।

नगर निगम की ओर से शहर में होर्डिंग का ठेका पांच कंपनियों को दिया गया है। यह ठेका पांच साल और एक साला के आधार पर दिया जाता है और तीन अलग अलग कैटेगिरी में बंटा है जिसमें ए, बी और सी है, लेकिन होर्डिंग ठेकेदार नगर निगम की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। यहां अवैध रूप से होर्डिंग लगाये जाने का खेल खुलेआम चलता है जो ठेका एक साल और उसी कैटेगिरी के लिये हैं।

वहीं, होर्डिंग दूसरी कैटेगिरी में लगाये जाते हैं। जिससे नगर निगम को नुकसान झेलना पड़ता है। यहां कंपनियां गलत तरीके से शहर में जहां मन चाहा वहां होर्डिंग लगा देती हैं। इस संबंध में कई बार अधिकारियों के पास तक भी शिकायत पहुंचती है, लेकिन उनकी ओर से कोई कार्रवाई तक नहीं की जाती।

कैंट में एक ही कंपनी को दिया ठेका

कैंट क्षेत्र में भी होर्डिंग लगाने का ठेका दिया गया है। यह ठेका तीन साल के लिये एक ही कंपनी फोनेक्स के पास है। जिसे ई-टेंडर के माध्यम से दिया गया है। कंपनी को प्रतिवर्ष 20 लाख रुपये के आधार पर ठेका दिया गया है और इसके लिये प्वाइंट भी निर्धारित है। तय प्वाइंटों पर ही कंपनी की ओर से विज्ञापन आदि किया जा रहा है।

इस तरह से दिया जाता है ठेका

नगर निगम की ओर से एक साल के लिये सामान्य ठेका दिया जाता है। जिसमें साइडों का ठेका होता है। इसी प्रकार सेंट्रल मर्ज यानि डिवाइडर का ठेका दिया जाता है। जोकि पांच साल के लिये हाता है। नगर निगम की ओर से इसके लिसे तीन कैटेगिरी में बांट गई हैं। जिसमें ए, बी और सी कटेगिरी शामिल होती है।

इनमें ए कैटेगिरी में नगर निगम की ओर से कंपनी से शर्त रखी जाती है कि वह हर साल नगर निगम में 15 लाख रुपये टैक्स के रूप में जमा करेगी और इसमें कंपनी पूरे शहर में होडिंग लगा सकती है। दूसरी बी कैटेगिरी में कंपनी को 10 लाख रुपये साल के टैक्स के रूप में जमा करने होते हैं और तीसरे सी कैटेगिरी में पांच लाख रुपये साल के जमा करने होते हैं। इनमें तीनों कैटेगिरी में प्वाइंट और स्थान चिन्ह्ति करके कंपनी को दिये जाते हैं। कंपनी को जो स्थान दिये जाते हैं। वह वहीं पर होर्डिंग लगा सकेगी। शहर में होर्डिंग का ठेका नगर निगम की ओर से पांच एजेंसियों को दिया गया है।

अवैध रूप से लगाये जाते हैं होर्डिंग

शहर में लगातार शिकायतें नगर निगम के पास पहुंचती है कि यहां कंपनी की ओर से अवैध रूप से होर्डिंग लगाये जाने का कार्य किया जा रहा है। नगर निगम के अधिकारी इसमें टैक्स वसूली की बात तो करते हैं, लेकिन यहां शहर में अवैध रूप से लगने वाले होर्डिंग के विषय में अधिकारियों को भी जानकारी होती है, लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जाती। जबकि विभाग की ओर से छोटे-छोटे खोखे व अन्य के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। भले ही कंपनी टैक्स जमा करती है, लेकिन कंपनी की ओर से ऐसे स्थानों पर भी होर्डिंग लगा दिये जाते हैं। जो स्थान चिन्ह्ति ही नहीं किये गये हैं और अधिकारी मौन बैठे रहते हैं।

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