Sunday, January 23, 2022
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बहुभाषी इंटरनेट को बढ़ावा देने की जरूरत

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भारत सरकार इंटरनेट को बहुभाषी बनाने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए एक योजना ला रही है। इसकी जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शनिवार को दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार उन 40 करोड़ भारतीयों को इंटरनेट से जोड़ने जा रही है, जो अभी तक इसका उपयोग नहीं करते हैं। आज इंटरनेट पर अंग्रेजी भाषा का बोलबाला है, ऐसे में अंग्रेजी जानने वाली बड़ी आबादी इससे जुड़ी है। आज वर्ल्ड वाइड वेब पर सबसे अधिक देखी जाने वाली वेबसाइटों के आधे से अधिक होम पेज अंग्रेजी में हैं। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि क्षेत्रीय भाषा को जानने वाले लोग आज भी इंटरनेट का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। आज भारत की बड़ी आबादी इंटरनेट के उपयोग से महरूम है। क्योंकि देश की बड़ी आबादी महज क्षेत्रीय भाषाओं से इत्तेफाक रखती है। ऐसे में सभी लोगों तक इंटरनेट की पहुंच और इसके इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए बहुभाषी इंटरनेट की आवश्यकता है।

बता दें कि अब भारत सरकार इंटरनेट को बहुभाषी बनाने के रणनीतिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उद्योग जगत के साथ भागीदारी करेगा। चंद्रशेखर ने कहा कि नई शिक्षा नीति, आधुनिक भारत के इतिहास में शिक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ा सुधार है। नई शिक्षा नीति क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करती है।

लिहाजा यह जरूरी है कि डिजिटल समावेशन सुनिश्चित करने के लिए इंटरनेट के साथ-साथ प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म क्षेत्रीय भाषाओं का समर्थन करें।

वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने कहा, इंटरनेट बड़ी संख्या में भारतीयों तक पहुंच गया है लेकिन फिर भी कई नागरिकों के लिए यह पहुंच योग्य नहीं है क्योंकि अधिकांश सामग्री अंग्रेजी में है। बहुभाषी इंटरनेट के माध्यम से हम 40 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को जोड़ सकते हैं।
यदि हमारी युवा पीढ़ी इंटरनेट का इस्तेमाल अच्छे उद्देश्य से करेंगी तो इंटरनेट बेहद फायदेमंद है।

आज इंटरनेट का उपयोग करके जानकारी प्राप्त करना बहुत आसान हो गया है। घर बैठे लोगों को सब कुछ इंटरनेट से मिलता है आनलाइन शॉपिंग, आनलाइन चैटिंग, आनलाइन बुकिंग आदि इंटरनेट का उपयोग करके कहीं भी कभी भी सब कुछ हासिल किया जा सकता हैं। इंटरनेट का प्रमुख लाभ में दूरस्थ शिक्षा भी शामिल है।

स्कूल के क्लास रूम में बैठकर पढ़ाई करने का जो पैटर्न था वह पिछले साल बदल गया, क्योंकि विगत वर्ष में लॉकडाउन होने की वजह से आॅनलाइन पढ़ाई का क्षेत्र विस्तार अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। मौजूदा वक्त में तीसरी लहर के बीच आॅनलाइन शिक्षा के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ता जा रहा है।

पिछले साल कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण देश और विदेश में लॉकडाउन लग गया था जिसकी वजह से सभी शिक्षण संस्थाएं बंद हो गई थीं, फिर मजबूरी में बच्चों और शिक्षकों ने पढ़ाई के लिए आॅनलाइन शिक्षा को एक माध्यम बनाया जिसके जरिए बची हुई पढ़ाई आॅनलाइन पूरी करवाई गई। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि आज के समय में इंटरनेट प्राथमिक आवश्यकता है।

भारत जैसे लोकतांत्रिक और विकासशील देश में इंटरनेट का प्रसार सभी लोगों तक हो यह बहुत जरूरी है। आज देश की 56 करोड़ आबादी की इंटरनेट तक पहुंच है। लेकिन इससे भी अधिक आबादी इंटरनेट के इस्तेमाल से महरूम है। इस बात की संभावना जताई जा रही थी कि आने वाले दो वर्षों के भीतर 10 करोड़ और आबादी इंटरनेट से जुड़ेगी।

फिर भी देश की आधी आबादी इंटरनेट के इस्तेमाल से महरूम रहेगी। इसमें सबसे बड़ी बाधा भाषा से जुड़ी हुई है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक, आनलाइन स्टोर से खरीदारी करने वाले उपभोक्ता आमतौर पर अपनी मूल भाषा में साइट से खरीदना पसंद करते हैं।

अमूमन लोग केवल उन वेबसाइटों से खरीदारी करते हैं जिनकी मदद से निर्णय लेने में आसानी होती है। देखा गया है कि एक बहुभाषी वेबसाइट लोगों को जानकारी प्राप्त करने या उनकी मूल भाषा में सामान और सेवाएं खरीदने में मदद करती है।

एक अन्य अनुसंधान से पता चलता है कि 56.2 फीसदी से अधिक उपभोक्ता वेबसाइट की अपनी मूल भाषा में होने पर अधिक भुगतान करने को तैयार होते हैं।

यह बात सही है कि जब लोग वेबसाइट में सामग्री को पढ़ सकते हैं और समझ सकते हैं, तो वे वेबसाइट पर उपयोगकर्ता का विश्वास बढ़ा सकते हैं।

ऐसे में भाषा जैसी बाधा को दूर करने की जरूरत को समझते हुए, भारत सरकार की पहल बेहद सराहनीय है। यह उम्मीद की जा सकती है कि बड़ी कंपनियों के सहयोग से बहुभाषी इंटरनेट के विस्तार की सरकार की पहल देश की आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास में बड़ा योगदान देगी?


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