Tuesday, September 21, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsSaharanpurआशा कार्यकर्ता के रूप में उम्मीद की किरण बनीं पूनम

आशा कार्यकर्ता के रूप में उम्मीद की किरण बनीं पूनम

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  • कोरोना काल में निभाई अहम भूमिका, परिवार नियोजन के लिए प्रेरित करने में भी आगे
  • लोगों को कोरोना टीकाकरण के लिए कर रही हैं जागरूक

जनवाणी ब्यूरो |

सहारनपुर: ग्रामीण जीवन के मध्यमवर्गीय परिवारों में ज्यादातर स्त्रियां अभी भी पति की छत्र-छाया में ही सिमटी रहती हैं, लेकिन पुंवारका ब्लाक के पीकी गांव की आशा कार्यकर्ता पूनम इसकी अपवाद हैं। वह झिझकती हैं न हिचकती। चौखट से लेकर चौपाल तक पूनम आशा कार्यकर्ता के रूप में अपनी अलग पहचान रखती हैं।

कोरोना काल में पूनम ग्रामीणों के लिए फरिश्ता बन गईं। गर्भवती महिलाओं के लिए संकट मोचन सरीखी। कुपोषित बच्चों के लिए पूनम ममता की मूरत बन गईं। जान हथेली पर रखकर जान बचाने के लिए उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) तथा अन्य अफसरों ने सम्मानित किया है।

पुंवारका विकास खंड के पीकी गांव की पूनम वैसे तो इंटरमीडिएट तक पढ़ी हैं, लेकिन, उनका सामाजिक ज्ञान, पारिवारिक अनुभव बड़ा गहरा है। आशा कार्यकर्ता के रूप में पूनम 2006 से काम कर रही हैं। लेकिन, उनकी अपनी अलग पहचान है। यह पहचान इसलिए है क्योंकि वह काम में केवल खानापूरी नहीं करतीं। हमेशा दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन करती हैं।

सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पूनम की अहम भूमिका होती है। वह बताती हैं कि गांव में परिवार नियोजन के प्रति लोगों में जागरूकता नहीं है। ऐसे में उन्हें सीमित परिवार के फायदे बताने और नसबंदी या परिवार नियोजन के अन्य साधनों के प्रति राजी करना आसान नहीं होता। लेकिन, नित्य और निरंतर प्रयास से पूनम ने यह कर दिखाया।

सन् 2019 में पूनम ने दो पुरुषों, 2020 में भी दो पुरुषों तथा 2021 में एक पुरुष को नसंबदी करवाने के लिए प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाई। महिलाओं को परिवार नियोजन के साधनों के प्रति पूनम हमेशा जागरूक करती रहती हैं। सरकार की अंतरा, छाया इत्यादि साधनों को उपलब्ध कराती हैं।

कई बार आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं के साथ कंधा से कंधा मिलाकर काम करती हैं। गर्भवती महिलाओं को हर माह की नौ तारीख को अस्पताल ले आती हैं। इधर, जब कोरोना की दूसरी लहर आयी तो पीकी गांव भी अछूता नहीं रहा। यहां कई लोग कोरोना संक्रमित हो गए।

गांव में हाहाकार मच गया। ऐसे में जब लोग एक दूसरे से दूरी बनाए हुए थे तब पूनम ने कोरोना प्रभावितों के लिए एंबुलेंस मंगा कर उन्हें पिलखनी स्थित मेडिकल कालेज में दाखिल कराया। लोगों को संक्रमण से बचने के लिए प्रेरित किया। मास्क बंटवाए। सेनिटाइजर की व्यवस्था कराई।

समय रहते इलाज मिल जाने से अधिकतर कोरोना प्रभावित ठीक होकर घर लौटे आये। फिलहाल, पूनम महिलाओं के टीकाकरण को लेकर संजीदा हैं। गांव के कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन करवाने में वह आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं का भरपूर सहयोग करती है। उनके सेवा भाव की हर ओर चर्चा है। घर-गृहस्थी का दायित्व निभाते हुए पूनम लगातार कर्तव्य निभा रही हैं।

वह कहती हैं कि कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं होता। पूरे मन से और दृढ़ इच्छाशक्ति से कुछ भी करो, उससे आत्मसंतोष मिलता है। कई संस्थाओं और तत्कालीन सीएमओ बीएस सोढ़ी ने भी पूनम को सम्मानित किया। कुछ भी हो पूनम अपने काम को मिशन के रूप में लेती हैं और उसे अंजाम तक पहुंचाती हैं।

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