Sunday, October 17, 2021
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लॉकडाउन में बर्बाद हुए बैंड वाले, अब नये साल का आसरा

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आज मेरी यार की शादी है जैसी सदाबहार धुनें शादी में बजाने वाले बैंडबाजा वालों को उम्मीद है कि 2021 उनके जीवन में फिर से बहार लेकर आएगा। मार्च से नवंबर तक इस व्यवसाय को कोरोना की नजर लग गई थी। प्रदेश सरकार की तरफ ने नरम रुख आने के बाद से बैंडबाजा व्यवसाय को जिंदगी मिली और 25 नवंबर से बैंडबाजा बिजनेस से जुड़े करीब 350 लोगों की जिंदगी में फिर से रौनक लौट आई है।

मेरठ में बैंडबाजा व्यवसाय कोरोना से पहले काफी फलफूल रहा था। जनपद में छोटे बड़े 350 बैंड काम कर रहे हैं। इनमें कई खासे चर्चित भी हैं। अप्रैल से लेकर जुलाई तक काफी तादाद में साये थे, लेकिन कोरोना का आतंक होने के कारण प्रशासन ने शादी ब्याह में बैंडबाजों पर रोक लगा दी थी।

इस कारण साढ़े तीन सौं बैंड से हजारों लोग बेरोजगार हो गए थे। इनमें ऐसे कलाकार भी थे जिनके घरों में चूल्हा जलाने के लिये उधार लेना पड़ रहा था। उत्तर प्रदेश बैंड बरात वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र धानक का कहना है कि बैंडबाजों के लिये अब तक के सबसे बुरे दिन कोरोना के कारण गुजरे हैं।

बैंड चलाने वालों को कोरोना काल में अपने कलाकारों को वेतन तक देना पड़ा क्योंकि उनका कहना था कि अगर वेतन नहीं मिला तो आगे कैसे काम करेंगे। सरकार के द्वारा रोक लगाने से बैंडवालों को खाने के लाले पड़ गए थे और उनको वैकल्पिक काम तक ढूंढना पड़ गया था।

बैंड बरात के साथ चलने वाली घोड़िÞयों को भी संकट का सामना करना पड़ा। बताया जाता है कि बग्गी चलाने वाले तीन चार लोगों की घोड़ियां सिर्फ इस कारण मर गई कि उनके पालकों के पास घोड़ी को खिलाने के लिये पैसे नहीं थे। अपनी धुनों से लोगों को मोहित करने वाले कलाकारों ने कोरोना काल में अपना व्यवसाय भी बदला और परिवार को चलाया।

कुछ लोग सब्जियां बेचते हुए देखे गए तो कुछ लोग दिहाड़ी मजदूर बनकर पेट पालते रहे। मेरठ में जय हिन्द, न्यू जय हिन्द, रवि, दीपक बैंड, पंजाब बैंड, अजंता बैंड, दीपक बैंड, मिलन बैंड जैसे 350 बैंड अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। बैंड बरात वेलफेयर ऐसोसिएशन ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी राहत देने की मांग की थी। इसके अलावा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मांग की थी कि शादियों में बैंडबाजे की अनुमति दी जाए। सरकार ने 23 नवंबर को अनुमति दी और 100 लोगों को शादी में शामिल होने के आदेश दिये।

पुलिस और प्रशासन ने हेकड़ी दिखाते हुए बैंडबाजा वालों को परेशान करना शुरू कर दिया। बाद में मुख्यमंत्री ने अपना आदेश वापस लिया और बैंडबाजों को छूट दे दी। एसोसिएशन के अध्यक्ष महेन्द्र धानक और पवन ने बताया कि 25 नवंबर से राहत मिली है और शादियों में बैंडबाजों का खूब प्रयोग हो रहा है।

ऐसा चलता रहा तो नये साल में किस्मत बदल जाएगी और आठ माह से बर्बादी के आंसू बहा रहे बैंड नई धुनों से लोगों का मनोरंजन करते हुए दिखेंगे। एक बैंडबाजा वाले ने बताया कि ऐसे भी दिन आए कि घर के बाहर बैंड बजाने वाले कलाकार पैसा मांगने वालों का तांता लगता था और उनको पैसा देने के लिये लोगों से उधार लेना पड़ा था।

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