Saturday, January 24, 2026
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किसान भारत की आत्मा है, इसे मत दुखाओ: जलपुरुष राजेंद्र सिंह

जनवाणी ब्यूरो |

मेरठ: रेमन मैगसेसे अवार्डी, स्टॉकहोम वाटर प्राइज विजेता जलपुरुष राजेन्द्र सिंह की आगुवाई और गंगाजल बिरादरी के संयोजन में, तरुण भारत संघ, भीकमपुरा(राजस्थान) से शुरू हुई “किसान कानून साक्षरता यात्रा” इब्राहीम खान, पूर्व मेजर डॉ० हिमांशु, राजकुमार सांगवान के साथ मेरठ पहुंची।

यहां कमिश्निरी पार्क में नागरिक समाज द्वारा एक सभा/प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। किसान आन्दोलन में अपने प्राण गवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सभा की शुरुआत की गई। इसके बाद अपने संबोधन में जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा कि “किसान भारत की आत्मा है, इसे मत दुखाओ।

किसान और सरकार वार्ता के छह दौर पूरे हो चुके हैं। सीधी मामूली मांग है। किसान विरोधी जो तीन कानून अलोकतांत्रिक तरीके से बनाये है, उन्हें जल्दी से जल्दी रद्द करो। किसानों ने अपना शांतिमय स्वरूप, अहिंसात्मक रास्ता पकड़ा है। महात्मा गांधी ने इसी रास्ते पर देश को खड़ा करके अंग्रेजों को भगा दिया था।

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जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा कि संविदा खेती से भारत की किसानी, जवानी और पर्यावरण सब कुछ बर्बाद हो जायेगा। भारत की खेती बर्बाद हो जाएगी। भारत की खेती केवल लाभ लालच और उद्योग नहीं है, यह भारत के शुभ और संस्कृति का आधार रही है। इसमें जलपुरुष ने किसानी, जवानी और पानी पर छाए संकट का समाधान, लंबी बातचीत करके सुनाया।

वहीं गंगाजल बिरादरी के राष्ट्रीय संयोजक पूर्व मेजर हिमांशु ने अपने संबोधन में प्रस्ताव दिया कि यदि केंद्र सरकार किसानों से बिना सलाह बिना मांगे इन कृषि कानूनों को इतना ही किसान हितैषी मानती है तो 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का वायदा करने वाले प्रधानमन्त्री 4-5 किसान जानकार आन्दोलनकारी नेताओं से कृषि कानूनों पर खुली बहस कर लें।

मामला सुलझाएं देश में आग न लगवाएं, MSP से कम की खरीद को दंडनीय अपराध घोषित करें। इब्राहीम खान ने किसानों को बांटने और बदनाम करने पर कड़ी आपत्ति की। राजकुमार सांगवान का मत था कि ये बिल किसानो की लूट की छूट देते हैं और कालाबाजारी और जमाखोरी बढ़ाने के रास्ते खोजते हैं। संतोष सरोकारी ने इस गतिरोध का जल्द समाधान निकाले जाने की वकालत की।

क्योंकि, ज्यादा दिन तक यदि किसान यहां बैठते है तो उनकी खेती का तो नुकसान है ही सरकार का भी कहीं न कहीं नुकसान है ही। रूहामा अहमद ने किसानों की मांगो को जायज बताया और सरकार के रवैईए पर आश्चर्य व्यक्त किया। रवि कुमार और फजल करीम ने किसानों के अहिंसात्मक आन्दोलन की जमकर सराहना की। साथ ही धरतीपुत्रों की दशा पर दुःख व्यक्त किया।

भारतीय किसान आन्दोलन के कुलदीप त्यागी ने “बिना किसी शर्त तीनो बिलों को रद्द करने की बात और MSP की गारंटी का क़ानून बनाने की ज़रूरत बताया। सभा को समाजसेवी, डॉक्टर, भूतपूर्व सैनिक, शिक्षाविद, युवाओं ने समर्थन दिया। रवि कुमार, संतोष सरोकारी, विपुल चौधरी, अजय वर्मा, फजल करीम, कुलदीप त्यागी, कुलदीप तोमर, रूहामा अहमद, आयुष कौशिक, आदि मौजूद रहे।

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