Friday, January 28, 2022
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श्रीगणेश चतुर्थी को भी कहते हैं करवाचौथ व्रत, रात्रि 7.52 बजे होगा चंद्रोदय

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  • कार्तिक मास की कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को होता है करवाचौथ व्रत

जनवाणी ब्यूरो |

बिजनौर: कार्तिक मास की कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवाचौथ का व्रत रखा जाता है। श्रीगणेश चतुर्थी व्रत को भी करवाचौथ व्रत कहते हैं। पंडित ललित शर्मा ने बताया कि चार नवंबर को चंद्रोदय का समय रात्रि 7.52 बजे रहेगा।

धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा ने बताया कि चार नवंबर दिन बुधवार को करवाचौथ का व्रत किया जाएगा। सनातन धर्म में इस व्रत का बहुत महत्व है।

इस दिन सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु एवं सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं। पति की दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन विघ्न विनाशक श्री गणपति की पूजा अर्चना की जाती है।

पंडित ललित शर्मा ने बताया कि चार नवंबर को चंद्रोदय का समय रात्रि 7.52 बजे रहेगा। इस दिन मृगशिरा नक्षत्र पूरे दिन रहेगा। सूर्यादय के बाद सवार्थ सिद्धि योग आरंभ होगा, जोकि पूर्ण रात्रि रहेगा। इसी में चंद्रोदय होगा, यह अति शुभ संयोग होगा।

पंडित जी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुहागिन महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार बहुत शुभ माना जाता है। प्राचीन काल से ही महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए सोहल श्रंगार करती हैं। सोहल श्रृंगार करने से घर में सुख शांति व समृद्धि आती है। सोलह श्रृंगार महिला का सौंदर्य ही नहीं भाग्य और मान प्रतिष्ठा भी बढ़ाता है।

चंद्रमा पूजन के महत्वपूर्ण मंत्र

सौग्यवती सुहागिन स्त्रियों को चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करते समय इन मंत्रों का जाप करना चाहिए। ओम भूर्भुव स्व: अमृतांगाय विद्महे कलारुपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात, ओम सों सोमाय नम:।

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