Tuesday, April 21, 2026
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किनौनी मिल के सेंटर कटेंगे या बचेंगे, कल हो सकता है फैसला

  • करीब 10 साल से गन्ना भुगतान को लेकर खून के आंसू रुलाने वाले बजाज ग्रुप को गन्ना देना नहीं चाहते किसान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: किसानों के आए दिन होने वाले विरोध प्रदर्शन के बीच किनौनी मिल के कितने सेंटर कटेंगे, और उसे कितने गन्ने की पेराई का अधिकार मिलेगा, इसका फैसला बुधवार को लखनऊ में लिया जा सकता है। दरअसल, इसके संबंध में गन्ना आयुक्त गन्ना सुरक्षण आदेश के संबंध में मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त और संबंधित जिला गन्ना अधिकारियों को लखनऊ बुला लिया गया है।

विभागीय सूत्र बताते हैं कि किनौनी मिल क्षेत्र से जुड़ी सहकारी गन्ना समिति और परिषद के स्तर से काफी पहले प्रस्ताव पास करके जिला गन्ना अधिकारी और सक्षम अधिकारियों को भिजवाए जा चुके हैं। अधिकारियों की ओर से गन्ना भवन में विरोध प्रदर्शन के लिए आने वाले किसान प्रतिनिधियों को भी इस संंध में यही आश्वासन दिया गया है कि दशहरे के बाद तक लखनऊ में सेंटरों को लेकर संशोधित सूची जारी की जाएगी। बताया गया है कि इसी क्रम में मेरठ परिक्षेत्र के अधिकारी लखनऊ पहुंच चुके हैं।

मेरठ मंडल के अधिकारी 25 को संभावित बैठक में गन्ना आवंटन के संबंध में निर्णय लिया जा सकता है। बताया गया है कि अभी तक किनौनी चीनी मिल को 182 सेंटर आवंटित हैं, लेकिन इस बार इनमें से करीब 80 सेंटरों को दूसरे मिलों से लगवाने के लिए किसान अधिकारियों पर हर तरह से दबाव बना रहे हैं। बता दें कि किनौनी मिल मेरठ और बागपत जिलों के विभिन्न गांवों के गन्ने की पेराई करता है। गन्ना किसानों के अनुसार किनौनी मिल में करीब एक दशक से भुगतान संबंधी व्यवस्था चरमराई हुई है। इस बात को अधिकारी भी स्वीकार करते हैं।

डीसीओ डा. दुष्यंत कुमार से आए दिन मिलने वाले किसान प्रतिनिधि यही मांग करते रहते हैं कि उनके क्षेत्र को किनौनी से हटाकर ऐसे मिलों से जोड़ दिया जाए, जिनके गन्ना भुगतान की स्थिति बेहतर है। किसान संगठनों के स्तर से गन्ना भुगतान को लेकर आंदोलन होना आम बात है। लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी भी किनौनी क्षेत्र के गन्ना किसानों की पीड़ा को शिद्दत से महसूस करके इस मुद्दे को प्रमुख सचिव चीनी उद्योग, गन्ना विकास विभाग, प्रमुख सचिव आबकारी विभाग बीना कुमारी मीना के समक्ष उठा चुके हैं।

बीती दो अगस्त को लखनऊ में उन्होंने अवगत कराया कि किनौनी मिल की ओर गन्ना में किसानों का बीते वर्ष की बड़ी धनराशि बकाया चली आ रही है। गौरव चौधरी सचिव को अवगत करा चुके हैं कि बजाज किनौनी शुगर मिल गन्ना क्षेत्र दो जनपद मेरठ व बागपत के किसानों के गन्ने की पेराई करता है। जिससे किसान को आर्थिक संकट व विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं किनौनी मिल की ओर अभी तक करीब 200 करोड़ रुपये का बकाया गन्ना भुगतान अभी तक चला आ रहा है।

जिसके बारे में आगामी सत्र के शुरू होने से पहले पूर्ण भुगतान के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि मिल की ओर से ऐसे दावे हर साल किए जाते हैं, लेकिन पिछले 10 साल से आगामी सत्र शुरू होने के बाद भी किनौनी मिल पर बकाया भुगतान निकलता आ रहा है। जिसके चलते किसान खून के आंसू रोने पर मजबूर हैं। किनौनी मिल के स्तर ने बीते सत्र में 174.23 लाख कुंतल गन्ना खरीदा है, जिसका कुल भुगतान 600 करोड़ रुपये के आसपास होता है। तमाम आंदोलनों और अधिकारियों की डांट फटकार के बावजूद अभी तक मिल की ओर 200 करोड़ रुपये बकाया बताया गया है।

इस बीच बजाज ग्रुप को सरकार के स्तर से 1361 करोड़ रुपये दिए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन बताया गया है कि बिजली की कीमत के रूप में दी जाने वाली इस बकाया राशि के आवंटन के लिए कैबिनेट की मोहर आवश्यक है। यानि कैबिनेट स्तर की बैठक में इस धनराशि के संबंध में प्रस्ताव पारित किए जाने तक बजाज के हाथ कुछ लगने वाला नहीं है।

इसमें अभी कितना समय लगेगा, अभी कहना मुश्किल है। किनौनी मिल के बकाया भुगतान और सेंटरों को लेकर लिए जाने वाले फैसले के संबंध में उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र से वार्ता का प्रयास किया गया। लेकिन उन्होंने लखनऊ में कोई निर्णय होने के बाद ही जानकारी देने की बात कही।

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