Wednesday, June 16, 2021
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किसानों के एकमात्र नेता थे चौधरी अजित सिंह

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डॉ. महक सिंह



किसानों के मसीहा युगपुरुष और देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के योग्यपुत्र चौधरी अजीत सिंह का जन्म 12 फरवरी 1939 को माता श्रीमती गायत्री देवी की कोख से हुआ था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। आईआईटी खड़कपुर से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री ली और उसके बाद अमेरिका में 17 वर्ष तक कंप्यूटर इंडस्ट्रीज में सर्वोच्च पद पर कार्य किया। वर्ष 1986 में विरासत में मिले किसान व देश प्रेम से वशीभूत होकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। सर्वप्रथम लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव बने। उसके बाद राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। वर्ष 1989, 1991,1996, 1997, 1999, 2004 बागपत लोकसभा क्षेत्र के सांसद निर्वाचित हुए। जनता पार्टी के अध्यक्ष जनता दल के मुख्य महासचिव जनता दल के अध्यक्ष राष्ट्रीय लोकदल के प्रारंभ से लगातार अध्यक्ष रहे। चौधरी अजीत सिंह के सरकार में उद्योग खाद्य एवं कृषि मंत्री रहे।

चौधरी चरण सिंह के स्वर्गवास के बाद देश में गांव गरीब किसान के लिए आवाज उठाने वाले नेताओं की कमी महसूस की जाने लगी थी। लोकसभा व विधानसभा में किसानों की समस्याओं पर चर्चा मंद पड़ने लगी थी। चौधरी अजित सिंह के राजनीति में प्रवेश से गांव के विकास व किसानों की आवाज उठाने वाले नेता के रूप में उभर कर वह सामने आए। चौधरी अजित सिंह ने केंद्र में मंत्री रहते गांव में किसानों के हित में महत्वपूर्ण कार्य किए। केंद्रीय उद्योग मंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र वआंध्र प्रदेश में 40 नए चीनी मिलों की स्वीकृति दी, जिससे करोड़ों किसानों को फायदा हुआ। उन्होंने वर्ष 1996 में चीनी मिलों की स्थापना हेतु निर्धारित दूरी 25 किलोमीटर से हटाकर 15 किलोमीटर की थी। खाद्य मंत्री रहते हुए किसानों के गन्ने का उचित मूल्य दिलाने के लिए चीनी के आयात को रोककर निर्यात कराया। केंद्र सरकार द्वारा किसानों पर लगाए गए गुड नियंत्रण कानून को निरस्त किया। शीरे को नियंत्रण मुक्त किया। किसानों को प्रति टन गन्ने की सप्लाई पर 750 ग्राम चीनी का विशेष कोटा जारी कराया। चीनी मिलों के उत्पादित सिरे से बनने वाले एथनॉल को वाहनों में पेट्रोल के साथ मिलाकर पेट्रोलियम मंत्रालय से 5 प्रतिशत सम्मिश्रण की स्वीकृति कराई। कृषि मंत्री रहते हुए उन्होंने 5 रुपये की वृद्धि कराई।

केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में सूखा राहत के अंतर्गत सभी किसानों को 2 हेक्टेयर भूमि की सीमा तक सूखा राहत के लिए आर्थिक मदद दिलवाई। सूखाग्रस्त किसानों के ऋणों का आंशिक ब्याज माफ कराया। अपने कार्यकाल में सभी कृषि उत्पादों न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करके लाभप्रद मूल्य दिलवाया। किसानों की फसलों की उपज को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने पर लगी पाबंदी को हटवाया। कीटनाशक अधिनियम में संशोधन हेतु यह प्रस्ताव किया कि प्रत्येक कीटनाशक दवा विक्रेता द्वारा एक कृषि स्नातक की सेवा योजित करना अनिवार्य होगा। शीतगृहों के निर्माण पर 25 प्रतिशत अनुदान तथा अधिकतम 50 लाख की सुविधा उपलब्ध कराई। कृषि यंत्रों पर बैंक ऋण की ब्याज दर में कमी करवाई। चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय डेयरी योजना का शुभारंभ किया। राष्ट्रीय गौ पशुधन का गठन किया। दुग्ध उत्पादन आदेश को संशोधित कर क्षेत्रीय आरक्षण समाप्त किया। बागपत में चौधरी चरण सिंह पशु स्वास्थ्य राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना कराई। केंद्रीय सरकार द्वारा दी फसलों पर दी जा रही सब्सिडी को कम करने का विरोध किया। खाद के बढ़े हुए मूल्य को कम करवाया। मंत्रिमंडल में रहते हुए किसानों पर आयकर लगाने के सरकार के निर्णय का सार्थक विरोध किया। कृषि मंत्री रहते हुए गन्ना किसानों को उचित मूल्य दिलाने का मुद्दा मंत्रिमंडल में उठाया। जब सरकार की नियत में खोट देखा तो किसान ट्रस्ट, जिसके चौधरी अजित सिंह अध्यक्ष थे, की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कराई। मंत्री पद पर रहते हुए किसान हित के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 18 सूखाग्रस्त राज्यों को मात्र 2201 करोड़ की सहायता दी जाए। यूटीआई को 11.50 हजार करोड़ का अनुदान दिया गया था। वह देश के एकमात्र नेता थे, उन्होंने कहा कि मकान व कार खरीदने के लिए 8 प्रतिशत पर ऋण पर दिया जाता है। किसानों को ऋण पर आठ प्रतिशत का ब्याज क्यों नहीं।

आर्थिक उदारीकरण के दौर में गेट समझौते, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन के दबाव में आज विश्व के विकसित देश व बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत की कृषि और उसके बाजार पर कब्जा करना चाहती हैं। भारत की जैविक संपदा नष्ट करके अपने उत्पादों से भारतीय बाजार को पाट दिया है। देश में कारपोरेट व कांटेक्ट खेती के प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को उसके लिए आर्थिक रूप से पंगु बनाकर राजनीतिक रुप से कमजोर करना चाहते हैं। विशेष आर्थिक जोन के नाम पर किसानों से सस्ती जमीन ली जा रही है। चौधरी अजित सिंह जब तक सत्ता में रहे तब तक वह किसान हितों के लिए कार्य करते रहे।


 

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