Wednesday, April 21, 2021
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अपनी बेनूरी पर रो रहा ‘कसेरूखेड़ा नाला’

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  • गंदे पानी को बगैर ट्रीटमेंट किए और शहर की सीवर की गंदगी सीधे पड़ रही नाले में
  • गंदगी को साफ करने के लिए अभी तक हुई सिर्फ बातें, हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं अधिकारी

मनोज राठी |

गंगानगर: शहर की तमाम गंदगी वर्षों से अपने अंदर समेटे हुए कसेरूखेड़ा नाला अपनी बेनूरी पर आंसू बहा रहा है। यहां प्रत्येक कॉलोनी से गंदा पानी बगैर ट्रीटमेंट प्लांट के ही सीधे नाले में डाला जा रहा है। गंदगी को साफ करने के लिए अभी तक सिर्फ बातें ही हो रही है। जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

योजनाएं तो बन रही है, लेकिन उनका क्रियान्वयन क्यों नहीं हो रहा है इसका किसी के पास जवाब नहीं है। क्षेत्र में दो-दो ट्रीटमेंट प्लांट होने के बाद भी शहर भर के सीवरों से गंदगी लाकर डिफेंस कालोनी के नाले में बहायी जा रही है।

इसकी वजह से न केवल यहां का भूमिगत जल स्रोत प्रदूषित हो गया है, बल्कि इसकी वजह से नाले के आसपास रहने वाली डिफेंस कालोनी समेत एक बड़ी आबादी इस गंदगी के कारण नाले से उठने वाली दुर्गंध से बुरी तरह से परेशान हैं। ऐसा केवल सरकारी वाहन ही नहीं करते बल्कि तमाम प्राइवेट वाहन चालक जो घरों तथा कालोनियों में सीवर की सफाई कर वहां की गंदगी टैंकरों में भर लाते हैं, वो भी ऐसा कर रहे हैं। जबकि कुछ ही दूरी पर भारी भरकम रकम खर्च कर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं।

हर तरफ गंदगी ही गंदगी

क्षेत्र में नालियों का सीधा गंदा पानी बगैर ट्रीटमेंट प्लांट के ही गंदा पानी कसेरूखेड़ा नाले में छोड़ा जा रहा है। इसका प्रभाव ये हो रहा है कि जो नाला पहले से ही गंदगी से दम तोड़ चुका है। वह गंदे पानी का भंडार बनकर रह गया है। नाले में जिस प्रकार से शौच बहाया जाता है।

उससे नाले में शौच बहाने वालों को तो राहत मिलती है, लेकिन अधिकांश लोगों को इससे काफी परेशानी हो रही है। खुले नाले में शौच बहने के कारण उससे बदबू उठती रहती है। जो लोगों को परेशान कर रही है। नाले की स्थिति ऐसी हो गयी है कि वह कभी भी महामारी का रूप धारण कर सकती है।

प्रदूषण को बढ़ाती प्लास्टिक थैलियां

प्लास्टिक थैलियों के बढ़ते प्रचलन से सफाई व्यवस्था में जबर्दस्त अवरोध पैदा हो रहा है। लोगों द्वारा घरों आदि का कूड़ा-करकट प्लास्टिक की थैलियों में बन्द कर नाली में फेंक दिया जाता है। ये पॉलीथीन की थैलियां नाले-नालियों और सीवर लाइनों में पहुंचकर उन्हें अवरुद्ध कर देती हैं। यह पॉलीथीन कूड़े के साथ नाली-नालों के पानी में बह जाता है। नालों में पानी के साथ बहकर आया पॉलीथीन उनकी ऊपरी सतह पर जमा हो जाता है और पानी के बहाव को रोक देता है।

नाली-नालों को अवरुद्ध करने के साथ-साथ पॉलीथीन सीवर लाइन के अन्दर पहुंचकर उसे भी जाम कर देता है। कहीं-कहीं नालों का पानी सीवर में ले जाने के लिए सीवर जाली लगाई जाती है। नाली-नालों के पानी में बहकर आया पॉलीथीन सीवर जाली के मुंह पर पहुंचकर उसे पूरी तरह से बन्द कर देता है जिसे दिन में कई-कई बार साफ करने की आवश्यकता पड़ती है। अवरुद्ध सीवर लाइनों की सफाई कराने पर उनमें सबसे अधिक पॉलीथीन ही निकलता है।

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