Thursday, October 28, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutप्रतिबंध पर हावी आस्था, खूब हुए दीपदान

प्रतिबंध पर हावी आस्था, खूब हुए दीपदान

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  • वर्षों पूरानी टूटी परंपरा गंगास्नान से एक दिन पहले यानि चतुर्दशी में दीपदान करने का होता था महत्व
  • हर साल देव उठाने के बाद ग्रामीण क्षेत्र के लोग गंगा के निकट डाल लेते थे डेरा

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: कोरोना वैश्विक महामारी के चलते प्रतिबंधित हुए कार्तिक पूर्णिमा गंगा मेले में रविवार को प्रतिबंध पर आस्था भारी होती नजर आई। लोगों की श्रद्धा के आगे प्रशासन की तमाम तैयारियां ध्वस्त हो गई शाम ढलते-ढलते लोगों ने जहां गंगा का पानी देखा वही दीपदान करना शुरू कर दिया।

हजारों श्रद्धालुओं ने दूसरी जगह गंगा किनारों पर दीपदान किया और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना की। इस बीच सैकड़ों श्रद्धालुओं को पुलिस ने वापस भी भेज दिया।

जिले में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शासन-प्रशासन के अधिकारियों ने कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले गंगास्नान मेले को स्थगित कर दिया था। तमाम माध्यमों से मेला स्थगित होने की सूचना भी सार्वजनिक कर लोगों से गंगा घाट न पहुंच कर पितरों की आत्मा शांति के लिए घरों में ही विधि विधान से पूजा करने की अपील की।

जिसके लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर गंगा घाटों पर भारी पुलिस बल भी तैनात किया। रविवार शाम को होने वाले दीपदान के के लिए उमड़ी भीड़ और श्रद्धा के सामने प्रशासन की तमाम तैयारियां बोनी नजर आई।

लोगों ने श्रद्धा पूरी करने के लिए हस्तिनापुर वन आरक्षित जंगल से होकर गुजरने वाली मध्य गंग नहर से लेकर प्राचीन बूढ़ी गंगा और गंगा नदी के मखदूमपुर गंगा घाट, खेड़ीकलां और मनोहरपुर गंगा घाट सहित तमाम घाटों पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर दीपदान किया।

कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले के अवसर पर प्रतिवर्ष मखदूमपुर गंगा मेले में लाखों श्रद्धालु पहुंचते थे परंतु इस बार प्रतिबंध के चलते श्रद्धालु नहीं पहुंचे स्थानीय वह आसपास के सैकड़ों श्रद्धालु आस्था के चलते गंगा किनारे पहुंचे। जिन्होंने गंगा घाट पर पुलिस के प्रतिबंध को देखते हुए क्षेत्र में अन्य गांव के किनारों पर पहुंचकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दीपदान और पिंडदान किया।

इन घाटों पर हुआ जमकर दीपदान

रविवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मखदूमपुर गंगा घाट व भीमकुंड घाट, फतेहपुर प्रेम गंगा घाट पर भारी पैमाने पर पुलिस की तैनाती की गई थी। घाटों पर पुलिस की तैनाती को देखते हुए श्रद्धालुओं ने इधर-उधर गंगा के किनारे पर पूजा-अर्चना कर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दीपदान किया। मखदूमपुर गंगा घाट पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। जहां पर पुलिस ने सैकड़ों श्रद्धालुओं को वापस लौटा दिया।

डीएम ने गंगा घाट की स्थिति का लिया जायजा

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मखदूमपुर गंगा घाट पर लगने वाले मेले को इस बार कोरोना के चलते स्थगित किया गया था। साथ ही श्रद्धालुओं को मेला स्थल से रोकने के लिए पुलिस भी तैनात की गई है। रविवार को डीएम के. बालाजी ने तहसीलदार अजय कुमार उपाध्याय व एसडीएम सरधना अमित कुमार भारतीय के साथ पहुंच कर मखदूमपुर गंगा घाट का जायजा लिया और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि गंगा पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को पूर्ण रूप से रोका जाए और श्रद्धालुओं को गंगा में स्नान न कराया जाए और कोरोना कि सभी गाइडलाइनों का पालन किया जाए।

कोरोना महामारी ने गंगास्नान मेले पर लगाया ब्रेक

कोरोना महामारी अपना पूरा असर दिखा रही है। कोरोना के चलते इस वर्ष गंगा स्नान मेले पर जहां ब्रेक शासन स्तर पर लगाया गया हैं, वहीं इससे गंगा स्नान की वर्षों पुरानी परंपरा भी टूट गई है। वहीं बता दें कि गंगा स्नान यानि पूर्णिमा से एक दिन पहले चतुर्दशी के दिन दीपदान का भी महत्व होता हैं, लेकिन मेले पर प्रतिबंधन की वजह से लोगों को इसके लिए भी काफी परेशान होना पड़ा।

बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गढ़मुक्तेश्वर और मखदूमपुर गंगा घाट पर हर साल विशाल मेला लगता था, जिसके जाने के लिए देवोत्थान एकादशी वाले दिन देव उठाने के बाद गंगा मेले की ओर प्रस्थान कर देते थे और गंगा के किनारे तंबू बना गंगा स्नान के लिए पहुंच जाते थे। मगर इस वर्ष ऐसा कुछ नहीं हो सका है।

केवल सरकार की ओर से दीपदान करने वाले लोगों ही गंगा घाट पर जाने की परमिशन दी गई है। ऐसे में शनिवार को गंगा घाट पर लोगों की काफी भीड़ देखने को मिली जिसमें लोग अपने माता-पिता या फिर अन्य रिश्तेदारों के लिए दीपदान किया। बता दें कि इस मेले में दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक के लोग हर साल आते थे।

दो चतुर्दशी होने की वजह से रविवार को भी हुआ दीपदान

इस वर्ष मलमास होने के कारण तिथियों में काफी फेरबदल हुआ हैं, जिसकी वजह से गंगा स्नान से एक दिन पहले पड़ने वाली चतुर्दशी दो दिन मनाई गई। इसके चलते लोगों ने शनिवार और रविवार दोनों ही दिन दीपदान किया। दीपदान के लिए गंगा घाटों पर रोक के बावजूद भीड़ देखने को मिली और नम आंखों से लोगों ने अपनो के लिए दीपदान किया।

कार्तिक पूर्णिमा पर घर में स्नान कर कमा सकते हैं पुण्य

कोरोना संक्रमण को देखते हुए शासन की ओर से इस बार कार्तिक पूणिर्मा पर होने वाले स्नान पर भले ही रोक लगा दी गई हो, लेकिन भक्त घर पर रहकर भी गंगा जल से स्नान कर पुण्य कमा सकते हैं। ज्योतिषाचार्य राहुल अग्रवाल का कहना है कि विधिवत पूजा के बाद घर पर गंगाजल से स्नान करने से गंगा नदी में स्नान करने के बराबर ही पुण्य मिलता है। कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर को दोपहर तीन बजे तक रहेगी।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान करना 10 यज्ञों के समान पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन किए जाने वाले दान-पुण्य समेत कई धार्मिक कार्य विशेष फलदायी होते हैं। ज्योतिषाचार्य आलोक शर्मा के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा की संध्या पर भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार हुआ था। एक अन्य मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन महादेव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था।

पिंडदान के लिए सिर्फ दो ही लोगों की अनुमति

खादर क्षेत्र के गांव खरखाली गांधी गंगा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला मेला स्थागित हो गया है। पुलिस ने अलग-अलग मार्गों पर चार बेरिकेडिंग लगाकर श्रद्धालुओं को रोका और पिृतरों की आत्म शांति के लिए दो लोगों को दीपदान व पिंडदान के लिए गंगा पर जाने दिया।

कोरोना महामारी के चलते प्रदेश सरकार ने कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले को स्थागित कर दिया है। जिसके चलते खादर क्षेत्र के गांव खरखाली में वर्षों से कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालु तीन दिन पहले पहुंचकर गंगाघाट पर डेरा डालते थे तथा कई दिनों तम्बुओं की नगरी बसती थी और मेले में युवा व बच्चे जमकर आनंद उठाते थे। श्रद्धालु गंगा पर बैंडबाजे से बच्चे के मुंडन कराते थे।

मेला स्थागित होने पर पुलिस ने गंगा घाट पर जाने वाले सभी मार्गों पर बेरिकेडिंग लगाकर श्रद्धालुओं को रोका जा रहा है। पुलिस पिृतरों की आत्म शांति के लिए दीपदान व पिंडदान के लिए दो लोगों को गंगा पर जाने दिया गया। वहीं, सीओ सदर देहात ब्रिजेश सिंह ने गंगाघाट का जायजा लिया और पुलिस से जनसमूह के साथ गंगाघाट पर जाने वालों को रोकने के कड़े निर्देश दिए।

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