Sunday, June 13, 2021
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लॉकडाउन में होटल व रेस्टोरेंट पर ‘ताला’

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लॉकडाउन में होटल इंडस्ट्रीज व रेस्टोरेंट कारोबार पर ताले पड़े हैं। दो माह से बंद पड़े होटल व्यवसाय की अर्थ व्यवस्था पटरी से नीचे उतर गई है। होटल व रेस्टोरेंट पूरी तरह से बंद हैं, लेकिन बिजली के बिल की मार भी व्यवसायी पर पड़ रही है। लॉकडाउन में फूटी कोड़ी का बिजनेस नहीं हुआ। ऊपर से ऊर्जा निगम ने एक लाख से कम का बिजली बिल होटल व रेस्टोरेंट में नहीं भेजा।

जब होटल व रेस्टोरेंट बंद पड़े है तो फिर बिजली का बिल मय सर्चाज के भेजा जा रहा है। कर्मचारियों की वेतन का भार भी पड़ रहा है। क्योंकि लॉकडाउन से पहले होटल व रेस्टोरेंट चल रहे थे। तब कर्मचारी काम कर रहे थे। अचानक लॉकडाउन के बाद स्थिति बदल गई।

यदि कर्मचारियों को छुट्टी पर भी भेज दिया गया होगा, लेकिन बाकी खर्चे तो बराबर चल रहे हैं। जैसे बिजली का बिल अहम है, इसमें ऊर्जा निगम फूटी कोड़ी की छूट करने को तैयार नहीं है। एक तो उद्यमियों का कारोबार चौपट हो गया, ऊपर से सरकार की तरफ से भी कोई मदद उद्यमियों को नहीं मिल रही है।

ऐसे में उद्यमी बर्बादी की तरफ बढ़ रहा है। क्योंकि शहर के लिए होटल इंडस्ट्रीज करोड़ों का लग्जरी टैक्स देता हैं, लेकिन दो वर्षों से देखा जाए तो होटल इंडस्ट्रीज पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। पहला सीजन भी कोरोना के चलते पिटा अब दूसरा सीजन चल रहा है, वह भी लॉकडाउन से तबाह हो गया है।

होटल इंडस्ट्रीज के हालात बेहद विकट पैदा हो गए हैं। यही नहीं, सरकार से भी इसमें कोई राहत नहीं मिली है। ऐसी परिस्थिति रही तो होटल इंडस्ट्रीज आने वाले एक वर्ष तक उबर नहीं पाएगी। वर्तमान में शादी का सीजन चल रहा है, जो पूरी तरह से पिट गया।

शहर के बड़े होटल गॉडविन, ब्रेवरा, होटल हारमनी इन, होटल कंट्रीन, दो आब होटल, होटल ब्रोड-वे हो या फिर आबूलेन के होटल नवीन, राजमहल होटल समेत तमाम होटल इंडस्ट्रीज बंद पड़ी है। कोरोना की दूसरी लहर की कोई तैयारी नहीं थी। कहीं कोई अलर्ट नहीं था, लेकिन अचानक आयी कोरोना की दूसरी लहर ने होटल इंडस्ट्रीज को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

आर्थिक चोट से बचाने के लिए होटल उद्यमियों ने ज्यादातर स्टाफ को हटा भी दिया, लेकिन इससे भरपाई कर पाना असंभव है। स्टाफ की छटनी करने से नहीं, बल्कि बिजली के बिल में जो छूट सरकार की तरफ से की जानी चाहिए, उस तरफ कोई राहत मिलेगी ऐसा संभव नहीं लग रहा है। क्योंकि सरकार की तरफ तमाम बयान-बाजी तो की जा रही है, लेकिन उद्यमियों को बचाने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है।

राहत की दरकार

होटल उद्यमियों से बातचीत के बाद यह तथ्य सामने आया है कि होटल इंडस्ट्रीज को राहत की दरकार है, जो सरकार दे पाएगी या फिर नहीं? इसी पर होटल इंडस्ट्रीज से जुड़े उद्यमियों की निगाहें लगी हुई है। क्योंकि पिछले वर्ष भी कोरोना के चलते सीजन पिट गया था और इस बार भी सीजन पिट गया है।

इस तरह से होटल इंडस्ट्रीज पूरी तरह से प्रभावित हुई है। अभी कब होटल इंडस्ट्रीज खुलेगी? इसका भी कुछ पता नहीं है। होटल के मुख्यद्वार पर सिक्योरिटी गार्ड ही बैठे हैं, पूरी तरह से होटल पर तालाबंदी है। शहर का एक भी होटल ऐसा नहीं है, जो ओपन हो। सभी बंद पड़े हैं।

इसमें फाइव स्टार होटल हो या फिर छोटे होटल। सभी बंद है। होटल इंडस्ट्रीज से जुड़े कर्मचारी व अन्य व्यवसायी भी प्रभावित हो रहे हैं। क्योंकि सीजन में विवाह समारोह होते है तो बहुत सारे लोग व्यवसाय से जुड़े होते है तथा उनके घर इसी से चलते हैं।

रेस्टोरेंट भी दुर्गति के दौर में

शहर भर में चलने वाले रेस्टोरेंट भी बंद पड़े हैं। उनमें भी तालाबंदी है। पिछले दो माह से यही हाल सभी रेस्टोरेंट का है। जो कर्मचारी रेस्टोरेंट में काम करते थे उन्हें भी घर भेज दिया गया। क्योंकि अर्थ व्यवस्था बिगड़ गई है, यदि इसमें कर्मचारी रोके जाते तो और भी क्षति रेस्टोरेंट की हो सकती थी।

यदि किसी ने रोक भी रखा है तो उस पर दोहरी मार पड़ रही है। पहले तो रेस्टोरेंट बंद पड़े हैं फिर दूसरे कर्मचारियों को वेतन देना पड़ेगा। फिर बिजली के बिल भी एक लाख से कम के नहीं आ रहे हैं, यह हालत तो तब है जब रेस्टोरेंट पर तालाबंदी है। बिजली का कोई प्रयोग नहीं हो रहा है, मगर सरचार्ज समेत तमाम चीजों को जोड़कर भेजा जा रहा है।

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