Sunday, July 21, 2024
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutहर तोल में हो रहा गड़बड़ घोटाला, कोई नहीं है रोकने वाला

हर तोल में हो रहा गड़बड़ घोटाला, कोई नहीं है रोकने वाला

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  • दुकानदारों की घटतोली पकड़ने के बावजूद कार्रवाई करने से परहेज कर रहे बाट-माप विभाग के अधिकारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कहा जाता है कि चोर चोरी से जाए पर हेराफेरी से न जाए, घटतोली को लेकर कितना भी डिजिटलाइज्ड सिस्टम हो जाए, लेकिन तोल में गड़बड़-घोटाला नहीं रुकेगा। अधिकांश दुकानदारों को चाहे जो भी तरकीब लगानी वो तोल में डांडी जरूर मारेगें।

ऐसे ही मामले जनपद के अलग-अलग हिस्सों में आए दिन देखने को मिलते रहते हैं। जिसके चलते आम आदमी की कमाई पर अधिकांश दुकानदार खुलेआम डांका डाल रहे हैं। बावजूद इसके बाट-माप विभाग के अधिकारी इस बाबत कोई ठोस कदम उठाने से परहेज कर रहे हैं।

आम आदमी की कमाई पर किस तरह से अधिकांश दुकानदार सेंध लगा रहे हैं। यह सिटी की मंडियों में व देहात के बाजारों में जाकर देखा जा सकता है। यहां दुकानदार सामान कम तोल रहे हैं, छोटी-बड़ी तराजू से लेकर इलेक्ट्रानिक्स कांटों की तोल में अधिकांश दुकानदार गड़बड़ कर रहे हैं। सब्जी मंडी में इलेक्ट्रानिक्स कांटा से आलू, प्याज, भिंडी, बैगन तोलते के लिए उसमें इस तरह से अंकों की सेटिंग की गई है कि एक किलो के तोल में 30 से 40 ग्राम तक सब्जी बचा लेते थे।

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शहर से लेकर देहात तक सड़क पर जितने भी दुकानदार हैं, उसमें से अधिकतर के पास लोहे का बाट ही नहीं है। कई सब्जी विक्रेता तो ऐसे हैं जो पत्थर और र्इंट के बने बाट से तोल करते हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करने की ब्जाय बाट-माप विभाग के अधिकारी मौन साधे हुए हैं। मेरठ शहर के अलावा मवाना,सरधना तहसील क्षेत्र में भी पूर्व में ऐसे कई मामले देखने को मिले जिनमें दुकानदार घटतोली करके उपभोक्ता की जेब काट रहे हैं।

शिकायत पर विभाग के अधिकारी उक्त दुकानदारों के यहां जाते तो जरूर हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करके वापस लौट आते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह बनता है कि आखिर कब तक आम आदमी को खराब सिस्टम का सामना करना पडेÞगा।

इस बारे में जागरुक उपभोक्ताओं का कहना है कि अधिकांश दुकानदार उपभोक्ताओं को चूना लगा कर अपनी जेब गर्म कर रहे हैं, और उसी का एक हिस्सा बाट-माप विभाग के अधिकारियों को पंहुच रहा है। जिसके चलते कार्रवाई जीरो है। वहीं जागरूकता के अभाव में आम आदमी को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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