Saturday, May 2, 2026
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पोषण पाठशाला आज, मिलेगी पोषण पर शिक्षा

जनवाणी संवाददाता |

सहारनपुर:  प्रदेश के सभी 75 जनपदों में 26 मई(आज) पोषण पाठशाला का आयोजन किया जाएगा। पाठशाला अपराह्न 12 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगी। इस पाठशाला में जिला कार्यक्रम प्रबंधक, बाल विकास परियोजना अधिकारी, मुख्य सेविका, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के लाभार्थी, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं प्रतिभागी होंगी।

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जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी ने बताया कि 26 मई(आज) अपराह्न 12 से दोपहर दो बजे तक पोषण पाठशाला एनआईसी के माध्यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी। इस कार्यक्रम की मुख्य थीम शीघ्र स्तनपान केवल स्तनपान है।

पोषण पाठशाला में अधिकारियों के अतिरिक्त विषय विशेषज्ञ शीघ्र स्तनपान केवल स्तनपान की आवश्यकता महत्व, उपयोगिता आदि पर हिन्दी में चर्चा करेंगे। कॉन्फ्रेसिंग के जरिए लाभार्थियों व अन्य के प्रश्नों का उत्तर भी मिलेगा।
जन्म के एक घंटे के अंदर नवजात को स्तनपान की दर मात्र 23.9 प्रतिशत
जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी ने बताया राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5)) के अनुसार उत्तर प्रदेश में शीघ्र स्तनपान (जन्म के एक घंटे के अंदर नवजात शिशु को स्तनपान ) की दर 23.9 प्रतिशत है और छह माह तक के शिशुओं में केवल स्तनपान की दर 59.7 प्रतिशत है।

शिशुओं में शीघ्र स्तनपान व केवल स्तनपान उनके जीवन की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है, परंतु ज्ञान के अभाव और समाज में प्रचलित विभिन्न मान्यताओं व मिथकों के कारण यहसंभव नहीं हो पाता है।उन्होंने कहा यह व्यवहार शिशु स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध होता है। इसके लिए माह मई व जून में प्रदेश मेंपानी नहीं, केवल स्तनपान अभियान चलाया जा रहा है।
जन्म के एक घंटे के अंदर शिशु को स्तनपान जरूरी

डीपीओ आशा त्रिपाठी का कहना है कि मां का दूध शिशु के लिए अमृत के समान है। शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने के लिए यह आवश्यक है कि जन्म के एक घंटे के अंदर शिशु को स्तनपान प्रारंभ करा देना चाहिए व छह माह की आयु तक उसे केवल स्तनपान कराना चाहिए।

लेकिन समाज में प्रचलित विभिन्न मान्यताओं व मिथकों के कारण केवल स्तनपान सुनिश्चित नहीं हो पाता है। मॉ एवं परिवार को लगता है कि स्तनपान शिशु के लिए पर्याप्त नहीं है और वह शिशु को अन्य चीचें जैसे- घुट्टी, शर्बत, शहद, पानी पिला देती हैं। स्तनपान से ही शिशु की पानी की भी आवश्यकता पूरी हो जाती है। इसलिए शीघ्र स्तनपान केवल स्तनपान की अवधारणा को जन जन तक पहुंचाना है।

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