Monday, November 29, 2021
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बच्चों को आनलाइन क्लॉस की लगी नजर

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जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बच्चों को आनलाइन क्लॉस की नजर लग गई है। कोरोना संक्रमण की वजह से करीब डेढ़ साल से बच्चे मोबाइल व कम्प्यूटर पर आॅनलाइन क्लॉस कर रहे हैं। जिसका दुष्प्रभाव बच्चों पर दिखाना शुुर हो गया है।

बता दें कि कोरोना के बाद शासन के निर्देशानुसार सभी स्कूल और कॉलेजों को तो खोल दिया गया हैं, लेकिन अभी भी अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों को आॅफलाइन की जगह आॅनलाइन कक्षा में ही पढ़वाना पसंद कर रहे हैं।

यह हाल प्राइवेट स्कूलों में अधिक देखने को मिल रहा है। पहले से छात्र संख्या में इजाफा तो हुआ हैं, लेकिन पहले की भांति अभी स्कूल संचालित नहीं किए जा रहे हैं। वहीं, कुछ स्कूलों ने टाइम टेबल बनाया हुआ हैं, जिसके अनुसार एक दिन क्लॉस करने वाले छात्र अगले दिन आॅनलाइन कक्षा में भाग लेंगे यानि की वह अगले दिन स्कूल नहीं आएंगे।

आॅनलाइन कक्षाओं की वजह से छात्र-छात्राओं को कम उम्र में ही आंखों में परेशानी की शिकातय होने लगी है और आंखों के डॉक्टरों के पास ऐसे छात्रों की संख्या में आय दिन इजाफा हो रहा है। वहीं, आॅनलाइन कक्षाओं को लगातार करने की वजह से बच्चे चिड़चिड़े भी होते जा रहे हैं। जोकि अभिभावकों के लिए समस्या का विषय बनता जा रहा है।

सीबीएसई काउंलसर डा. पूनम देवदत्त का कहना है कि आॅनलाइन कक्षाओं में जब बच्चे शिक्षकों द्वारा पढ़ाए जा रहे विषय को सही से नहीं समझ पाते हैं तो उनके लिए वह बाद परेशानी बन जाती है। जिसकी वजह से वह दिमाक पर अधिक जोर डाल रहे हैं। वहीं, इस वजह से बच्चों के अंदर नकारात्मकता का भाव भी घर करने लगा है।

वहीं, वह बताती है कि लॉकडाउन की वजह से जो बच्चे काफी चंचल थे। उनके लिए अब आॅनलाइन कक्षाएं मुसीबत बन रही है, लेकिन स्कूलों में बच्चे कम पहुंचने की वजह से पूरी तरह अभी तक ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं दी जा रही है। जिसके चलते अभिभावक आॅनलाइन कक्षाओं का सहारा बच्चों के लिए ले रहे हैं।

कॅरियर को लेकर भी बच्चे हो रहे चितिंत

स्कूल शिक्षिकों की माने तो बच्चे अब कॅरियर को लेकर भी चितिंत होने लगे हैं। कई ऐसे बच्चे हैं, जो किशोरावस्था की उम्र को पार कर चुके हैं। आॅनलाइन कक्षाओं की वजह से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से नहीं हो पा रही है।

केएल स्कूल प्रधानाचार्या सुधांशु शेखर का कहना है कि स्कूल खुल चुके हैं, लेकिन अभी छात्र संख्या नहीं बढ़ पा रही है। आॅनलाइन कक्षाएं भी स्कूलों द्वारा संचालित की जा रही है। कुछ अभिभावक अब बच्चों को स्कूल भेजने में रुचि दिखा रहे हैं।

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