Saturday, April 17, 2021
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उफ! कुंभ पर इतनी सख्ती, 100 बार सोचेंगे श्रद्धालु

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  • हरिद्वार बॉर्डर पर कोविड टेस्ट को लेकर हो रही सख्ती से होटल उद्योग संकट में

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: 12 साल बाद हरिद्वार में कुंभ मेला आयोजित है और कोरोना के कारण उत्तराखंड सरकार ने आस्था पर तगड़ी चोट करते हुए चार महीने तक चलने वाले कुंभ को एक महीने से कम अवधि में समेटने का फरमान जारी कर रखा है। अब हालात यह है कि कुंभ में जाने वाले लोगों को जमकर बेवकूफ बनाया जा रहा है।

पहले उत्तराखंड बॉर्डर पर घंटों कोविड टेस्ट की लाइन में लगे रहो और बाद में स्लिप लेकर जब होटल में कमरा लेने जाओ तो वहां से भगा दिया जाता है। सरकार की इस सख्ती ने पूरे पर्यटन उद्योग को संकट में डाल दिया है।
मेरठ और आसपास के कई शहरों से लोग हरिद्वार में चल रहे कुंभ मेले में जा रहे हैं।

इनको वहां परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हरिद्वार जाने वाले लोग इस बात से परेशान हैं कि जब वो हरिद्वार सीमा पर पहुंचे तो उनसे कोविड टेस्ट के लिये कहा गया। करीब दो घंटे खड़े रहने के बाद उनका नंबर आया और आरटीपीसीआर जांच हुई और उनको एक स्लिप थमा दी गई।

हरिद्वार में प्रवेश कर जब वे होटल में कमरा लेने गए तो उनको स्लिप देखकर कमरा देने से मना कर दिया गया।श्रद्धालु परेशान घूमते रहे, लेकिन उनको किसी ने ठहरने के लिये कमरा नहीं दिया। उत्तराखंड सरकार की सख्ती के कारण हरिद्वार में होटल उद्योग पूरी तरह से तबाही की कगार पर पहुंच गया है और गत वर्षों में अप्रैल के महीने में जब होटल भरे रहते थे वर्तमान समय में हालत यह हो गई है कि बड़े से बड़े होटलों में नाममात्र के कमरे भी नहीं भरे हुए हैं।

हैरानी की बात यह है कि मसूरी और देहरादून में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कोरोना का साया वहां नहंी दिख रहा है। जानकारों का मानना है कि अकेले हरिद्वार में ही होटलों की 75 फीसदी बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। हरिद्वार से लौट कर आए लोगों का कहना है कि अगर इस तरह की सख्ती रही तो उत्तराखंड की बजाय हिमाचल प्रदेश और गोवा जाने में क्या बुराई है।

दिल्ली के राजेन्द्र नगर निवासी राजीव कुमार और सुशील जैन का कहना है कि कुंभ जैसे आस्था के प्रतीक मेले में इस तरह की सख्ती करने का कोई मतलब नहीं बनता है। जब पूरे देश में कोरोना बढ़ रहा है ऐेसे में कोरोना क्या पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडु, असम आदि जगह पर सख्ती क्यों नहीं हो रही है। अकेले उत्तराखंड में ही सारे प्रयोग क्यों किये जा रहे हैं। होटल व्यवसायी राजू रस्तोगी का कहना है कि 2020 में कोरोना के कारण होटल उद्योग चौपट हो गया था अब सरकार ने बर्बादी के रास्ते खोल दिये हैं।

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