Wednesday, May 13, 2026
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ज्यादा आबादी अभिशाप या वरदान

Samvad 1


rajesh jainसंयुक्त राष्ट्र के नए आंकड़ों के मुताबिक भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया है। अब भारत की जनसंख्या 142 करोड़ 86 लाख है। वहीं चीन की जनसंख्या 142 करोड़ 57 लाख है यानी हमारी आबादी चीन से करीब 30 लाख ज्यादा है। यह सब अचानक नहीं हुआ है। 2023 की शुरूआत में ही ग्लोबल एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया था कि इस साल भारत सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। दरअसल, चीन ने 1979 में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए एक नीति लागू की थी। उसके तहत एक से अधिक बच्चे पैदा करने पर रोक लगा दी गई थी। जानकारों के मुताबिक चीन की एक बच्चे की नीति की वजह से करीब 40 करोड़ बच्चे पैदा नहीं हो सके। यह उसी का असर है। बहरहाल, देश में सवाल खूब चर्चा में है कि यह अच्छी खबर है या बुरी, बढ़ती जनसंख्या को अभिशाप माना जाए या वरदान? कुछ लोगों का मानना है कि जनसंख्या का बढ़ना एक चुनौती है।

इससे संसाधनों पर बोझ बढ़ेगा। इसलिए बढ़ती जनसंख्या को किसी भी हालत में रोकने की जरूरत है और इसके लिए सरकार को समुचित कानून बनाने की जरूरत है।दूसरी ओर दलील यह भी दी जाती है कि ज्यादा जनसंख्या का मतलब देश की अर्थव्यवस्था के पहिए को तेजी से घुमाने वाले ज्यादा हाथ। चीन ने खुद अपनी आबादी को जरिया बनाकर अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (18 ट्रिलियन डॉलर) में तब्दील कर लिया।

भारत की आधी आबादी 30 साल से कम लोगों की है जिनकी औसत उम्र 28 वर्ष है। अमेरिका और चीन की बात की जाए तो वहां की औसत उम्र 38 वर्ष है। आंकड़ों को देखें तो चीन बूढ़ा होने की राह पर है। अभी चीन की औसत उम्र 39 साल है। अगले 27 साल में यानी 2050 तक उसकी औसत उम्र 51 वर्ष हो जाएगी।

गौरतलब है कि 34 करोड़ की अनुमानित जनसंख्या के साथ अमेरिका तीसरे नंबर पर है। इसमें शक नहीं कि युवा आबादी वाला भारत एक शक्तिशाली देश है। भारत के पास वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन और उपभोग में वृद्धि लाने की असीम संभावना है।

शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता ओर आर्थिक विकास के मामले में यह लगातार आगे बढ़ रहा है। हम तकनीकी मामले में हर रोज नए-नए रिकॉर्ड्स बना रहे हैं। अगर हम अपनी स्किल पर मेहनत करें तो देश की युवा आबादी के बूते इनोवेशन को बढ़ावा देने और तकनीकी बदलावों के मामले में खुद को अव्वल साबित कर सकते हैं।

ब्रेन ड्रेन रोककर देश के मानव संसाधन का समुचित उपयोग किया जा सकता है। हम युवा आबादी का फायदा देश के विकास के लिए उठा सकते हैं। लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि विश्व की सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में हम अपनी युवा आबादी को बेहतर मानव संसाधन में तब्दील करें।

जिससे इस युवा आबादी को हम अपनी कमजोरी की जगह ताकत बनाकर उनका देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में इस्तेमाल कर सकें। आबादी में भारत से पिछड़ने के बाद चीन की प्रतिक्रिया पर हमें रुककर गौर करना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस बारे में कहा कि सिर्फ आबादी का बढ़ना ही काफी नहीं है, बल्कि बढ़ती हुई आबादी में काबिलियत भी होनी चाहिए।

आबादी का फायदा सिर्फ जनसंख्या बढ़ाने से ही नहीं मिलता है बल्कि इसके साथ टैलेंट भी होना बहुत जरूरी है। दरअसल, दुनिया की लगभग 2.4 प्रतिशत जमीन वाला देश भारत कुल वैश्विक आबादी के करीब पांचवें हिस्से का घर है। भारत में अमेरिका, अफ्रीका या यूरोप की पूरी आबादी से अधिक लोग रहते हैं।

देश में औद्योगिकरण के बढ़ने से एक बड़ी आबादी ने परंपरागत खेती-किसानी के पेशे को छोड़ दिया है। जारी आंकड़ों के अनुसार चीन और भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा अतंर (करीब पांच गुना) है। भारत में महिला श्रमिकों की भागीदारी दर चीन की तुलना में काफी कम हैं।

जहां चीन में अधिकांश महिलाएं काम करती हैं, वहीं भारत में एक तिहाई से कुछ कम महिलाएं ही काम करती हैं। यह भी अनुमान लगाया गया है कि साल 2060 तक भारत की आबादी बढ़ती रहेगी, वहीं 2060 के बाद भारत की जनसंख्या स्थिर हो जाएगी।

जारी आंकड़ों के अनुसार साल 2050 तक हर पांचवां भारतीय बुजुर्ग हो जाएगा। ऐसे में युवाओं, महिलाओं को पर्याप्त रोजगार मिले, इस पर नीति निर्धारकों को ध्यान देने की जरूरत है। कुल मिलाकर देखा जाए तो बढ़ती आबादी का मतलब है और बड़ा बाजार। बड़ी आबादी यानी हमारे लिए संभावनाओं के द्वार खुलना है। बेशक, इससे अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है।

वहीं दूसरी ओर कई चुनौतियां भी मुंह बाए खड़ी हैं। अगर हमने बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों की अनदेखी की तो हालात बुरी तरह बिगड़ भी सकते हैं। देश में बेरोजगारी बड़ी समस्या रही है। करीब एक तिहाई युवा बेरोजगार हैं। ना उनके पास बेहतर शिक्षा है ना कौशल।

देश की कामगारों के महज पांच प्रतिशत ही आधिकारिक तौर पर स्किल्ड हैं। देश के शिक्षण संस्थानों के पास ना तो बेहतर संसाधन हैं ना ही योग्य शिक्षक। येल विश्वविद्यालय की ओर से जारी इनवायरमेंटल परफॉर्मेंस रिपोर्ट 2022 के अनुसार भारत पर्यावरण के मामले में 180 देशों की सूची में आखिरी पायदान पर है।

प्रदूषण के कारण पेयजल की स्थिति रोज खराब हो रही है। लगभग 40 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के घर तक जल आपूर्ति की सुविधा अब भी उपलब्ध नहीं है। जैसे-जैसे आबादी बढ़ेगी यह समस्या और विकराल होती जाएगी। अगर सरकारी और सामाजिक स्तर पर हमने बढ़ती आबादी की चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए तो भविष्य में उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने इस साल जनवरी महीने में कहा था कि भारत 6.5-7 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने की क्षमता रखता है। देश की अर्थव्यवस्था 2025-26 तक 5 ट्रिलियन डॉलर और 2030 तक 7 ट्रिलियन डॉलर की हो सकती है।

हालांकि बढ़ती आबादी सरकार के इस लक्ष्य को हासिल करने की राह का रोड़ा भी बन सकता है। पहले ही भारत में गरीबी, भूख और कुपोषण जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने की जरूरत है।

बढ़ती आबादी के साथ लोगों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, बेहतर शिक्षा, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और शहरों व गांवों को अधिक सुविधाजनक बनाना सरकार के लिए और भी बड़ी चुनौती होगी।


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