Saturday, October 23, 2021
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यूपीआई प्रक्रिया में उलझे पेटीएम उपभोक्ता

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: केंद्र सरकार भारत को डिजिटल बनाने के लिए तीव्र गति से कार्य कर रही हैं। जिससे ज्यादा से ज्यादा डिजिटल माध्यम से ही कार्य किया जाएं। जिसमें नोटबंदी के दौरान भारत सरकार ने कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सभी उपभोक्ताओं को ई-बैंकिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया था। जिसका असर भी देखने को मिला था, लेकिन वर्तमान समय में ई-बैंकिंग व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए पेरशानी बन रही है।

कैशलेश का उपयोग बन रहा मुसीबत

युवाओं की बात की जाए तो युवाओं में कैशलेस का क्रेज काफी देखा जा रहा है। जिसमें कि युवा डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करते हुए ही हर प्रकार का पेमेंट करते हैं, लेकिन पिछले एक सप्ताह से पेटीएम हो या अन्य प्रकार के आॅनलाइन ऐप के माध्यम से जो उपभोक्ता अकाउंट लिंक करने के पश्चात पैसे ट्रांसफर करते हैं।

उनकों पैसे ट्रांसफर करने में अनेकों दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा हैं। उपभोक्ताओं की माने तो पैसे ट्रांसफर करने के पश्चात यूपीआई के तहत बैंक द्वारा एक मैसेज भेज आता है।

उसी ओटीपी के माध्यम से ही कैश ट्रांसफर किया जाता है। मगर अब वह मैसेज प्राप्त नहीं हो रहा। जिससे ट्रांसफर प्रोसेस फेल हो जाता है। जिस कारण बाजार से सामान खरीदने के पश्चात भी जब पैसे ट्रांसफर न हीं होते तो बिना सामान लिए ही वापस आना पड़ता है।

अकाउंट में बैलेंस चेक करने में भी दिक्कतों का सामना

पेटीएम, गूगल-पे के माध्यम से उपभोक्ता अंकाउंट लिंक होने के बाद भी अपने अकाउंट में पैसे चेक करना चाहते हैं तो उनको पैसे चेक करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि जैसे ही मैसेज प्रोसेस आता है सेकेंड ओ की तरह समय तो शुरू हो जाता है, लेकिन उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर पर ओटीपी नहीं आता। जिससे वह अपने बैलेंस तक को चेक नहीं कर पा रहे हैं।

संबंधित बैंक की ई-बैंकिंग ही उचित समाधान

बैंकिंग सेक्टर से जुड़े जानकारों की माने तो उनका कहना है इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए संंबंधित उपभोक्ताओं को अपने बैंक की ही ई-बैंकिंग का उपयोग करना चाहिए। जिससे उन्हें असुविधा न हो। दरअसल किसी भी स्टोर से सामान खरीदते हैं तो वह पेटीएम एवं अन्य माध्यमों से कैश को संबंधित उपभोक्ता के अकाउंट में ही ट्रांसफर कर देते हैं।

जिससे युवाओं को कैश रखने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। लेकिन यह कार्य उपभोक्ताओं के लिए परेशानी बन चुका है। क्योंकि केवाईसी होने के पश्चात भी उनके अकाउंट से पैसे ट्रांसफर नहीं हो पा रहे हैं। बार-बार प्रक्रिया असफल हो रही हैं।

जिससे उपभोक्ताओं में निराशा है ऐसे में उपभोक्ताओं का कहना है कि इस प्रकार की समस्याओं का तत्काल रूप से निवारण किया जाएं। बता दें कि धोखाधड़ी की बात को देखते हुए ही सरकार विभिन्न बदलाव कर रही है। जिससे उपभोक्ताओं के पैसे सुरिक्षत रहे।

महालॉगिन डे पर आवेदकों ने खुलवाएं आईपीपीबी के खाते

डाक विभाग द्वारा शुक्रवार को सभी डाकघर में महालॉगिन डे का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में आईपीपीबी के खाते खोले गए। ये जानकारी सिटी डाकघर के डिप्टी पोस्ट मास्टर रतन सिंह ने दी। दरअसल, इस खाते को खुलवाने में आवेदकों के लिए आधार कार्ड ही सबकुछ होता हैं।

केन्द्र सरकार द्वारा डिजीटल करण को बढ़ावा देने के लिए आईपीपीबी के तहत खाते खोलने की योजना शुरू की थी जो डिजीटल है। इसके लिए आवेदकों को पासबुक की भी आवश्यकता नहीं हैं। सिर्फ एटीएम की तरह एक कार्ड मिलता है।

जिसके माध्यम से खाता धारक निकासी एवं अन्य कार्य कर सकता है। खास बात ये है कि इस खाते के माध्यम से डाकिए द्वारा घर बैठे भी पैसे उपलब्ध कराए जाते हैं। कोरोना काल में इसी खाते के माध्यम से उपभोक्ताओं को घर बैठे खाते से पैसे उपलब्ध कराएं गए थे।

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