Sunday, January 23, 2022
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बसों का संचालन न होने से लोग परेशान

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  • देहात क्षेत्र में लोगों को उठानी पड़ रही परेशानी, ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से लगा चुके गुहार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ/लावड़: इस आधुनिक युग में आज भी बस न चलने के कारण देहात के लोगों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। हालांकि ग्रामीणों की इस समस्या को देखते हुए कई बार जनप्रतिनिधि बसें चलवा चुके हैं, लेकिन हर बार इन बसों के संचालन में अड़ंगा लग जाता है। क्योंकि जिन मार्गो पर इन बसों का संचालन होता है। उन मार्गों पर टेम्पो का संचालन भी होता है।

बस और टेम्पो संचालकों में गतिरोध पैदा होने के कारण बसों का संचालन बंद हो जाता है। वहीं, सवारियों का टोटा रहने के कारण बसों का घाटे में जाना भी बसों के संचालन को बंद करने में एक बड़ी भूमिका रही है। मिठेपुर गांव के समाजसेवी अजयवीर सिंह ने बताया कि लावड़ से बेगमपुल तक के लिए पूर्व विधायक रविंद्र पुंडीर ने बसों का संचालन शुरू कराया था। कुछ समय तक यह बसें चली, लेकिन कुछ समय बाद बसों को खड़ा करने के लिए जगह नहीं मिलने के कारण इसका संचालन बंद हो गया।

जिसके बाद पूर्व विधायक चौधरी चंद्रवीर सिंह ने इस मार्ग पर बसों को चलाने की शुरुआत की, लेकिन कुछ दिन चलने के बाद फिर से यह संचालन बंद हो गया। अगर प्रशासन द्वारा सहयोग करके बसों के लिए कोई स्थान आवंटित कर दिया जाए तो इस मार्ग पर बसों का संचालन हो सकता है। मिठेपुर गांव के प्रधान पदमेंद्र सिंह का कहना है कि विधायक ठाकु र संगीत सोम ने लावड़-सोफीपुर मार्ग पर बसों का संचालन शुरू कराया था।

कुछ दिन तक इस मार्ग पर बसों का संचालन रहा, लेकिन यात्रियों की कमी के कारण बसें टोटे में चली गई। जिसके चलते बसों का संचालन बंद हो गया। कस्बे के पूर्व सभासद एवं समाजसेवी डा. इकबाल मलिक का कहना है कि मवाना से दौराला और लावड़ से लेकर बेगमपुल तक बसों का संचालन दोबारा से शुरू होना चाहिए। क्योंकि बसों का संचालन शुरू होने से लोगों को काफी राहत मिलेगी और लोगों को परेशानी से भी निजात मिल पाएगी।

10 वर्षों से बंद बसों का संचालन

दौराला से लेकर मवाना तक बसों का संचालन होता था, लेकिन 10 वर्षों से इस मार्ग पर बसों का संचालन बंद कर दिया। जिसके बाद यात्रियों को टेम्पो का सहारा लेना पड़ा। यह मार्ग दर्जनों गांवों का सम्पर्क मार्ग भी है। यहां से लोगों का बड़ी तादाद में शहर आना-जाना रहता है। ऐसे में इन मार्गों पर बसों का संचालन होना बेहद जरूरी है। इसलिए मार्ग पर बसें चलाने के लिए प्रशासन को पहल करनी होगी।

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