Friday, December 9, 2022
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पीएम आवास: 440 में से 117 लाभार्थी निकले अपात्र

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  • वाप्कोस कंपनी की भूमिका पर उठ रहे सवाल, प्रशासनिक स्तर पर नहीं किया ब्लैक लिस्ट

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्रधानमंत्री आवास योजना की सच्चाई अपर नगर आयुक्त की जांच में सामने आ गई है। वर्तमान में 440 पीएम आवास योजना के लाभार्थियों की धरातल पर जांच की गई, जिसमें 323 लोग ही पीएम आवास योजना के लिए पात्र निकले। बाकी 117 अपात्र पाए गए। इस मामले में कंपनी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं तथा कंपनी के इंजीनियरों ने 117 अपात्रों को कैसे पात्रता की श्रेणी में लाकर अनुचित लाभ देने का प्रयास किया।

यह तो करोड़ों का घोटाला करने का दिशा में काम किया जा रहा था। इस मामले में जांच रिपोर्ट के बाद डूडा के पीओ कंपनी के खिलाफ दिख रहे हैं या फिर घोटाला करने के बाद भी क्षमादान दिया जाता रहेगा? यही नहीं, डीएम दीपक मीणा ने भी नगर निगम की जांच रिपोर्ट पर के आधार पर क्या वाप्कोस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? कुछ खास लोगों की मेहरबानी के चलते कंपनी को प्रशासनिक स्तर पर ब्लैक लिस्ट नहीं किया जा रहा है।

दरअसल, कैंट के भाजपा विधायक अमित अग्रवाल ने शासन में एक शिकायत की थी, जिसमें कहा था कि व्यापक स्तर पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपात्र लोगों को पात्र बनाकर अनुचित लाभ दिया जा रहा है। एक अपात्र को दो लाख रुपये से लाभान्वित किया जा रहा हैं। इस तरह से सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया जा रहा था। भाजपा विधायक की इस शिकायत को शासन ने गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच बैठा दी।

जांच रिपोर्ट डीएम से कराने के लिए कहा गया। डीएम ने अपने स्तर से इसकी जांच नगर निगम को सौंपी थी, जिसमें एक कमेटी जांच पड़ताल कर रही थी। नगर निगम की एक टीम प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र लाभार्थियों की जांच करने पहुंची। वर्तमान में नगर निगम ने जो रिपोर्ट डीएम को दी है वह बेहद चौंकाने वाली है। रिपोर्ट में 440 मकानों की जांच नगर निगम ने करना बताया है, जिसमें से 323 मकान ही पात्र मिले हैं।

बाकी 117 लाभार्थी ऐसे मिले हैं, जो अपात्र हैं। उनको पीएम आवास योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता। ऐसे लोगों को लाभार्थी कैसे बना दिया गया, यह बड़ा सवाल हैं। कहा जा रहा है कि यह मकान ऐसे लोगों को लाभ देने के लिए पात्रता की श्रेणी में लाएंगे, जिससे वाप्कोस कंपनी को बड़ा लाभ पहुंचाया जाए। धरातल पर कहीं भी इनका प्लाट नहीं मिला। जब प्लॉट नहीं मिला तो फिर इनके मकान स्वीकृत कैसे कर दिये गए?

इनके मकानों के निर्माण के लिए किश्त जारी होने वाली थी, इससे पहले ही नगर निगम की जांच रिपोर्ट से इनकी कलई खुल गई। अब पूरा सच सामने आ गया है। अब देखना यह है कि प्रशासनिक स्तर पर वाप्कोस कंपनी को कब तक ब्लैक लिस्ट किया जाता है या फिर इसी तरह से कंपनी पर सरकारी सिस्टम मेहरबान बना रहेगा?

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