Monday, July 22, 2024
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मुर्गियों का गर्मी से करें बचाव

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khatibadi 8

 


स्वस्थ एवं निरोग पक्षी ही सफल मुर्गीपालन का आधार है। गर्मियों में अधिकतर मुर्गियां परेशान हो जाती हैं, क्योंकि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जाती है, वैसी ही न सिर्फ अंडा उत्पादन में कमी बल्कि मुर्गियों में मृत्यु दर भी बढ़ जाती है। कारण मुर्गी कम खाना खाती है। आहार कम खाने से अंडा उत्पादन कम होने के साथ-साथ अंडों का आकार भी छोटा हो जाता है एवं अंडों के ऊपर का कवच कमजोर व पतला हो जाता है जिससे मुर्गी पालक को काफी हानि होती है। जब मुर्गीशाला का बाहरी तापमान 39 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक होने लगता है, तब मुर्गियां बहुत परेशान हो जाती हैं। इसमें मुर्गियां चोंच खोलकर हांफती हैं कमजोर हो जाती हैं, लड़खड़ाने लगती हैं एवं लकवा होने से मर जाती हैं। अत: मुर्गियों को तेज गर्मी से बचाने के लिये निम्न उपाय किए जाने चाहिए।

आहार : गर्मी के मौसम में आहार खपत में कमी आ जाती है। अत: आहार में प्रोटीन, विटामिन व मिनरल की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए ताकि कम खाने पर भी आवश्यक पोषक तत्व मुर्गी को प्राप्त हो सके। गर्मी में अंडों का छिलका पतला होने से बचाने के लिए आहार में कैल्शियम की मात्रा बढ़ा दें। इसके लिए दाने में आॅस्टो कैल्शियम लिक्विड पानी में दिया जा सकता है।

पानी : गर्मी में मुर्गियों में पानी की खपत दुगुनी हो जाती है। इसके लिए मुर्गी घर में हर समय स्वच्छ एवं ठंडा जल उपलब्ध रहना आवश्यक है। पानी के बर्तन मिट्टी के होने चाहिए, क्योंकि इसमें पानी ठंडा रहता है।
लीटर (बिछावन) : गर्मी में मुर्गी के बिछावन (लीटर) की मोटाई 2 इंच से अधिक नहीं हो। यदि लीटर पुराना हो गया हो तो उसे हटाकर नया लीटर काम में लें।

रोशनी : मुर्गियां ठंडे समय में दाना खाना पसंद करती हैं। दिन की रोशनी के अलावा बिजली की रोशनी सुबह के ठंडे मौसम में ज्यादा दें।

कुक्कुट शाला की छत की बाहरी परत पर सफेद पेंट कर दें, जिससे सूर्य की किरणें छत से टकराकर वापस लौट जाएं। छत पर एस्बेस्टास की शीट भी लगाई जा सकती है ताकि छत गरम होने से बच सके।

खिड़कियों से उसे 3-5 फीट की दूरी पर टाट के पर्दे लगाकर एवं उनमे पानी का छिड़काव करके मुर्गीघर को ठंडा किया जा सकता है।

यदि फोगर्स की सुविधा उपलब्ध हो तो इसके द्वारा भी कुक्कुट शाला का तापमान कम किया जा सकता है आवश्यकता पड़ने पर पंखे एवं कूलर का भी उपयोग किया जा सकता है ।

हीट-स्ट्रोक लक्षण वाली मुर्गियों के बचाव के लिए मुर्गियों को चिल्ड वाटर मुंह में डालें, मुर्गियों में ठंडा पानी का छिड़काव करें एवं इलेक्ट्राल पाउडर का उपयोग पानी के साथ किया जा सकता है। इण्डियन हर्ब्स का जीट्रेस प्रयुक्त किया जाए तो यह सभी प्रकार के तनावों व हीट-स्ट्रोक का समाधान कर देता है।


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