जनवाणी ब्यूरो |
यूपी: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए चुनाव आयोग को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “मैं चुनाव आयोग और उनके अधिकारियों को साफ कह रहा हूं, आप जो कर रहे हो वो गलत है। ये देश के खिलाफ है। ये मत भूलिए, जब समय आएगा तो हम आपको पकड़ेंगे, आप बचने वाले नहीं हो।
“राहुल ने पोस्ट में लिखा कि वोट की चोरी भारत की जनता के खिलाफ अपराध है और ये सीधे संविधान पर हमला है। इसे अंजाम देने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है, इंसाफ जरूर होगा।
अभिषेक मनु सिंघवी बोले- CEC ने चुनाव आयोग को किया हाइजैक
राहुल गांधी के बयान के कुछ देर बाद कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने पूरे चुनाव आयोग को हाइजैक कर रखा है और अपने साथी आयुक्तों को भ्रम में रखा है। आयोग का कोई भी फैसला अकेले नहीं लिया जा सकता। आज के समय में संवैधानिक संस्थाएं बिल्कुल स्वतंत्र नहीं हैं।
14 बार दर्ज कराई गई आपत्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची और SIR से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। आपत्ति के मुद्दों में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और वोटर लिस्ट डेटाबेस के कंट्रोल से जुड़े फैसले शामिल थे। दोनों आयुक्तों का कहना था कि कई आदेश उनकी जानकारी और सहमति के बिना जारी किए गए। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
फॉर्म-6 में बदलाव पर पूर्व CEC ओपी रावत की आपत्ति
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने फॉर्म-6 में बदलाव को गलत और गैरकानूनी बताया। उन्होंने कहा कि अगर फॉर्म में बदलाव करना है तो पहले नियमों में संशोधन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। बताया जा रहा है कि विवेक जोशी ने मई में फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी घोषणा जोड़ने पर ऐतराज जताया था, बाद में संधू ने भी इसे अनधिकृत बताते हुए तुरंत हटाने को कहा था।
वोटर लिस्ट के सॉफ्टवेयर पर भी सवाल
ओपी रावत ने वोटर लिस्ट के डेटाबेस और सॉफ्टवेयर के सेंट्रलाइजेशन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि फील्ड अधिकारी किसी बदलाव को सही मानें लेकिन सॉफ्टवेयर उसे दर्ज करने की अनुमति ही न दे। एक जगह सारे अधिकार केंद्रित होना ठीक नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मुद्दे को लेकर दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन से भी संपर्क किया था।
चुनाव आयोग ने मतभेद से किया इनकारचुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इसे औपचारिक असहमति मानने से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि SIR समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। वहीं ओपी रावत ने कहा कि अगर दो आयुक्त लगातार आपत्ति दर्ज कर रहे थे तो यह गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है, सवाल यह भी है कि उन्हें गलत लग रहा था तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

