- रैपिड रेल से लोकसभा चुनावों के मद्देनजर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा कम भार
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: देश की प्रथम सेमी हाई स्पीड रैपिडएक्स (नमो भारत) ट्रेन का सफर यात्रियों को खूब भाएगा। कारण रैपिड रेल में सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर फिलहाल उतना भार नहीं पड़ेगा जितना उम्मीद की जा रही थी। दरअसल, रैपिड ट्रेन शुरू होने से पहले इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा था कि इसमें सफर करने वाले यात्रियों को तीन से चार रुपये प्रति किलोमीटर तक चुकाने पड़ेंगे। बताया जाता है कि किराये को लेकर केन्द्र सरकार में काफी माथा पच्ची की गई।
चुनावी सीजन को देखते हुए हर प्रकार से गुणा-भाग कर चुनावी नफा नुकसान का आंकलन किया गया। इसके चलते किराया घोषित करने में देर हुई और प्राथमिक खंड के उद्घाटन से एकदम पूर्व आनन फानन में किराया घोषित किया गया। कई बार तो रैपिड के किराये को लेकर चार से पांच रुपये प्रतिकिलोमीटर तक का आंकलन लगाया गया, लेकिन इन सबसे परे रैपिड का किराया लगभग 2.94 रुपये प्रतिकिलोमीटर तय किया गया। जो किराया फिलहाल तय किया गया है

उसके हिसाब से दिल्ली (सराय काले खां) से लेकर मेरठ (मोदीपुरम) तक कुल 82 किलोमीटर का किराया लगभग 242 रुपये बैठता है। हालांकि भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार रैपिड के किराय में लोकसभा चुनावों के बाद इजाफा हो सकता है और यह तीन रुपये प्रति किलोमीटर से चार रुपये प्रतिकिलोमीटर के बीच जा सकता है। जानकार रैपिड के वर्तमान किराये को लोकसभा चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं। वो कहते हैं कि ‘चुनावी सीजन’ में यह ‘चुनावी किराया’ है और चुनावों के बाद इसमें इजाफा हो सकता है।
सड़कों से कम हो जाएंगे एक लाख वाहन
दिल्ली मेरठ के बीच जब 82 किलोमीटर लम्बे कॉरिडोर पर रैपिड दौड़ना शुरू कर देगी तब एनसीआर की सड़कों से लगभग एक लाख वाहनों का दबाव कम हो जाएगा। इतने वाहन कम होने से जहां प्रदूषण में कमी आएगी। वहीं, एनसीआर की सड़कों पर जाम की समस्या भी कम होगी।
आठ लाख यात्री प्रतिदिन करेंगे सफर
दिल्ली से मेरठ के बीच जब रैपिड अपनी फुल स्ट्रेंथ से दौड़ेगी तब इसमें प्रतिदिन आठ लाख लोग सफ र करेंगे। दिल्ली मेरठ कॉरिडोर पर कुल 30 रैपिडएक्स चलेंगी जो कि छह कोच की होंगी तथा एक कोच में एक साथ 72 यात्री बैठकर सफर कर सकते हैं। एक ट्रेन में एक साथ 1700 यात्री सफर करेंगे।
खूबियों में रैपिड को मेट्रो से खास बनाती हैं यह सुविधाएं
- मेट्रो के एक कम्पार्टमेंट में पैसेंजर्स कैपिसिटी 50 जबकि रैपिड में 72 है।
- मेट्रो की स्पीड 60 किलोमीटर प्रतिघंटा जबकि रैपिड की अधिकतम 180 है।
- मेट्रो में यात्रियों के लिए अटेंडेंट की सुविधा नहीं है जबकि रैपिड में अटेंडेट रहेगा।
- हर रैपिड स्टेशन पर पुलिस पोस्ट रहेगी, जबकि मेट्रो स्टेशनों पर ऐसा नहीं है।
- रैपिड में प्रीमियम कोच है जबकि मेट्रो में कोई भी प्रीमियम कोच नहीं है।
- रैपिड में स्ट्रेचर पर मरीज ले जाने की सुविधा है, जबकि मेट्रो में यह सुविधा नहीं है।
- मेट्रो के दरवाजे स्वयं खुलते हैं जबकि रैपिड के दरवाजे बटन दबाने के बाद ही खुलेंगे।
- रैपिड में प्रत्येक सीट पर लैपटॉप व मोबाइल चार्जिंग प्वॉइंटस हैं जबकि मेट्रो में ऐसा नहीं है।
- मेट्रो में खाने के सामान की सुविधा नहीं है जबकि रैपिड के प्रीमियम कोच में यह सुविधा है।
- मेट्रो के स्टेशन दो तल के हैं, जबकि रैपिड के चार तल तक के हैं।

