Saturday, June 12, 2021
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रेडक्रास देगा छह हजार रुपये में ब्लैक फंगस का इंजेक्शन

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  • रेमडेसिविर के बाद अब यह इंजेक्शन खिलाएगा गुल
  • मेडिकल स्टोरों को दवा उपलब्ध कराने के मूड में नहीं सरकार

ज्ञान प्रकाश |

मेरठ: इंसान की जिंदगी मजाक बन कर रह गई है। एक तो महामारी का जोर ऊपर से स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैय्या करा पाने में प्रशासन पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। भारी नुकसान के बाद प्रकृति ने खुद कोरोना जैसी महामारी का प्रभाव कम कर दिया लेकिन उसकी जगह आए ब्लैक फंगस ने लोगों को हिला कर रख दिया है।

कोरोना से लड़ने के लिये डाक्टरों ने जिस तरह से निजी स्वार्थ के लिये रेमडेसिविर का इंजेक्शन मंगवा कर लोगों को कंगाल बना दिया अब वही नजारा ब्लैक फंगस को लेकर भी होने के संकेत मिल रहे हैं। ब्लैक फंगस के लिये कारगर साबित हो रहा लाइपोसोमल इंजेक्शन सरकार रेडक्रास के जरिये बिकवाएगी। इस बिक्री से होने वाली आय दस फीसदी रेडकास के खाते में जाएगी।

प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने सभी कमिश्नरों से कहा है कि ब्लैक फंगस के मरीजों के परिजनों को अधिकतम तीन दिन की डोज की दवा एक बार में ही उपलब्ध कराई जाएगी। स्थानीय रेडक्रास के द्वारा 6000 रुपये में लाइपोसोमल इंजेक्शन का इंजेक्शन और 1500 रुपये में इमल्शन की वायल मिलेगी। इसमें से दस फीसदी धनराशि रेडक्रास के खाते में डाली जाएगी।

बाकी धनराशि रेडक्रास के द्वारा उत्तर प्रदेश मेडिकल सर्विस सप्लाइज कारपोरेशन लिमिटेड के खाते में जमा करवा दी जाएगी। दरअसल खुद प्रदेश सरकार इस बात को मान रही है कि ब्लैक फंगस से लड़ने वाली इस दवा की पूरी प्रदेश में भारी कमी है। केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त मानीटरिंग ग्रुप द्वारा निर्धारित मानकों के द्वारा दवा देने के निर्देश दिये गए हैं। निजी अस्पतालों में ब्लैक फंगस की दवा उपलब्ध नहीं है और इसके लिये उनको मेडिकल कालेज पर निर्भर रहना होगा।

वही अपर स्वास्थ्य निदेशक डा. राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि खुले बाजार में दवा न मिल पाने की दशा में उपलब्धता के आधार पर जीवन रक्षा के दृष्टिकोण से यह दवा कमिश्नर और एडीजी हेल्थ के आवेदन पर दी जा सकेगी। मरीज के लिये दवा की आवश्यकता का आकलन मेडिकल कालेज के प्राचार्य, कमिश्नर और एडीजी हेल्थ के द्वारा गठित कमेटी करेगी। वहीं म्यूकर मायकोसिस यानि ब्लैक फंगस की दवा एम्फोटेरीसीन बी को निजी क्षेत्र के अस्पतालों के मरीजों को देने के लिये पूरे प्रदेश के आठ मंडल बनाए गए हैं।

मेरठ मंडल और सहारनपुर मंडल की जिम्मेदारी सुरेन्द्र सिंह को दी गई है। दरअसल रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर जिस तरह से मारामारी हुई और 1800 का इंजेक्शन लोगों को 40 हजार तक में खरीदना पड़ा उसको देखते हुए ब्लैक फंगस के इंजेक्शन को लेकर भी यही संभावना जताई जा रही है। दवा व्यापारियों ने दर्जनों बार प्रशासन को पत्र लिखकर दवा की उपलब्धता की मांग भी की लेकिन अभी उस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।

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