- गर्भावस्था की होगी जांच तो स्वस्थ रहेंगे जच्चा-बच्चा
- जच्चा रहेगी स्वस्थ तभी तो बच्चा होगा स्वस्थ
जनवाणी ब्यूरो |
सहारनपुर: बदलते मौसम में गर्भावस्था के प्रति जरा सी लाहपरवाही गर्भ में पल रहे शिशु के साथ ही माँ के लिए भी घातक साबित हो सकती है। ऐसे में गर्भवस्था को अपने स्वास्थ्य का विशेष ख़्याल रखना आवश्यक है। स्वस्थ बच्चे के लिए माँ का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि गर्भवती की सही समय पर सभी जाँच हों।
जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. ममता सोढ़ी ने बताया गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीने बहुत अहम होते हैं। अधिकतर महिलाएं गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीने यानि फर्स्ट ट्राइमेस्टर को बेहद हल्के में लेती हैं, जबकि यह समय सबसे महत्वपूर्ण होता है।
इसी दौरान गर्भ में भ्रण का विकास होना शुरू होता है। माँ का शरीर कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलावों से गुजरता है। ऐसे समय में माँ और बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रसव पूर्व कुछ जांच होना बेहद जरूरी हैं। इन जाँच को एंटी नेटल केयर भी कहते हैं।
यह इसलिए भी जरूरी हैं ताकि समय से पता चल सके कि माँ और बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इन जाँच का मकसद गर्भवास्था के समय होने वाले जोखिम को पहचानना, गर्भावस्था के दौरान रोगों की पहचान करना और उनकी रोकथाम करना है। इन जाँच से हाई रिस्क प्रेगनेन्सी (एचपीआर) केस को चिन्हित किया जाता है। प्रसव पूर्व मुख्यत: खून, रक्तचाप, एचआईवी की जांच की जाती है।
खानपान का रखें विशेष ख़्याल
डॉ. ममता सोढ़ी ने बताया इस मौसम में ऐसी चीजों का सेवन करें जो आसानी से पच सकें। शरीर में पानी की कमी न रहे और प्रतिरक्षा प्रणाली भी मजबूत बनी रहे। अपने आहार में विटामिन सी को शामिल करें, इसके अलावा रात को सोने से पहले केसर-बादाम युक्त दूध लें जिससे शरीर में गर्माहट बनी रहे।
गर्भवास्था में अरुण विकास के लिए प्रोटीन से भरपूर चोकर युक्त आटा, दूध, पनीर, दाल, बथुआ, साग, पालक के साथ हरी सब्जी खाएं और मांसाहार में अंडे, चिकन, फिश आदि का सेवन करें। इसके खाने से गर्भवती के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ रहेगा। उन्होंने बताया गर्भवास्था के दौरान बासी भोजन का सेवन मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। गर्भवास्था में ताजा भोजन का ही सेवन करना चाहिये।

