जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: फरीदी नगर के रघुवर मैरिज लॉन में चल रहे सप्त दिवसीय शिव महिमा ज्ञान यज्ञ सत्संग के अंतिम दिवस पर अनंत विभूषित स्वामी अभयानंद सरस्वती जी महाराज(वरिष्ठ महामंडलेश्वर श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी) ने विस्तार से बताया कि मनुष्य योनि में जन्म लेने पर मनुष्य का अधिकार किन चीजों पर है और किन चीजों पर मनुष्य का अधिकार नहीं है। इस संदर्भ में महाराज ने बताया कि आयु, कर्म, कितने धन का सुख मनुष्य प्राप्त कर सकता है, विद्या अर्जन और मृत्यु का तरीका पहले से ही निश्चित है। इन पांच चीजों को संयुक्त रूप से प्रारब्ध कहते हैं। मनुष्य का केवल तीन चीजों पर अधिकार है। पहला धर्म के कार्य को करना है कि नहीं इस पर मनुष्य का अधिकार है, दूसरा भगवान की भक्ति करनी है कि नहीं इस पर मनुष्य का अधिकार है और तीसरा कि आप को इस मनुष्य के जीवन में मनुष्य के शरीर में संत आश्रय में जाकर जीवन मुक्त होना चाहते हैं कि नहीं इसका निर्णय लेने के लिए भी आप स्वतंत्र हैं।

इस संदर्भ में स्कंदगांव जो ब्राह्मणों का एक गांव था की कथा सुनाई जहां सबको 1 से 13 तक की गिनती का सही-सही ज्ञान था। इस गिनती का वर्णन देवी भागवत में अष्टावक्र जी ने भी किया है। इस गिनती का निरूपण करते हुए महाराज श्री ने बताया कि 1 ब्रह्म है, 2 धर्म और अधर्म है, 3 प्रकार की अग्नि होती है, 4 हमारे चारों वेद हैं, 5 चार दिशाएं और उर्ध्व मिलकर 5 दिशाएं हैं, 6 ब्राह्मण के छह कर्म होते हैं, 7 अग्नि की 7 तरह की लपटें होती हैं जिनका वर्णन मुंडक उपनिषद में है कुछ लोग इसको सप्त ऋषि भी कहते हैं, 8 अष्टमूर्ति होती है जो हमारे पांच महाभूत वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी और आकाश है इसके अतिरिक्त तीन सूर्य चंद्रमा और यजमान से मिलकर अष्टधा या अष्टमूर्ति कहलाते हैं, 9 विद्या होती हैं जिनका वर्णन छांदोग्य में है, 10 इंद्रियां होती हैं (5 ज्ञानेंद्रियां 5 कर्मेंद्रिया ),11 मन होते हैं (पांच ज्ञान के साथ जुड़कर, पांच कर्म के साथ और एक चित्त के साथ जुड़कर 11 मन बनते हैं। ) 12 आदित्य होते हैं आदित्य के 12 नाम है और 13 स्वर होते हैं। साथ ही महाराज ने बताया कि श्रावण मास में जो भी लोग शिव की उपासना करते हैं शिव उनके इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। 4 तरह की मुक्ति का भी वर्णन है जो शिव के उपासक होते हैं उन्हें यह चारों तरह की मुक्ति प्राप्त होती है। शिव की उपासना करने वाले शिव के लोक को प्राप्त करते हैं। इस प्रकार सब को आशीर्वाद देते हुए महाराज ने किया इस कथा का समापन किया। कथा के आयोजक सुबोध कुमार द्विवेदी ने अंत में अपने ह्रदय की भावों को व्यक्त किया और सात दिनों से बहुत ही कुशल मंच संचालन आलोक कुमार दीक्षित ने किया। रघुवर मैरिज लॉन में भव्य रुप से शिव महिमा ज्ञान यज्ञ संपन्न हुआ, ॐ शांति।

