- मालिक पर 10 हजार का जुर्माने का नियम बनाकर भूले बैठे हैं अफसर
- कई इलाकों में कुत्तों का जबरदस्त आतंक, नसबंदी भी नहीं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एक माह में पांच हजार से ज्यादा को कुत्तों ने काटा है। यह तो सरकारी आंकड़ा है। गैर सरकारी आंकड़ों की मानें या जो लोग सरकारी अस्पताल तक नहीं पहुंचे और प्राइवेट में इलाज कराया उसको यदि शामिल कर लिया जाए तो यह आंकड़ा बहुत करीब छह हजार के पार हो जाएगा। जहां तक कुत्ते काटे की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण की बात है तो घोषणाएं तो बहुंत की जाती हैं, लेकिन उन पर अमल कितना कारगर तरीके से किया गया इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक माह में स्वास्थ्य विभाग यानि जिला अस्पताल में कुत्ते काटे के पांच हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं।
सरकारी आंकडेÞ यदि सही हैं तो रोजाना करीब 200 को कुत्ते अपना शिकार बना रहे हैं। ये तो वो हैं जो पीएल शर्मा जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए आए, इनके अलावा ऐसे भी लोग हैं जिन्हें कुत्तों ने काटा और उनका रिकॉर्ड नहीं है। जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (वैक्सीन) लगवाने वालों की हर रोज लंबी लंबी कतारें लग रही हैं। जिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डा. ईश्वरी देवी ने बताया कि हर रोज काफी संख्या में मरीज एआरवी आ रहे हैं। वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि लोगों को परेशानी न हो।
कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रेबीज की बीमारी होने का खतरा रहता है। रेबीज रोग मानसिक संतुलन बिगाड़ता है। यह रोग 19 साल तक मरीज को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। रेबीज रोगी को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। रोगी के मुंह से लार निकलती है। यहां तक की वह भौंकना भी शुरू कर देता है।
रेबीज का उपचार
रेबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवां 28 दिन के बाद लगाया जाता है। शहर में मवेशियों के साथ ही कुत्तों की आबादी भी सड़क पर देखने को मिल जाती है, जो आजकल आक्रामक रूख अपनाते हुए शहरवासियों के लिए संकट बने हुए हैं।
जो कई लोगों पर हमलावर भी हो चुके हैं, लेकिन कुत्तों के काटने पर कई लोग देशी इलाज अपनाकर इससे होने वाले खतरों को अनदेखा करने से भी बाज नहीं आते, लेकिन ऐसी अनदेखी कई बार भारी भी पड़ सकती है। यहां तक कि कुत्तों के काटने से जान का खतरा भी हो सकता है।
जिला अस्पताल में प्रचुर मात्र में है रेबीज के इंजेक्शन
जिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डा. ईश्वरी देवी का कहना है कि प्रतिमाह औसतन पांच हजार केस कुत्ते के काटे के दर्ज कराए जा रहे हैं।

अस्तपाल में रेबीज के इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है। प्रचुर मात्रा में इंजेक्शन हैं।

