जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है। विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली के दबाव के कारण बाजार लगातार चौथे दिन दबाव में रहा। वहीं, कमोडिटी बाजार में सरकार के एक बड़े फैसले के बाद सोना और चांदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
बुधवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली बढ़त देखने को मिली, लेकिन फिर दोनों सूचकांक नकारात्मक दायरे में फिसल गए। बीएसई सेंसेक्स 182.60 अंक गिरकर 74,362.19 पर और एनएसई निफ्टी 41.05 अंक गिरकर 23,352.25 पर कारोबार कर रहे थे। सेंसेक्स में पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाइटन और एक्सिस बैंक सबसे बड़े नुकसान में रहे, जबकि एशियन पेंट्स, अडानी पोर्ट्स, टाटा स्टील और कोटक महिंद्रा बैंक लाभ में रहे।
वैश्विक कारक और मुद्रास्फीति
वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 106.6 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 1,959.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में 3.48 प्रतिशत पर रही, जिसमें सोने-चांदी और कुछ रसोई वस्तुओं की कीमतें प्रमुख कारण रहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में मुद्रास्फीति के आंकड़े अनुमान से अधिक आने के बाद एसएंडपी 500 में गिरावट आई। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितता वैश्विक मुद्रास्फीति पर दबाव डाल सकती हैं। अमेरिका-ईरान गतिरोध वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए जोखिम बना हुआ है।
कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी से सोना-चांदी में तेजी
शेयर बाजार की सुस्ती के विपरीत, कमोडिटी बाजार में मजबूत खरीदारी देखी गई। इसका मुख्य कारण सरकार का सोना और चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाना है। ड्यूटी अब 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है, जिसमें 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस शामिल है।
इसके बाद मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का जुलाई 2026 वायदा भाव 16,743 रुपये (6 प्रतिशत) बढ़कर 2,95,805 रुपये प्रति किलोग्राम और सोने का जून 2026 वायदा 9,206 रुपये (6 प्रतिशत) उछलकर 1,62,648 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।

