Tuesday, May 5, 2026
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Tag: रविवाणी

अंधेरों पर रोशनी डालती एक किताब!

किताबों से दुनिया नहीं बदलती। किताबें आपके भीतर की बर्फ को पिघलाती हैं। किताबें बताती हैं कि दुनिया को कहां-कहां से बदलना चाहिए। किताबें...

तेल की तलब से पनपता आतंकवाद

तेल की अपनी हवस की खातिर इराक में ‘नरसंहार के हथियारों’ की फर्जी अफवाह फैलाकर जिस तरह अमेरिका की अगुआई में एक समूचे राष्ट्र...

पूंजी को परोसी जाती सार्वजनिक सम्पत्ति

सार्वजनिक संपत्ति के निजीकरण की हुलफुलाहट में इन दिनों ठेका-प्रथा जारी है। हवाई-अड्डों, रेलवे-स्टेशनों, सड़कों, कारखानों आदि को फिलहाल ठेके पर निजी कंपनियों को...

कत्ल की रात उर्फ टोबा टेकसिंह!

रमेश बत्तरा का नाम जेहन में आते ही साहित्य का पूरा परिदृश्य रिवाइंड होकर आठवें दशक पर ठहर जाता है। रमेश बत्तरा की मृत्यु...

जीवन के खिलाफ जीवन-पद्धति

तरह-तरह की वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और समाजशास्त्रीय शोध चीख-चीखकर बता रही हैं कि हमारी मौजूदा जीवन पद्धति दरअसल आत्महंता है और इसे बरकरार रखा गया...

वैश्वीकरण का असली चेहरा है इन कहानियों में !

आज, दस साल बाद या बीस साल बाद यदि कोई इस बात का मूल्यांकन करने बैठे कि भारतीय समाज में आर्थिक उदारीकरण, वैश्वीकरण, बहु-राष्ट्रीय...
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कई बार एक कठिन प्रश्न को समझने के लिए...

हम छात्रों को क्या सिखाना भूल जाते हैं?

डॉ. विजय गर्ग दुनिया भर की कक्षाओं में शिक्षा को...

मिश्रा जी लाइक्ड योर स्टेटस

बनारस की उस पुरानी पुश्तैनी हवेली के दालान में...

उजाड़ना था तो बसने क्यों दिया था?

पिछले कुछ वर्षों से यह समस्या और भी व्यापक...

‘भगवा’ राजनीति का विस्तार

2026 के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम भारतीय...