Saturday, May 2, 2026
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विभाग ने ट्यूबवैल तो लगाई, नाली नहीं बनवाई

  • किसानों के खेतों को नहीं मिल पा रहा है पानी
  • अधिकारियों से बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं निकाला कोई हल

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: जनपद के नलकूप विभाग द्वारा गांवों में ट्यूबवैल तो लगवा दिये गये, परन्तु ट्यूबवैल के पानी को किसानों के खेतों को पहुंचाने के पुख्ता इंतेजाम नहीं किये हैं। विभाग द्वारा कच्ची नालियों का निर्माण कराया गया है, जिसके चलते किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता है। पीड़ित किसानों द्वारा समस्या के हल का निस्तारण कराने के लिए अधिकारियों के लगातार चक्कर काटे जा रहे हैं, परन्तु उनकी समस्या का कोई समाधा नहीं हो पाया है।

बता दें कि सरकार द्वारा उन स्थानों पर जहां पर नहरों का पानी नहीं पहुंच पाता है, नलकूप विभाग के माध्यम से किसानों को पानी मुहैया कराया जाता है। नलकूप विभाग द्वारा सरकारी ट्यबवैल लगाकर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। मुजफ्फरनगर के नलकूप विभाग द्वारा इस कार्य में कोताही बरती जा रही है, जिसका नतीजा यह निकल रहा है किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिसके चलते उनकी फसलें बर्बाद हो रही है। पीड़ित किसान लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, ताकि उनकी समस्या का समाधान हो सके। बुढ़ाना ब्लाॅक के ग्राम कुरथल की नलकूप संख्या 33 लगाया गया है, जिससे मौजा महलजना के खेतों को पानी दिया जाता है।

आरोप है कि नलकूप से जाने वाली 525 फिट की नाली कच्ची है, जिसके बिना खेतों में पानी जाना संभव नहीं है। कुरथल निवासी धर्मपाल, अरूणपाल, संतरपाल आदि ग्रामीणों द्वारा इस कच्ची नाली का पक्का निर्माण कराने के लिए लगातार नलकूप विभाग के अधिकारियों से अपील की जा रही है, परन्तु उनके द्वारा इस मामले में कोई रूची नहीं दिखाई गयी है, जिसके चलते उनकी फसलें सूखने लगी हैं। इतना ही नहीं पीड़ितों द्वारा इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक भी की है, परन्तु नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही रहा है।

नलकूप विभाग को मिलता है मोटा बजट

नलकूप विभाग को सरकार द्वारा नलकूपों की रिपेयरिंग से लेकर नाली निर्माण के लिए मोटा बजट दिया जाता है। इस बजट का उपभोग भी विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष किया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब पीड़ितों की समस्याओं का ही निस्तारण नहीं हो पा रहा है, तो क्या बजट का सही इस्तेमाल किया जा रहा है।

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