Friday, July 19, 2024
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नगर निगम में भ्रष्टाचार की हद

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  • आखिर किसकी शह पर चल रहा खेल? सेवा पंजिका में हेराफेरी कर दिया जा रहा लाभ
  • कर्मचारी की मौत के बाद भी क्लर्क द्वारा लिया गया वेतन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरकार की जीरो टालरेंस नीति का किस तरह मजाक बनाया जाता है यह नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार से उजागर होता है। एक क्लर्क की कारगुजारी ने पूरे विभाग पर ही सवाल उठा दिए हैं। कर्मचारियों की सेवा पंजिका से लेकर मृतक कर्मचारी का वेतन तक निकालने समेत अन्य मामलों में क्लर्क की शिकायत प्रशासन से की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

यहां तक की आरोपी क्लर्क को नगर निगम मुख्यालय से हटाने के आदेश अपर जिलाधिकारी द्वारा दिए जा चुके हैं, लेकिन क्लर्क के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर संघ ने कमिश्नर से क्लर्क राजेश के खिलाफ शिकायत की है।

  • ये है क्लर्क की करतूत

केस-1

सफाई कर्मचारी सुदर्शन लाल की सेवा पंजिका में क्लर्क ने छेड़छाड़ करते हुए उसकी जन्मतिथि को ही बदल दिया। पंजिका में दर्ज जन्मतिथि 30 अगस्त 1975 है। जबकि पुराने दस्तावेजों में 29 मार्च 1964 है। क्लर्क राजेश ने हेराफेरी करते हुए कर्मचारी की जन्मतिथि को कम करते हुए उसे 11 साल तक कार्य करने का लाभ दिया। इसी तरह कर्मचारी रंजीत पुत्र भगत की सेवा पंजिका में जन्म तिथि में हेराफेरी करते हुए 10 नवंबर 1955 की जगह आठ अगस्त 1963 कर दिया गया। यानी इस कर्मचारी को भी आठ साल ज्यादा काम करने का लाभ दिया गया।

केस-2

आउटसोर्सिंग कर्मचारी संजय पुत्र हजारी की मौत 17 मार्च 2018 में हुई, लेकिन क्लर्क राजेश ने उसकी फर्जी वेतन स्लिप बनाकर अप्रैल, मई व जून 2018 का वेतन भी प्राप्त कर लिया। आउटसोर्सिंग कर्मचारी को 12 हजार 500 रुपये प्रतिमाह वेतन के रूप में मिलता था। जिसे क्लर्क ने फर्जी तरीके से खुद प्राप्त किया।

केस-3

विभाग की ही एक महिला कर्मचारी का योन उत्पीड़न करने का आरोप क्लर्क राजेश पर लगा। इसका मुकदमा छह मार्च 2021 को देहलीगेट थाने पर दर्ज भी हुआ। छह अप्रैल 2021 को कोर्ट ने इस मामले में आरोपी क्लर्क राजेश की जमानत खारिज कर दी। बावजूद इसके पुलिस ने आज तक इस क्लर्क को हिरासत में नहीं लिया। पीड़ित महिला कर्मचारी आज भी इंसाफ की आस में लगातार मदद मांग रही है।

केस-4

क्लर्क ने 17 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को अपनी मर्जी से नौकरी पर रखा, जबकि 14 सालों से नौकरी करने वाले कर्मचारियों को बिना किसी वजह के हटा दिया गया। मिली जानकारी के अनुसार रखे गए कर्मचारियों से नौकरी के बदले एक लाख 50 हजार रुपये प्रति व्यक्ति के रूप में वसूली भी की गई। इस मामले में 20 जून 2019 को तत्कालीन नगर आयुक्त ने कर्मचारियों की भर्ती को निरस्त किया था। आज भी जिन कर्मचारियों से नौकरी के बदले पैसे वसूले गए उन्हें वह पैसे वापस नहीं किए गए।

02

24 जून 2022 को अपर जिलाधिकारी दिवाकर सिंह ने क्लर्क के खिलाफ आदेश जारी किया, जिसमें क्लर्क को दोषी मानते हुए उसे मुख्यालय से हटाकर दूसरे जोन में भेजने की बात कही, लेकिन इस आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर संघ के अध्यक्ष शिवकुमार नाज का दावा है कि क्लर्क राजेश की नियुक्ति भी फर्जी दस्तावेजों पर हुई है।

क्लर्क 2008 में अधिसंख्यक पद पर नियुक्त हुआ था, जबकि वह एक साल पहले ही 2007 में हत्या के प्रयास के मामले में जेल जा चुका था। क्लर्क ने यह सत्यता विभाग में नौकरी हासिल करते समय छिपाई। क्लर्क के हाईस्कूल व इंटर के प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठाया गया है। शिवकुमार नाज ने क्लर्क की मूल पत्रावली की जांच करानें की भी मांग की है, क्लर्क को टाइपिंग भी नहीं आती जबकि जिस पद पर उसकी नियुक्ति हुई है। उसमें टाइपिंग अनिवार्य है।

मामला उनके संज्ञान में है, क्लर्क की फाइल मंगाई गई है। जिसकी जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर नगर निगम का यह क्लर्क इस तरह विभाग में भ्रष्टाचार को अंजाम देता आ रहा है और उसके खिलाफ कभी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
-प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त

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