अशोक गौतम
पिछले हफ्ते सबसे छोटे बेटे की शादी ईएमआई पर निपटाते ही इधर मेरे मन में गंगा स्नान की भावना कुलांचें मारने लगी तो उधर मेरी बीवी के मन में हनीमून पर जाने की। सबसे छोटे बेटे की शादी करके लगा ज्यों गंगू तेली ने गृहस्थी का रण नहीं, महा-रण जीत लिया हो। उस वक्त बच्चों की शादियां निपटा मैं गंगू तेली अपने को सिकंदर से महान फील कर रहा था। हर गृहस्थी अपने घर में बच्चा पैदा होने पर उतना प्रसन्न नहीं होता जितना प्रसन्न वह उसका विवाह हो जाने पर होता है। बच्चों की शादियों से निपटीं तो एक दोपहर अचानक बीवी ने मेरे दिमाग पर भिनभिनाते कहा, ‘सुनो जी!’
‘अब क्या है? मैंने मिमियाते पूछा तो वह गधभार्ती बोली,‘हे पतित देव! इस गृहस्थी में कदम कदम पर जहन्नुम तक गए, पर आज तक हनीमून पर नहीं गए। हनीमून में हुए बलिदानी कहते हैं कि शादी के बाद हनीमून पर गए बिना स्वर्ग नहीं जाया जाता। बीतिकाल के प्रसद्धि कवि बीमारी लाल भी कह गए हैं कि-हनीमून स्वर्ग का मारग है, जहां सयानप चालाकी सब सही। तहां झूठे चलै संग एक्स फ्रेंड के, जग जो कहै अब सो कही।
‘मतलब?’
‘मतलब ये कि स्वर्ग का रास्ता हनीमून से होकर जाता है। गृहस्थी में रहते बहुत नरक भोग लिया, अब ….’ अपनी पीठ पर उसका सिर ढोते उसके मुखारविंद से ज्यों ही जहर से भी जहर वचन सुने तो मैं तो मैं, मेरी रूह तक कांप उठी। लगा, ज्यों उसमें उस वक्त सोनम की आत्मा प्रवेश कर गई हो। पर मैं राजा नहीं हूं भाई साहब! माना, मैंने कदम कदम पर उसकी हर इच्छा का खून किया है, ऐसे में अब कहीं इसने किसीको मेरे नाम का सुपारी दे मेरा फाइनल खून करवाने की तो नहीं सोची होगी? पर फिर सोचा, अपनी मैरिज लव मैरिज तो है नहीं। वैसे अंदर की बात कहूं सज्जनो! आजकल भाई लोगों से उतना डर नहीं लगता जितना डर नए नए तो छोड़िए, पचास साल पुराने मुझ जैसे पति पत्नियों को भी एक दूसरे से लग रहा है। आह! क्या हनीमून जमाना आ गयाा भाई साहब! नहीं कहीं हनी, न कहीं मून। बस जिधर देखो, उधर खून ही खून!
मतलब, मेरा इधर का काम खत्म तो अब उधर का काम भी खत्म? आह रे गृहस्थी तेरी यही कहानी! जिम्मेदारियां खत्म तो आत्मा हनीमूनयानी! लगता है, गृहस्थ की चक्की में पिसते मर्द की जरूरत परिवार को तभी तक रहती है जब तक उसके कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ रहता है। जैसे ही जिम्मेदारियां खत्म, वह काम का न काज का दुश्मन आनाज का।’
आखिर मैंने अपने को गुप्त हौसला देते उसे समझाते कहा,‘देखो बेगम! जो अरेंज्ड मैरिज करते हैं वे हनीमून पर नहीं जाया करते। वे हर शाम अपने से भी अपना मुंह छिपाते गली सड़ी सब्जियां लाने सब्जमंडी जाया करते हैं। हनीमून जाने की तो छोड़ो, हम तो अब श्मशानघाट जाने लायक भी नहीं। अरेंज्ड मैरिज वालों के लिए हनीमून पर जाना पाप नहीं, महापाप होता है। अरेंज्ड मैरिज वाले जो हनीमून पर जाते हैं तो वे मरने से पहले ही नरक को जाते हैं।
हनीमून पर लव मैरिज करने वाले जाया करते हैं। हनीमून पर जाना लव मैरिज वालों को ही शोभा देता है। हनीमून पर लव मैरिज करने वालों का ही एकाधिकार है। अरेंज्ड मैरिज करने वालों को ऐसी छिछोरी हरकत सर्वथा त्याज्य है,’ हे मेरे समय के घोड़ी की लात खाने वाले अरेंज्ड विवाहितो! पता नहीं मैं कितना उन दिनों का बचाखुचा अरेंज्ड मैरिड खुशनसीब हूं जिन दिनों की शादियों में न फोटोग्राफर कदम कदम पर वर वधू को फेरे लगाने से रोका करता था और न ही शादी के तुरंत बाद हनीमून पर जाने के बाद मरवाए जाने की स्वस्थ परंपरा थी। उन दिनों शादी के तुरंत बाद हर शादीशुदा अपनी बीवी को दिल में लिए चार पैसे कमाने चुपचाप शहर चला जाया करता था और बीवी घर में बारहमासे गा कर पति की कमी को पूरा किया करती थी। वैसे अब काबिले गौर है यह कि मेरी जायज हरकत पर हर पल सोशल मीडिया के टच में रहने वाली मेरी परमादणीय बीवी अब मुझे हनीमून पर जाने के लिए उकसाने हेतु अगला क्या तीर चलाती है? वैसे किसी भी वर्ग का परिवार की जिम्मेदारियां दुनिया भर के झूठ बोल, इधर उधर ठगी करने के बाद शायद ही कोई बाप होगा जो स्वर्ग जाना नहीं चाहता होगा!

