Monday, May 4, 2026
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सामूहिक जिम्मेदारी है नशे की रोकथाम

सुनील महला

नशा, नाश का प्रमुख कारण है। नशे की लत परिवार के परिवार के परिवार को तहस-नहस कर देती है। नशे के कारण धन की तो बबार्दी होती ही है, मनुष्य के स्वास्थ्य को भी व्यापक नुकसान पहुंचता है। संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) की विश्व औषधि रिपोर्ट 2022 के अनुसार दुनिया भर में लगभग 284 मिलियन लोग नशीली दवाओं का उपयोग करते हैं, यह बहुत ही चिंताजनक है। वास्तव में, देखा जाए तो नशा एक बेहद ही जटिल और बहुआयामी मुद्दा है, जो देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य और हमारे सामाजिक ताने बाने को लगातार क्षति पहुंचा रहा है। आज तनाव अवसाद और भागम-भाग भरी जिंदगी में युवा पीढ़ी नशे का सहारा लेकर यह समझती है कि वह नशे का सहारा लेकर अपने तनाव और अवसाद को खत्म कर सकते हैं, लेकिन यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है, क्यों कि नशे की लत लगातार बढ़ने से व्यक्ति विशेष के निजी जीवन में अवसाद, तनाव, पारिवारिक कलह, पेशेवर अकुशलता जन्म लेती हैं। व्यक्ति को फाइनेंशियल समस्याओं का सामना करना पड़ता है, स्वास्थ्य समस्याओं का तो सामना करना ही पड़ता है। नशे के शिकार व्यक्ति को समाज भी हेय दृष्टि से देखने लगता है और नशे के शिकार व्यक्ति के सामने सामाजिक सह-अस्तित्व की आपसी समझ की भी समस्याएं सामने आने लगतीं हैं।

कोई भी नशा व्यक्ति की मानसिक क्षमताओं, मनोदशा और समन्वय जैसे तत्वों को कहीं न कहीं अवश्य प्रभावित करता है और यह बहुत ही दुखद है कि आज विशेषकर हमारे युवा नशे की लत के ज्यादा शिकार हैं। चूँकि युवावस्था में कैरियर को लेकर एक किस्म का दबाव और तनाव रहता है। ऐसे में युवा इन समस्याओं से निपटने के लिए नशीली दवाओं का सहारा लेता है और अंतत: वह अनेक समस्याओं के कुचक्र में फंस जाता है। आज वर्ष 2025 की ही यदि हम यहां बात करें तो भारत की अर्थव्यवस्था 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, और यह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। तकनीक और विकास में हमारा देश लगातार प्रगति पथ पर अग्रसर हो रहा है, लेकिन नशे के कारण हमारा देश लगातार पीछे भी जा रहा है, क्यों कि युवा किसी भी देश का असली भविष्य और रीढ़ होते हैं और यदि इसी रीढ़ पर नशे का प्रहार हो रहा है,तो यह हमारी रीढ़ को कमजोर करने की बड़ी साजिÞश है। यह बहुत ही दुखद है कि आज गांव-गांव, ढाणी-ढाणी से लेकर शहर तक, स्कूल-कॉलेजों से लेकर, कोचिंग सेंटरों के आसपास हर कहीं पर नशे के सौदागर अपना जाल फैलाए बैठे हैं।

नशे का यह खेल मिलीभगत से चलता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब नशे का यह जाल बीड़ी-सिगरेट, भांग, तंबाकू, शराब या गांजे तक ही सीमित नहीं रहा है। सिंथेटिक नशा(सिंथेटिक कैनाबिनोइड्स और सिंथेटिक कैथिनोन्स), विभिन्न प्रकार के केमिकल नशे, कैनबिस का नशा, हेरोइन(चिट्टा), ब्राउन शुगर, कोकीन जैसे घातक पदार्थ अब भारत के युवाओं के जीवन को लगातार खोखला कर रहे हैं।कितनी बड़ी बात है कि भारत (हमारा देश) वर्तमान में विश्व स्तर पर तम्बाकू उत्पादों का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक है, जहाँ अनुमानित 267 मिलियन तम्बाकू उपयोगकर्ता हैं। भारत में तम्बाकू के व्यापक उपयोग के लिए विभिन्न कारकों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिसमें सांस्कृतिक प्रथाएँ, हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता की कमी और तम्बाकू उद्योग की आक्रामक विपणन रणनीतियां शामिल हैं। आज आए दिन मीडिया की सुर्खियों में हमें यह पढ़ने सुनने को मिलता रहता है कि आज पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, मणिपुर, गोवा जैसे राज्यों में तो नशे का जहर हमारे पूरे सामाजिक ताने-बाने को तहस-नहस कर चुका है। यह बहुत ही दुखद है कि आज हमारे देश के लाखों नौजवान नशे की गिरफ्त में अपनी ऊर्जा, जीवन और भविष्य गंवा रहे हैं। यदि हम यहां पर आंकड़ों की बात करें तो नेशनल ड्रग डिपेंडेंट ट्रीटमेंट (एनडीडीटी), एम्स की वर्ष 2019 की रिपोर्ट बताती है कि अकेले भारत में ही लगभग 16 करोड़ लोग शराब का नशा करते हैं। इसमें बड़ी संख्या महिलाओं की भी है। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1.5 करोड़ महिलाएं देश में शराब,अफीम और कैनबिस का सेवन करती हैं।

संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) की विश्व औषधि रिपोर्ट 2022 के अनुसार दुनिया भर में लगभग 284 मिलियन लोग नशीली दवाओं का उपयोग करते हैं। इसके अनुसार, भारत ने 2019 में विश्व भर में 7 प्रतिशत अफीम तथा 2 प्रतिशत हेरोइन को जब्त किया है। इतना ही नहीं भारत की 10 फीसदी से अधिक आबादी अवसाद, न्यूरोसिस और मनोविकृति सहित मानसिक विकारों से पीड़ित है। इसके साथ ही प्रत्येक 1000 में से 15 व्यक्ति नशीली दवाओं का सेवन करते हैं और प्रत्येक 1000 में से 25 लोग क्रोनिक अर्थात स्थायी शराब सेवन के शिकार हैं। भारत में मनोरोग और नशा मुक्ति बिस्तर की उपलब्धता आवश्यक संख्या का केवल 20 प्रतिशत है। इस प्रकार, देश भर में 80 प्रतिशत मनोरोगी और नशा की समस्या से पीड़ित रोगियों को अस्पताल की सुविधा भी मयस्सर नहीं होती।

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार नशे की लत के कारण वर्ष 2021 में 10 हजार से अधिक लोगों ने अपने जीवन की लीला को समाप्त कर लिया, यह बहुत ही दुखद है। किसी भी देश को आगे बढ़ने के लिए स्वस्थ नागरिकों की आवश्यकता होती है। वास्तव में देखा जाए तो एक स्वस्थ राष्ट्र का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि स्वस्थ नागरिक एक मजबूत और प्रगतिशील राष्ट्र की नींव होते हैं। स्वस्थ लोग अधिक उत्पादक होते हैं, बेहतर सामाजिक संबंध बनाते हैं और समुदाय में सक्रिय रूप से योगदान करते हैं। स्वस्थ राष्ट्र आर्थिक रूप से भी मजबूत होते हैं, क्योंकि स्वस्थ लोग काम करने, कमाने और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान करने में सक्षम होते हैं, लेकिन जिस देश के युवा ही अस्वस्थ और नशे में हों, उस राष्ट्र की कल्पना कैसे साकार हो सकती है ? याद रखिए कि युवा ही किसी देश की असली रीढ़ होते हैं। इसलिए इस रीढ़ की रक्षा की जानी बहुत ही महत्वपूर्ण, जरूरी और आवश्यक है।

नशे पर रोकथाम बहुत ही जरूरी है और यह तभी संभव हो सकता है जब हमारी सरकारें, हमारे एनजीओ, हमारे विभिन्न सामाजिक संगठन और हम स्वयं नशे के खिलाफ एकजुट होकर आगे आए। वास्तव में नशे पर रोकथाम के लिए मजबूत नीति, ईमानदार क्रियान्वयन और राजनीतिक इच्छाशक्ति बहुत ही जरूरी है। जागरूकता बढ़ाना, शिक्षा, उपचार और पुनर्वास, और सामाजिक सहयोग भी नशे पर रोकथाम के लिए जरूरी तत्व हैं। आज जरूरत इस बात की है कि हम नशीली दवाओं के उपयोग के नकारात्मक प्रभावों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाएं तथा सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्मों का उपयोग करके नशे के खिलाफ संदेश फैलाएं। नशीली दवाओं के उपयोग को रोकने के लिए कानूनों को भी हमें लागू करना होगा। वास्तव में, नशीली दवाओं की तस्करी और बिक्री पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाना होगा।

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