Sunday, July 21, 2024
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​’पुत्रमोह में शिवसेना’ की कहानी, रीयल स्टोरी

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कांग्रेस के राहुल तो शिवसेना के आदित्य ठाकरे ने डुबोई पार्टी की साख

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: शिवसेना की कमान कहने के लिए तो उद्धव ठाकरे के पास है मगर यह अर्धसत्य है। उद्धव के माधव ही शिवसेना को संजय राउत और शरद पवार के सानिध्य में आगे ले जा रहे थे। यह सर्वविदित है कि शरद पवार से जो सटा वो गया। शरद पवार भी खूब अच्छे से जानते हैं कि अगर शिवसेना अस्तित्व विहीन हो जाए तो मराठी वोट बैंक पर शरद पवार का ही कब्जा रहेगा।

शरद पवार को अब अपनी बेटी को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाना है वह जब तक शिवसेना है तब तक संभव नही लगता। इसके लिए उन्हें संजय राउत जैसे बेहत खब्बू नेता और आदित्य ठाकरे जैसा कच्चा नेता चाहिए जिसे वो ईशारों पर नचा सके। हुआ यूं कि आदित्य ठाकरे की तानाशाही और सभी मंत्रियों के विभागों में हस्ताक्षेप से मामला बिगड़ता चला गया।

40 शिवसेना के विधायक आदित्य ठाकरे की तानाशाही रवैए से आजिज आ गए। आखिर उनका भी तो अपना अस्तित्व है। अब मान सम्मान की लड़ाई पर बात आ गई।

अंतत: जब आदमी बहुत परेशान हो जाता है और लड़ाई आन बान शान की आ जाती है तो दुश्मन से हाथ मिलाने में कोई गुरेज नहीं है। 40 शिवसेना के विधायकों को भाजपा का साथ मिला और सबने मिलकर बिगुल शरद पवार, उद्धव और आदित्य ठाकरे के खिलाफ फूंक ही दिया।

महाराष्ट्र के सीएम व शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अकेले पड़ते जा रहे हैं। विधायक हों या मंत्री, सभी बागी एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम रहे हैं। अब उद्धव के खेमे में शिवसेना के 3 मंत्री आदित्य ठाकरे, अनिल परब और सुभाष देसाई ही बचे हैं।

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देसाई और परब विधान परिषद के सदस्य हैं, जबकि एक अन्य कैबिनेट मंत्री शंकरराव गडख क्रांतिकारी शेतकारी पक्ष पार्टी से हैं। बाकी 8 मंत्री एकनाथ शिंदे के खेमें में चले गए हैं।

ये मंत्री हैं- दादा भुसे, गुलाबराव पाटिल, संदीपन भुमरे, उदय सामंत, राज्य मंत्री शंभूराज देसाई, अब्दुल सत्तार, राजेंद्र पाटिल येद्रावकर, बच्चू कडू (प्रहार जनशक्ति)। उधर, 15 बागी विधायकों ने सदस्यस्ता रद्द करने को लेकर दिए डिप्टी स्पीकर के नोटिस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस के आवास पर रविवार को भाजपा नेताओं की बैठक हुई। इसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक खत्म होने के बाद भाजपा नेता राम कदम और प्रवीण दारेकर देर रात फडणवीस के आवास से रवाना होते दिखाई दिए।

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राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को लेटर लिखा। इसमें जरूरत पड़ने पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में CRPF को रेडी रखने को कहा।

रविवार को गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल में एकनाथ शिंदे और अन्य बागी विधायक के साथ महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत।

रविवार को गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल में एकनाथ शिंदे और अन्य बागी विधायक के साथ महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत।

शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपे लेख में बागी विधायकों को नचनिया और बैल बताया गया है। इसमें लिखा गया है कि गुवाहाटी प्रकरण में भाजपा की धोती खुल ही गई। शिवसेना विधायकों की बगावत उनका अंदरुनी मामला है, ऐसा ये लोग दिनदहाड़े कह रहे थे।

आगे लिखा- लेकिन कहा जा रहा है कि वडोदरा में श्रीमंत देवेंद्र फडणवीस और अति श्रीमंत एकदास शिंदे की अंधेरे में गुप्त मीटिंग हुई। उस मुलाकात में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल थे। मीटिंग के बाद तुरंत ही 15 बागी विधायकों को केंद्र सरकार ने ‘Y’ कैटेगरी की विशेष सुरक्षा प्रदान करने का आदेश जारी किया गया।

ये 15 विधायक मतलब मानो लोकतंत्र, आजादी के रखवाले हैं। इसलिए उनके बालों को भी नुकसान नहीं पहुंचने देंगे, ऐसा केंद्र को लगता है क्या? असल में ये लोग 50-50 करोड़ रुपयों में बेचे गए बैल यानी ‘बिग बुल’ हैं। यह लोकतंत्र को लगा कलंक ही है। केंद्र और महाराष्ट्र की भाजपा ने ही इन नचनियों को उकसाया है।

चार बड़े बयान…                                                                         

आदित्य ठाकरे ने दावा किया कि एकनाथ शिंदे को 20 मई को ही मुख्यमंत्री बनने का ऑफर उद्धव ठाकरे की ओर से दिया गया था, लेकिन फिर भी उन्होंने बगावत की। उन्होंने शाहरुख की फिल्म दिलवाले का डायलॉग बोला- हम शरीफ क्या हुए, सारी दुनिया बदमाश हो गई… बाला साहेब होते तो जवाब देते।

शिंदे ने रविवार रात ट्वीट कर कहा कि बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना उन लोगों का समर्थन कैसे कर सकती है जिनका मुंबई बम विस्फोट के दोषियों, दाऊद इब्राहिम और मुंबई के निर्दोष लोगों की जान लेने के लिए जिम्मेदार लोगों से सीधा संबंध था। इसलिए हमने ऐसा कदम उठाया है।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि गुवाहाटी में बैठे 40 बागी विधायक जिंदा लाश की तरह हैं। वे वहां छटपटा रहे हैं। ये 40 लोग जब मुंबई आएंगे तब वे मन से जिंदा नहीं होंगे, उनकी आत्मा वहीं रह जाएगी।

संजय राउत यह भी कहा कि महाराष्ट्र को तीन टुकड़े करने की साजिश रची जा रही है। शिवसेना को भी तोड़ने की कोशिश है, मगर कामयाबी नहीं मिलेगी।

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