Monday, July 22, 2024
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केंद्र की रिवैंप स्कीम से ऊर्जा निगम में होंगे बड़े बदलाव

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  • पहले चरण के लिए 3403 करोड़ के डीपीआर को मिल चुकी है मंजूरी
  • पश्चिमांचल के 14 जिलों में पांच हजार करोड़ की कीमत के लगाए जाएंगे 70 लाख स्मार्ट मीटर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आने वाले समय में मेरठ समेत पश्चिमांचल के सभी 14 जिलों में ऊर्जा निगम केन्द्र की रिवैंप स्कीम के माध्यम से कई बड़े बदलाव करने जा रहा है। जिनका मुख्य उद्देश्य लाइन लॉस यानि किसी भी रूप में होने वाली बिजली चोरी को रोककर उपभोक्ताओं को निर्बाध रूप से आपूर्ति देना है। इसके प्रथम चरण में एक ओर पांच हजार करोड़ रुपये की कीमत के 70 लाख स्मार्ट मीटर हर उपभोक्ता के कनेक्शन से लगाए जाएंगे।

जिनको रिचार्ज कराने के बाद ही बिजली आपूर्ति शुरू हो सकेगी। इसके अलावा नंगे तारों के स्थान पर एबीसी कंडक्टर और कटिया डालने या किसी अन्य तरीके से बिजली चोरी किए जाने की संभावना को नगण्य करने के लिए आरमर्ड केबल का जाल बिछाने के काम को प्राथमिकता दी जाएगी।

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केन्द्र सरकार पिछले कुछ अरसे से रिवैंप स्कीम के अंतर्गत अलग-अलग राज्यों में बिजली आपूर्ति की स्थिति में सुधार के प्रयास करने में लगी है। इसी क्रम में पश्चिमांचल के तहत आने वाले मेरठ समेत 14 जिलों के लिए पहले चरण में लाइन लॉस रोकने की दिशा में कदम उठाया गया है।

जिसके अंतर्गत हर उपभोक्ता के कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर लगाया जाएगा। पश्चिमांचल के 14 जिलों में इस समय 70 लाख उपभोक्ताओं के लिए पांच हजार करोड़ रुपये की कीमत के स्मार्ट मीटर खरीदने के लिए टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पीवीवीएनएल के अधीक्षण अभियंता तकनीक जेके गुप्ता का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने की योजना का ट्रायल मेरठ के लिसाड़ी गेट क्षेत्र और सहारनपुर के दो लाख उपभोक्ताओं के यहां पूर्व में किया जा चुका है।

हालांकि इनमें कुछ शिकायत आने के कारण बाद में काम रोकना पड़ा। अब नए मीटरों में किसी प्रकार की शिकायत न रहे, इसका ट्रायल करके नए सिरे से स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू किया जाएगा। स्मार्ट मीटरों के जरिये यह सुविधा भी शुरू की जाएगी कि उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार प्रीपेड रिचार्ज करा सकेंगे।

जेके गुप्ता बताते हैं कि पश्चिमांचल में अभी लाइन लॉस 19.75 प्रतिशत है। रिवैंप स्कीम के पहले चरण में इस बात पर बल दिया गया है कि लाइन लॉस किसी भी दशा में 15 प्रतिशत तक सीमित कर दिया जाए। इस दिशा में स्मार्ट मीटर लगाने के साथ-साथ पश्चिमांचल में जहां नंगे तार हैं, वहां एबीसी कंडक्टर लगाए जाएंगे। और बिजली चोरी के संभावित क्षेत्रों में आरमर्ड केबल का जाल बिछाया जाएगा।

उनका कहना है कि एबीसी कंडक्टर और साधारण केबल पर पीवीसी लगा होता है। जिसे काटकर बिजली चोरी करने वाले अपना काम कर लेते हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए ही आरमर्ड केबल को लाया गया है। इसका ऊपरी भाग मजबूत विधि से एल्यूमीनियम से कवर किया गया है। जिसे काटकर बिजली चोरी कर पाना संभव नहीं हो सकेगा। इसके अलावा अधिक बिजली चोरी के लिए चिन्हित किए गए

क्षेत्र में उपभोक्ताओं के घरों तक जाने वाले सर्विस केबल को भी आरमर्ड केबल से बदलने का अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है, जिसकी शुरुआत ऐसे क्षेत्रों से की जा सकती है, जहां लाइन लॉस की शिकायत सबसे ज्यादा मिलती है। इस योजना के अंतर्गत केन्द्र से 3403 करोड़ रुपये की डीपीआर स्वीकृत हो चुकी है। पहले चरण को पूरी तरह लागू करने के लिए दिसंबर 2025 तक का लक्ष्य रखा गया है।

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हालांकि इसमें स्मार्ट मीटर लगाने और आरमर्ड केबल की शुरुआत करने का काम अगले वित्तीय वर्ष तक कई क्षेत्रों में लागू किए जाने की संभावना है। अधीक्षण अभियंता तकनीक जेके गुप्ता का कहना है कि रिवैंप स्कीम के दूसरे चरण के लिए 4345 करोड़ रुपये की प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी तैयार करके भेजी जा चुकी है। जिसमें पश्चिमांचल में 170 नए बिजलीघर बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।

इसी के साथ नए फीडर बनाने, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने जैसे कार्य भी किए जाएंगे। उनका कहना है कि दूसरे चरण की परियोजना की स्वीकृति इस बात पर निर्भर करेगी, कि पहले चरण में लाइन लॉस के लिए दिया गया 15 प्रतिशत तक का लक्ष्य प्राप्त किया जाए। इन योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद आने वाले समय में उपभोक्ताओं को निर्बाध और सुरक्षित बिजली मिलेगी।

भारत सरकार की रिवैंप योजना से ऊर्जा निगम के कार्य और बिजली आपूर्ति की स्थिति में पारदर्शिता नजर जाएगी। योजना के तहत व्यवस्था में बदलाव के चलते उपभोक्ताओं को 24 घंटे आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी। वहीं फाल्ट होने पर सिर्फ एक ही लाइन प्रभावित होगी।

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