- जगह-जगह से मिट्टी का बड़े स्तर पर हुआ रिसाव
जनवाणी संवाददाता |
परतापुर: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे स्थित परतापुर क्षेत्र में बनाए गए कुछ अंडरपास खतरा बनने लगे हैं। कभी भी बडेÞ हादसे को रोका नहीं जा सकता है, क्योंकि अंडरपास की सपोर्टेड आरीवॉल दरकने लगी हैं। जगह-जगह से मिट्टी का बड़े स्तर पर रिसाव होने से बडेÞ-बड़े होल बन गए हैं। इससे कभी भी बारिश होने पर सड़कें बैठ सकती हैं।
परतापुर क्षेत्र में ही देखें तो दिल्ली-मेरठ रेलवे लाइन के ऊपर बनाए गए ब्रिज के ऊपर दीवार खिसक चुकी है। साथ सपोर्टेड बेस में बड़ी दरार खतरा दर्शा रही है। कई जगह जीआर इंफ्रा ने आरीवॉल को रोकने के लिए सरिए डाले हुए हैं, लेकिन वह कारगर साबित नहीं हो रहे। एक्सपर्ट की माने तो फोर्ड शोरूम से काशी टोल प्लाजा तक जीआर इंफ्रा द्वारा मार्ग निर्माण के दौरान मिट्टी को पूरी तरहा दबाया नहीं गया।

जिस कारण मिट्टी का रिसाव हो रहा है। यहीं इमरजेंसी और बहादरपुर अंडरपास का है। टोल प्लाजा से फोर्ड शोरूम तक देखा जाए तो कई जगह आरीवॉल खिसकी हुई हैं। पूर्व में कई जगह सड़कें बैठ गई थी। दरारें भी आई थी। जिनको जीआर इंफ्रा ने रिपेयर करा दिया था। इसके अलावा एक्सप्रेस-वे के नीचे जंगली जानवरों से बचाव के लिए साइडों में फोल्डिंग दीवारें बनाई गई थी।
वह भी जगह-जगह से खत्म हो गई। जिससे जंगली जानवरों का एक्सप्रेस-वे पर आवागमन शुरू हो गया। तीन दिन पहले नील गायों के झुंड के कारण एक बोलेरो गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई थी। एक्सप्रेस वे के साइडों में खेती किसानों का कहना है कि मिट्टी का रिसाव उनके लिए हानिकारक है। टोल प्लाजा के पास बने शौचालय की गंदगी भी उनके खेतों में पहुंच रही है। किसानों का कहना है कि अगर किसान को नुकसान होगा तो एनएचएआई के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।
वीवीआईपी का रहता है आवागमन
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर रोजाना वीवीआईपी का आवागमन रहता है, हो न हो किसी दिन जीआर इंफ्रा की कमियों के कारण बड़ा हादसा हो जाए। प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, गृहमंत्री अमित शाह, गर्वनर आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई बड़े नेता एक्सप्रेस-वे पर आ चुके हैं। इसके अलावा कई राज्यों के नेताओं का आवागमन रहता है। फिर भी जीआर इंफ्रा की और से मेंटीनेंस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
पानी न मिलने से पेड़ और टर्पिंग घास सूखी
एक्सप्रेस-वे के डिवाडर के बीच हरे पेड़ और साइडों में लगाई गई टर्पिंग घास पानी न मिलने के कारण सूखती जा रही है। जिसकी वजह पांच हार्स पावर का पंपिंग सेट का न होना है। जगह-जगह लगाए गए पंपिंग प्वाइंट डेमेज हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार चार साल के लिए एक्सप्रेस-वे की देखरेख जीआर इंफ्रा की है, लेकिन फिलहाल में मेंटीनेंस के नाम पर औपचारिकता बरती जा रही है।

