Monday, March 9, 2026
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हिंदू धर्म में क्यों मनाई जाती है विवाह पंचमी, आइये जानते है?

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी मनाई जाती है। इस साल विवाह पंचमी 28 नवंबर को मनाई जाएगी। धार्मिक ग्रंथों में इस तिथि का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था।

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इसलिए विवाह पंचमी का ये पावन पर्व भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। एक मान्यता ये भी है कि इस दिन तुलसी दास जी के द्वारा रामचरितमानस भी पूरी की गई थी। इस दिन मंदिरों में भव्य आयोजन किए जाते हैं और लोग पूजन, अनुष्ठान करते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं विवाह पंचमी का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि…

विवाह पंचमी 2022 शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष के दिन विवाह पंचमी की शुरुआत 27 नवंबर 2022 को शाम 04 बजकर 25 मिनट से हो रही है। ये तिथि 28 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, विवाह पंचमी इस साल 28 नवंबर को मनाई जाएगी।

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विवाह पंचमी 2022 पूजा विधि

  • पंचमी के दिन प्रातः उठकर स्नानादि करने के बाद भगवान राम का ध्यान करें।
  • एक चौकी पर गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें और आसन बिछाएं।
  • चौकी पर भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा स्थापित करें।
  • प्रभु श्री राम को पीले और सीता जी को लाल वस्त्र अर्पित करें।
  • फिर दीप प्रज्वलित करके तिलक करें और फल-फूल नैवेद्य अर्पित करते हुए पूजा करें।
  • इस दिन पूजन के दौरान बालकाण्ड में दिए गए विवाह प्रसंग का पाठ करना चाहिए।
  • इसके साथ ही इस दिन रामचरितमानस का पाठ करने से घर में सुख-शांति आती है।

विवाह पंचमी का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, विवाह पंचमी के दिन राम-सीता की पूजा करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। विवाह पंचमी के दिन खासतौर पर अयोध्या और नेपाल में विशेष आयोजन किए जाते हैं।

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विवाह पंचमी पर नहीं की जाती शादी

विवाह पंचमी भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। लेकिन ये दिन शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भगवान राम के साथ विवाह के बाद माता सीता को अपने जीवन में कई दुखों का सामना करना पड़ा था।

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यही वजह है कि माता-पिता इस दिन अपनी बेटियों का ब्याह करने से बचते हैं। ताकि उनके जीवन में कोई दुख न आए और वे हमेशा सुखी जीवन जिएं।

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