Wednesday, April 22, 2026
- Advertisement -

वोटर लिस्ट या एनआरसी?

एनआरसी में धर्म विशेष के आधार पर भेदभाव नहीं होगा। एनआरसी में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है जिसके आधार पर कहा जाए कि दूसरे धर्म के लोगों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। सभी नागरिक भले ही उनका धर्म कुछ भी हो, एनआरसी लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। एनआरसी अलग प्रक्रिया है और नागरिकता संशोधन विधेयक अलग प्रक्रिया है। इसे एक साथ नहीं रखा जा सकता। एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा ताकि भारत के सभी नागरिक एनआरसी लिस्ट में शामिल हो सकें।’ ये शब्द हैं गृहमंत्री अमित शाह के हैं। उन्होंने यह बयान नवंबर 2019 में राज्यसभा में दिया था। तब एनआरसी और नागरिकता संशोधन को लेकर देश में काफी उबाल था। सरकार और सरकार के लोगों के साथ ही बीजेपी वाले भी इन मसलों को तूल दे रहे थे जबकि विपक्ष इन मुद्दों को लेकर सड़क से संसद तक हंगामा खड़ा कर रहा था। देश के मुसलमान काफी घबराये हुए थे। उन्हें लग रहा था कि सरकार उनके खिलाफ कोई बड़ा षड्यंत्र कर रही है। उनके भविष्य को चौपट करने का कोई बड़ा अभियान चला रही है।

बिहार में जिस तरह से चुनाव आयोग की तरफ से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसएआर की घोषणा की गई है, बिहार के काबिल मुख्यमंत्री चुप और शांत हो गए हैं। उनकी ये शांति किस वजह है, यह तो वही जानते होंगे लेकिन कई लोग यह भी कह रहे हैं कि बीजेपी ने उन्हें समझा दिया है कि इस बार सरकार के खिलाफ लोगों में काफी गुस्सा है इसलिए अगर सरकार फिर से बनानी है तो कोई खेल करने की जरूरत है और आप इस खेल पर कुछ मत बोलिए। केवल देखिए कि आगे क्या-क्या होता है? लेकिन बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बीजेपी और अमित शाह के खेल को ताड़ गई हैं और अब वह काफी आक्रामक हो गई हैं। वह जान रही हैं कि उत्तर भारत में केवल बंगाल और बिहार ही दो प्रदेश बचा है जहां अभी तक बीजेपी सरकार बनाने से चूक रही है। बंगाल वाम सोच से ओत-प्रोत है भले ही ममता की पार्टी ने वामपंथ को कमजोर कर दिया है लेकिन ममता भी जानती हैं कि उनकी पार्टी में आज जो हैं उनमें अधिकतर लोग उसी वामपंथ की धारा से निकले हैं। बंगाल में आज भी मुसलमानों की बड़ी तादाद है और अधिकतर मुसलमान ममता के साथ ही हैं।

जबकि बिहार समाजवादी और सेक्युलर पृष्ठभूमि वाला राज्य रहा है और जितने भी यहां मुख्यमंत्री रहे हैं उनमें किसी के भी सामाजिक क्रेडेंशियल पर कोई सवाल नहीं उठा है। चाहे मुख्यमंत्री अगड़े समाज से आए हों या फिर पिछड़े समाज से, सबने बिहार को अपने तरीके से सींचा है। समाज को जोड़ा है और धार्मिक एकता को आगे बढ़ाया है। पिछले 40 साल के बिहार को देखें तो लालू और नीतीश राजनीति के केंद्र में रहे हैं। दोनों नेता आज भी हैं और दोनों एक बात पर सहमत हैं कि बिहार का ताना बाना कम से कम न टूटे।

इस बार बीजेपी को बिहार से काफी उम्मीद है। बीजेपी को लग रहा है कि कुछ नया खेल करके बिहार में बाजी मारी जा सकती है। नीतीश को कमजोर करके एनडीए के बाकी दलों के साथ नया खेल किया जा सकता है और कुछ नए दलों को एनडीए में शामिल करके सत्ता की कुर्सी को हासिल किया जा सकता है। लेकिन ममता भले ही बीजेपी के इस खेल को समझ रही हैं तो क्या नीतीश कुमार को यह सब समझ में नहीं आ रहा है? या नीतीश कुमार सब कुछ समझ कर भी मौन इसलिए हैं क्योंकि चाहे जैसे भी हो एक बार और सत्ता की कुर्सी उन्हें मिल जाए। भले ही सूबे का सामाजिक तानाबाना खराब ही क्यों न हो जाए? यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है।

बिहार में मात्र तीन महीने बाद चुनाव है और ठीक चुनाव से पहले मतदाता पुनरीक्षण की कहानी शुरू हो गई है। इस कहानी के पीछे की राजनीति चाहे जो भी हो लेकिन इसने बिहारी समाज से लेकर विपक्ष को संकट में डाल दिया है। बड़ी बात यह है कि जहां बिहार का एनडीए इस पूरे मामले में मौन है वहीं कांग्रेस समेत महागठबंधन से जुड़ी पार्टियां खुलकर आवाज उठा रही हैं। चूंकि बंगाल में भी अगले साल चुनाव होने हैं इसलिए ममता बनर्जी भी बिहार में शुरू हुए इस खेल का विरोध करना शुरू कर दिया है और कई तरह की आशंका भी उन्होंने जाहिर की है। कांग्रेस और ममता बनर्जी ने तो साफ तौर पर कहा है कि मतदाता पुनरीक्षण के तहत अपनी पात्रता साबित करने के लिए जिस दस्तावेज की प्रक्रिया से लोगों को गुजरना होगा वह किसी साजिश की तरफ ही इशारा कर रहे हैं। बहुत से लोग मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं और ऐसा हुआ तो चुनावी परिणाम कुछ और ही हो सकते हैं। कांग्रेस और टीएमसी ने यह भी कहा है कि यह सब कुछ वैसा ही खेल है जैसा कि चुनाव से पहले महाराष्ट्र में किया गया था।

चुनाव आयोग की योजना के मुताबिक, 1 जुलाई, 1987 से 2 दिसंबर, 2004 के बीच जन्मे लोगों को अपने पिता या मां की जन्मतिथि और/या जन्मस्थान से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे। 2 दिसंबर, 2004 के बाद पैदा हुए लोगों को अपने माता-पिता दोनों के लिए यही साबित करना होगा। 1 जुलाई, 1987 से पहले पैदा हुए लोगों के लिए यह जरूरी नहीं होगा। चुनाव आयोग ने अपने कदम के पीछे तेजी से बढ़ते शहरीकरण, लगातार पलायन, विदेशी अवैध प्रवासियों के नाम शामिल करने जैसे कारकों का हवाला दिया है।

कांग्रेस ने कहा कि यह घोषणा अपने आप में इस बात को मानने जैसा है कि भारत की मतदाता सूचियों में ‘सब कुछ ठीक नहीं है’- और यह वही मुद्दा है जिसे वह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हार के बाद से लगातार जोर-शोर से उठा रही है। हालांकि पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग ने जो समाधान निकाला है, वह खुद समस्या से भी ज्यादा खतरनाक है। बता दें कि चुनाव आयोग ने 8 मार्च, 2025 को आधार के जरिए मतदाता सूचियों को साफ करने का प्रस्ताव रखा था। यह तरीका पूरी तरह सही तो नहीं था, लेकिन बिहार में एसआईआर की तुलना में कहीं ज्यादा व्यावहारिक था। सवाल है कि आयोग ने सिर्फ तीन महीने बाद अचानक आधार वाले प्रस्ताव को छोड़कर एसआईआर लागू करने का फैसला क्यों किया?’ भारत का संविधान अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का काम सौंपता है। चुनाव आयोग संवैधानिक रूप से मतदाताओं की ईमानदारी की रक्षा करने के लिए बाध्य है। यह ईमानदारी तब खतरे में पड़ जाती है जब पूरे समुदाय से उनके खिलाफ किसी भी सबूत के बिना वोट देने के अपने अधिकार को साबित करने के लिए कहा जाता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार के 70 लाख से ज्यादा नागरिक राज्य के बाहर काम करते हैं। अब इन बाधाओं को लागू करने से न केवल मतदान में कमी आएगी और वैध मतदाता भाग लेने से वंचित होंगे, बल्कि बिहार के गरीब निवासियों और दूसरे राज्यों में रहने वाले प्रवासियों द्वारा नागरिकता साबित करने की आवश्यकता बड़े पैमाने पर अराजकता, जानबूझकर भ्रम और भय पैदा करने के लिए बनाई गई है।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

Delhi News: सनसनीखेज मामला, IRS अधिकारी की बेटी की घर में हत्या, घरेलू सहायक पर शक

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: दक्षिणी दिल्ली के अमर कॉलोनी...

खरगे के बयान पर सियासी संग्राम, भाजपा ने चुनाव आयोग का खटखटाया दरवाजा

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का...

Saharanpur News: पुलिस ने मुठभेड़ में चोरी का आरोपी पकड़ा, पैर में लगी गोली

जनवाणी संवाददाता | सहारनपुर: थाना तीतरों पुलिस ने मुठभेड़ के...
spot_imgspot_img