
गायों की तुलना में भैंसें गर्मी से अधिक पीड़ित होती हैं। भैंस की त्वचा में गर्मी प्रतिरोधी पसीने की ग्रंथियां बहुत कम होती हैं। सूर्य के प्रकाश को प्रतिबिंबित करने के लिए आवश्यक गाय जैसी त्वचा होने के बजाय, सूरज की रोशनी को काली त्वचा द्वारा अवशोषित किया जाता है और भैंस के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, इसलिए भैंस गर्मी से पीड़ित होती है अगर कृत्रिम गर्भाधान करना हो तो सुबह या शाम के समय ही करें।
लू लगने के लक्षण
जिस पशु को लू लगती हैं उसे शुरू में बैचेनी होती हैं, पशु अति उत्तेजित होता हैं। अगर लू की सान्द्रता कम है तो उसके शरीर के कुछ विशिष्टद्द स्नायविक हिस्सों में लकवा मार जाता है। उसे सांस लेने में कठिनाई होती हैं या साँसों की गति कम हो जाती है। कुछ पशुओं में सांसे लेना बंद होकर पशु की मृत्यु हो जाती है। पशुओं के मस्तिष्क में खून का संचय होने से उनके शरीर में खून का दबाव बढ़ जाता है जिससे वे या तो लडखड़ाते हुए चलते हैं या जमीन पर धड़ाम से गिर जाते हैं। उन्हें झटके आते हैं। पशुओं को 108 डिग्री फारेनहिट तक बुखार हो जाता हैं तथा उन्हें जबरदस्त थकान हो जाती है। उनकी चमड़ी सूख जाती हैं। उनकी प्यास में बढ़ोत्तरी होकर वे ज्यादा मात्रा में पानी पीते हैं। उनके शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ने पर वे बेहोश हो जाते हैं या उनकी मृत्यु भी हो सकती है।
उपचार
जिस पशु को लू लगती है उसे तुरन्त हवादार ठंडी छायादार जगह पर ले जाए। अगर पशु का शरीर भार ज्यादा होने की वजह से उसे उठाने में कठिनाई महसूस हों तो वही पाल लगाकर उस पर छाया की व्यवस्था करें।
पशु के शरीर के ऊपर मटके का ठंडा जल छिड़कें तथा किसी पुट्ठा/ खर्डा या अखबार लेकर उसे हवा दें। इससे उसके शरीर का बढ़ा हुआ तापमान कम होने में मदद मिलेगी। पशु को 10 लीटर पानी में 5 ग्राम सादा नमक मिलाकर पिलायें। अगर व्यवस्था है तो पशु के शरीर पर पाईप द्वारा पानी की फुहार लगायें। इससे उसके शरीर का बढ़ा हुआ तापमान कम होने में मदद मिलेगी। तुरन्त अनुभवी पशुओं के डाक्टर को बुलाकर सलाईन लगवाये तथा उसके द्वारा इलाज करवायें।
घरेलू उपचार
-आम (कच्ची कैरी) का पना पिलायें या इमली का पानी नमक मिलाकर पिलायें।
-गुलाब के फूल की पंखुडिय़ों का शरबत बनाकर उसमें चीनी (शक्कर) मिलाकर पिलायें।
-प्याज का रस 50 मिलीलीटर लेकर उसमें 10 ग्राम जीरा चूर्ण तथा 50 ग्राम खड़ी शक्कर मिलाकर पिलायें।
-पशुओं को ठंडा जल पिलायें। इसके लिये एक दिन पहले बड़े मटकों या बर्तनों में पानी भरकर रखें। दिन में कम से कम तीन-चार बार ठंडा जल पिलायें। इससे पशुओं को काफी राहत मिलेगी।
-पशुओं को दिन में सूखा भूसा या चारा ना खिलायें। उन्हें हरा चारा खिलायें। इससे भी उन्हें ठंडक प्रदान होती है। पशुओं के बाड़े में खनिज ईट टांग कर रखें। उनके कुट्टी में एक मुट्ठी भर सादा नमक का घोल डालकर खिलाये। उनकी कुट्टी भिगोकर फिर खिलायें। सूखी कुट्टी ना खिलायें। कुट्टी में 2 चम्मच जीवनसत्व -हीटस्ट्रोक (लू लगना) के घरेलू उपाय अक्सर फायदेमंद होते हैं। पानी में बर्फ डालें, बीमार पशु को बार-बार उस ठंडे पानी से धोएं, या ठंडे पानी में बोरी या कपड़ा भिगोकर शरीर पर रखें। जिससे त्वचा के नीचे की नसें सिकुड़ेंगी और पशु हीट स्ट्रोक से बचे रहेंगे।
-यदि उपलब्ध हो तो पंखे लगा देना चाहिए। रोगग्रस्त पशु को ठंडे एवं खुले स्थान पर रखना चाहिए। रोगग्रस्त पशु की त्वचा को मलना चाहिए जिससे बुखार उतर जाता है और शरीर के ऊपरी भाग में ठंडा रक्त प्रवाहित होने लगता है। बीमार पशु को पीने के लिए भरपूर पानी दें।
-सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सूर्य की किरणों से बचाना चाहिए। 50 मिली प्याज का रस और 10 ग्राम जीरा पाउडर और 50 ग्राम पिसी हुई चीनी मिलाएं। हरे आम को पानी में उबालकर पानी में थोड़ा सा नमक और चीनी मिलाकर पीने से अच्छा लाभ मिलता है।
-भैंसों को डुबकी लगाने देना उनकी स्वाभाविक पसंद है, इससे शरीर के तापमान को उपयुक्त तापमान पर बनाए रखने मे मदद मिलती है ।
-भैंसों पर गिरने के लिए पानी के फव्वारे की व्यवस्था करनी चाहिए, यदि ऐसी व्यवस्था न हो तो उन्हें दिन में तीन से चार बार पानी से धोना चाहिए। दोपहर के समय पशुओं को खलिहान में बांध देना चाहिए, इस समय उन्हें छाया में रखना चाहिए।
-शेड को ठंडा रखने के लिए उसके चारों ओर पेड़ होने चाहिए। गर्मियों में छत को घास से ढक दें। हो सके तो टाट या बर्लेप के पर्दे लटकाकर गौशाला के किनारों पर पानी छिड़कें।
-जानवरों को पीने के लिए ठंडा पानी दिया जाना चाहिए, नमक और गुड़ के साथ बेहतर होगा। इस तरह प्रबंधन से गर्मियों में कम दूध उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।


