Friday, January 27, 2023
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हृद्वाहिका तंत्र को मजबूत रखने के लिए क्या करें

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आप ऐसे जवान और मध्य वय के लोगों से अवश्य मिले होंगे जो शरीर से चुस्त और फुर्तीले होते हैं और बहुत देर तक कठिन परिश्रम करते रहने पर भी थकान महसूस नहीं करते। दूसरी ओर इसी उम्र के दूसरे ऐसे लोगों से भी मिले होंगे जो सीढ़ियां चढ़ते हुए या तेजी से चलने पर थकान महसूस करने लगते हैं और सांस फूलने की शिकायत करते हैं।
उपरोक्त बातें मुख्यत: इस बात पर निर्भर करती हैं कि शरीर की पेशियां, फेफड़े और दूसरे अंग कितने विकसित हैं। शरीर और उसके हृद्वाहिका तंत्र (कार्डियोवास्कुलर सिस्टम) को विकसित करने और उसे स्वस्थ बनाए रखने के लिये दो मुख्य तरीके हैं-पहला तो यह कि मनुष्य के चारों ओर का वातावरण स्वस्थ और स्वच्छ हो तथा उसके जीवन और काम के लिये उचित सुविधाएं हों।

स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्रकाश साफ, खुला हवादार घर, शुद्ध व अच्छी खुराक तथा तनावरहित वातावरण बहुत आवश्यक है। दूसरा-शरीर की उन क्षमताओं को हर ढंग से विकसित किया जाए, जिनसे बाहरी वातावरण की विभिन्न अवस्थाओं का मुकाबला करना पड़ता है जैसे साल में बदलते मौसम की विशेषताएं (ठंड, गरमी, हवा, नमी) तथा उसमें रहने और काम करने की विभिन्न परिस्थितियां आदि। इसे प्राप्त करने के लिये आवश्यक है व्यायाम के द्वारा उचित दिनचर्या को अपनाएं।
हृद्वाहिका तंत्र के सुचारू रूप से काम करते रहने के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने आहार और व्यायाम पर पूरा पूरा ध्यान दें।

मनुष्य के जटिल शरीर को चुस्त व स्वस्थ बनाये रखने के लिए सही आहार का बड़ा महत्व है। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हर उम्र के लिए विशेष आहार के नियम हैं। चालीस-पचास साल की उम्र या उससे ज्यादा उम्र वालों के लिए आहार के नियमों का पालन करना बहुत ही जरूरी है।

हमारा शरीर जिन पदार्थों से बना होता है, उनके साथ हर समय जटिल रसायनिक प्रक्रि याएं घटती रहती हैं। इन्हीं प्रक्रियाओं के समय कुछ ऐसे पदार्थ बन जाते हैं जो शरीर के लिये अनावश्यक होते हैं। ये अनावश्यक पदार्थ, मूत्र, पसीना, निष्कासित वायु आदि के रूप में शरीर से बाहर निकाल दिये जाते हैं और सांस के साथ साथ उसके भीतर लगातार आक्सीजन आता रहता है तथा खाते समय भोजन पदार्थ भी उससे मिलते रहते हैं। इसी को पदार्थों तथा ऊर्जा का आदान-प्रदान कहते हैं। इसके अभाव में जीवन दुर्लभ है।

हृदय रोगियों को मांस भक्षण के स्थान पर दूध और हरी सब्जियां लेने का परामर्श दिया जाता है क्योंकि मांस तंत्रिका तंत्र को उद्दीप्त करता है जबकि दूध और फल तथा सब्जियां इसे शांत रखती हैं। इनके सेवन से नींद अच्छी तरह आती है जो हृद्वाहिका तंत्र के भली भांति काम करने के लिये परम आवश्यक है।

अधेड़ उम्र और उससे आगे की उम्र वाले लोगों को वे चीजें कम से कम खानी चाहिये जिसमें कोलेस्ट्रोल बहुत अधिक मात्र में विद्यमान रहता है जैसे अण्डे की जर्दी, जानवरों का जिगर, भेजा, गुर्दे, दिल, फेफड़े, चाकलेट, चबीर्वाला मांस और चर्बी वाली मछली। यदि खाना हो तो कभी कभार और बहुत कम मात्र में खाना चाहिये।

जो लोग जरूरत से ज्यादा खाने की बुरी आदत के शिकार हैं उनका केवल हृद्वाहिका तंत्र ही खराब नहीं होता बल्कि एक तरह से वे अपनी आयु कम कर रहे होते हैं। डॉक्टर हमेशा से यही कहते आ रहे हैं कि मोटे मनुष्यों के मुकाबले पतले दुबले आदमियों की उम्र लंबी होती है।

मोटापा घटाने के लिये खूब पेट भर कर खाने की बुरी आदत का बिलकुल त्याग कर देना चाहिये। भोजन थोड़ी मात्र में तथा दिन में कई बार करना हितकर है। गरिष्ठ वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिये। हरी सब्जियां व साग पर्याप्त मात्र में लेने चाहिये। मोटापे से पीछा छुड़ाने के लिये नियमित रूप से व्यायाम करना तथा खेलों में हिस्सा लेना और पैदल चलना अति आवश्यक है।

हर आदमी को स्वस्थ जीवन के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना जरूरी है। दिमागी काम करने वालों के लिये तो व्यायाम और भी अधिक जरूरी है।

सुबह जिस समय हम सोकर उठते हैं तो हम क्षैतिज अवस्था से ऊर्ध्वाधर अवस्था में आते हैं। विश्राम अवस्था से पूर्णतया सक्रि य अवस्था में आते हैं। उस समय स्फूर्ति लाने और स्वस्थ बने रहने के लिये व्यायाम आवश्यक होता है।
बस यह याद रखें कि अपने हृद्वाहिका तंत्र को स्वस्थ बनाये रखने के लिये उन नियमों को अवश्य अपनाएं जो इसके लिये आवश्यक हैं तथा जिन्हें अपना कर स्वास्थ्य और फुतीर्लापन बरकरार रहे और मोटापा दूर रहे।

                                                                                                                 परशुराम संबल


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