Monday, January 24, 2022
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क्या आपके दांतों में भी कीड़ा लगा है ?

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सीतेश कुमार दिवेदी |

दांतों की बीमारियों से पाचन शक्ति क्षीण हो जाती है और त्वचा की बीमारियां भी हो जाती हैं। इससे बाल भी झड़ने लगते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार यदि दांतों की ठीक से देखभाल व सफाई की जाए तो दो-तीन पीढ़ियों बाद इस रोग से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है। इस बीमारी का इलाज ही है दांतों की ठीक से नियमित सफाई।

स्वस्थ चमकते दांत सभी को भाते हैं, पर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पूरे विश्व में 90 प्रतिशत लोगों के दांतों में कीड़ा लगा होता है। हम में से प्राय: सभी दांत के दर्द को झेल चुके होते हैं। दांत का दर्द जानलेवा न होते हुए भी जान निकाल लेता है। दांतों में कीड़ा लगना एक असंक्रामक रोग है। वैज्ञानिकों के अनुसार देश की उन्नति और समृद्धि ही इस मर्ज के बढ़ने का मुख्य कारण है। आप कहेंगे, अरे वाह, यदि हमारा देश उन्नति कर रहा है तो देशवासियों के दांत में कीड़ा क्यों लग रहा है पर यह कटु सत्य है।

इसका कारण है हमारा आधुनिक खान-पान, बने-बनाए टॉफी, चाकलेट, केक का सेवन, तरह-तरह के टिन या डिब्बे वाले भोजन, रासायनिक पदार्थों से बने खाने का सेवन, कार्बोहाड्रेट का अधिक सेवन, ताजे रेशेदार और सख्त भोज्य पदार्थों का भोजन में अभाव। ये कारण हैं जो हमारे दांतों में कीड़ा लगने के लिए पर्याप्त हैं।

इस कीड़ा लगने को वैज्ञानिक भाषा में ‘केरिज’ कहा जाता है। इसमें दांत सड़ने लगता है और धीरे-धीरे जड़ तक जब यह बीमारी बढ़ जाती है तो दांत गिर जाता है या दर्द के कारण उसे उखड़वाना पड़ता है। जब हम भोजन करते हैं तो हमारे दांतों पर एक मुलायम परत सी जम जाती है जो जीवाणुग्रस्त होती है। ये सूक्ष्म जीवाणु एक तेजाब उत्पन्न करते हैं जो दांतों और मसूड़ों पर बुरा प्रभाव डालते हैं। गणनानुसार एक मिलीग्राम परत में 800 लाख जीवाणु होते हैं। यह कीटाणु से भरी परत जब दांतों पर जमी रहती है तो इसी से विभिन्न प्रकार की दांतों की बीमारियां जन्म लेती हैं।

दांतों की बीमारियों से पाचन शक्ति क्षीण हो जाती है और त्वचा की बीमारियां भी हो जाती हैं। इससे बाल भी झड़ने लगते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार यदि दांतों की ठीक से देखभाल व सफाई की जाए तो दो-तीन पीढ़ियों बाद इस रोग से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है। इस बीमारी का इलाज ही है दांतों की ठीक से नियमित सफाई।

कुछ मान्यताएं या धारणाएं हम स्वयं ही अपने मन में पाल लेते हैं, क्योंकि बचपन से उन्हें सुनते आए हैं। अब भला मंजन या पेस्ट लगाए बिना कभी कोई दांतों को ब्रश करता है क्या पर संभवत: हम यह नहीं जानते कि पेस्ट व मंजन का दांतों की सफाई से कोई सीधा संबंध नहीं होता। मंजन या पेस्ट मुंह को सुगंधित करते हैं, ताजगी देते हैं पर चमक या सफाई से उनका कोई संबंध नहीं होता।

पेस्ट और मंजन महंगे भी आते हैं, शीघ्र ही समाप्त हो जाते हैं जबकि ब्रश सस्ते भी आते हैं और दो-तीन माह तो बेहद सरलता से प्रयोग किए जा सकते हैं। पुराने समय में दांत कम खराब होते थे क्योंकि तब गांवों में मंजन कोई नहीं जानता था। नीम या बबूल की दातुन ही सबसे अच्छा ब्रश का काम करती है। इससे मुंह की बदबू व गंदगी लार के साथ निकल जाती है और ब्रश का भाग दांतों की सफाई करता है।

नियमित सफाई करें

वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया है कि महंगे पेस्ट व मंजन का अधिक प्रयोग ही दांतों की सुरक्षा नहीं करता। पेस्ट या मंजन सस्ता हो या महंगा, मुंह को ताजगी देता है, अत: ध्यान रखें कि ढेर-सा पेस्ट या मंजन प्रयोग न करें और अच्छे किस्म के ब्रश का सही तरीके से प्रयोग करना सीखें। बचपन से ही माता-पिता को बच्चों को सिखाना चाहिए कि नियमित खाना या नाश्ता या कुछ भी खाने के बाद दांतों को सिर्फ ब्रश से ही ठीक से साफ करें। सुबह व रात को सोने से पहले थोड़ा-सा पेस्ट या मंजन लगाकर दांतों की नियमित सफाई करें तो आपके दांतों में कभी कीड़ा नहीं लगेगा।

शोधों से पता चला है कि ब्रश का आकार-प्रकार, उसकी लंबाई-चौड़ाई, उसमें लगे बालों की बनावट व क्वालिटी बहुत महत्पूर्ण होती है। अच्छे ब्रश को 2 सेमी. लंबा होना चाहिए तथा बाहर की ओर से सतह बहुत अधिक चौड़ी व लंबी नहीं होनी चाहिए।

वैज्ञानिकों का मत है कि जितनी चौड़ी सतह ब्रश की होगी, उतनी उसकी सफाई की क्षमता कम होगी। बहुत मुलायम ब्रश भी बेकार होता है और अत्यंत कड़ा ब्रश मसूड़़ों को नुकसान पहुंचाता है। ब्रश थोड़ा कड़ा होना चाहिए और बाल बहुत पास-पास नहीं होने चाहिए। बाल दूर होने से मसूड़ों की ठीक से मालिश हो जाती है और दांतों के बीच छिपे अन्न कण सरलता से निकल जाते हैं।

विभिन्न रंगों के दो ब्रश रखें

एक और बात ध्यान में रखने की है कि जो सूक्ष्म जीवाणु दांतों में रहते हैं, ब्रश करते समय ब्रश में लग जाते हैं और ब्रश जब तक गीला रहता है उसमें पनपते रहते हैं परंतु सूखते ही ये जीवाणु मर जाते हैं। ब्रश को पूरी तरह सूखने में 10-12 घंटे का समय लगता है, अत: सुबह प्रयोग किया हुआ ब्रश शाम को प्रयोग न करें। इसलिए विभिन्न रंगों के दो ब्रश अवश्य रखें ताकि एक से आप सुबह दांत साफ करें व दूसरे से रात को। बार-बार गीले ब्रश से दांतों की सफाई के साथ-साथ जीवाणु मुंह में पुन: प्रवेश करते रहते हैं जो ठीक नहीं है।

इस प्रकार जरा-सी सावधानी व सूझबूझ से आप व आपके घर के अन्य सदस्य अपने दांतों की देखभाल करें तो आपके दांतों में कभी कीड़ा नहीं लगेगा और आप नकली दांत व टूटे दांतों की समस्या से आसानी से बच सकेंगे।


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