- नर्सरी से कक्षा छह तक के बच्चों को जाना होगा एक मार्च से
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना के कारण एक साल से स्कूल नहीं जा रहे मासूम बच्चों को एक मार्च से स्कूल जाने के लिये मानसिक रुप से तैयार होना होगा। सरकार ने गाइड लाइन जारी कर दी है। कक्षा छह तक के बच्चों को अब घर से निकालने के लिये मन बना लिया गया है। वहीं स्कूलों ने इस बाबत तैयारियां शुरु कर दी है। अभिभावकों का मानना है कि बच्चों को स्कूल जाने के लिये तैयार करना एक चुनौतीपूर्ण काम होगा।
कोरोना संक्रमण के 11 महीने बाद एक बार फिर से प्रदेश भर के स्कूल छात्रों से गुलजार होने जा रहे हैं। शासन की ओर से शुक्रवार को प्रदेश के उच्च प्राथमिक,माध्यमिक व उच्च शिक्षा के सभी स्कूल और विश्वविद्यालय की नियमित रूप से 10 फरवरी से खोले जाने निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा कक्षा एक से पांच तक के विद्यालय एक मार्च से खोलने के आदेश जारी किए है। आदेश में कहा गया है कि कोरोना काल के पूर्व की तरह जैसे विद्यालय संचालित किए जाते थे, वैसे ही विद्यालय संचालित किए जाने और पठन-पाठन शुरू किया जाए। स्कूल प्रशासन को मास्क, थर्मल स्कैनर, स्वच्छता व छात्रों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग विशेष ध्यान देने की हिदायत दी है।
लॉकडाउन के बाद पिछले साल अप्रैल से बंद चल रहे है स्कूलों के परिसर एक बार फिर से बच्चों की हंसी, खेलकूद एवं पठन-पाठन की रौनक दिखाई देगी। खासकर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में एक मार्च से कक्षाओं का संचालन शुरू हो जाएगा। स्कूल व डिग्री कॉलेज के शैक्षिक सत्र को पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री ने नियमित रूप से शिक्षण संस्थाएं खोलने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, पिछले 11 महीने से आॅनलाइन पढ़ाई कर रहे छात्र अब कक्षा में गुरुजी से रूबरू होकर सवाल कर सकेंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक गिरजेश कुमार का कहना है कि स्कूलों को खोलने की तैयारी शुरू कर दी गई है। शासन के निर्देश मिलते ही स्कूलों ने अपनी तैयारियां शुरु कर दी है।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल खुलने से बच्चों को गंभीरता से पढ़ने की आदत दोबारा डालनी होगी क्योंकि आन लाइन पढ़ाई के कारण बच्चे हद से ज्यादा लापरवाह हो गए थे और आन लाइन परीक्षा के कारण बच्चों में स्पर्धात्मक आदत खत्म होती जा रही थी क्योंकि बच्चे नकल करके उत्तर दे रहे थे जो उनकी प्रतिभा के साथ अन्याय हो रहा था।
तक्षशिला निवासी निधि त्यागी ने बताया कोरोना काल में बच्चों ने सिर्फ ट्यूशन में गंभीरता दिखाई और स्कूल न जाने के कारण उनमें आलस्य का समावेश हो गया था। शिक्षिका प्राची सिंह का कहना है कि स्कूल खुलने से बच्चों में पढ़ने की आदत दोबारा आ जाएगी और किताबें खुलनी शुरु हो जाएगी क्योंकि आन लाइन क्लासेस में बच्चे किताब खोलने को राजी नहीं थे।
10 से उच्च प्राथमिक, एक मार्च से शुरु होगी प्राथमिक स्कूल में कक्षाएं
लॉकडाउन अवधि से बंद पड़े बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित उच्च प्राथमिक एवं प्राथमिक विद्यालय को खोलने के लिए शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने निर्देश जारी कर दिए है।
अपर मुख्य सचिव ने बेसिक विभाग को पत्र जारी करते हुए कहा है कि गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा कोविड-19 को दृष्टिगत रखते हुए निर्धारित मानक एवं शर्तों के अनुसार विद्यालयों के पुन: संचालन के लिए एसओपी के क्रम में सभी परिषदीय एवं निजी विद्यालयों की कक्षाओं को पुन: संचालन के लिए प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराया गया है।
जिसके अनुसार बेसिक शिक्षा के अंतर्गत कक्षा छह से आठ तक बच्चों के लिए विद्यालय शिक्षक कार्य 10 फरवरी से एवं कक्षा एक से से पांच तक के बच्चों के शिक्षण कार्य के लिए एक मार्च से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। इसलिए कोविड प्रोटोकाल के अंतर्गत सभी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएं।

