Tuesday, January 18, 2022
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भारत-चीन के बीच 13वें दौर की वार्ता हुई शुरू

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जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर शांति बहाली के लिए भारत और चीन के बीच उच्च सैन्य स्तर की 13वें दौर की वार्ता रविवार सुबह 10:30 बजे शुरू हो गई।

बैठक में भारत तनातनी वाले शेष बिंदुओं से चीनी सेना की पूरी तरह वापसी पर जोर देगा। इसके अलावा डेपसांग और देमचोक के मुद्दे पर भी चर्चा होगी।

12वें दौर में 9 घंटे चली थी बातचीत

31 जुलाई को भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 12वें दौर की वार्ता हुई थी। यह वार्ता करीब नौ घंटे तक चली थी। इसमें भारत ने पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा व अन्य तनाव वाले स्थानों से सेना व हथियारों को जल्दी हटाने पर जोर दिया गया था।

बैठक में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध खत्म करने पर बातचीत की। चर्चा के दौरान भारत व चीन ने सीमा विवाद को लेकर विस्तार से चर्चा की थी।

14 जुलाई को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।

उस वक्त दुशांबे में शंघाई सहयोग सम्मेलन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर हुई इस मुलाकात में एलएसी को लेकर चल रहे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। जयशंकर ने कहा था कि स्थिति में एकतरफा परिवर्तन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने कहा था कि सीमा क्षेत्रों में हमारे संबंधों के विकास के लिए शांति और व्यवस्था की पूरी तरह वापसी बहुत जरूरी है।

दोनों देश पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से अपने-अपने सैनिकों और हथियारों को हटाने की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं।

लेकिन, टकराव वाली बाकी जगहों पर सैनिकों को वापस ले जाने की शुरुआत अभी तक नहीं हो पाई है। दोनों के बीच पिछले साल मई से पूर्वी लद्दाख में कुछ स्थानों को लेकर सैन्य गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।

एलएसी पर जब तक चीनी सैनिक मौजूद, मोर्चे पर डटे रहेंगे हमारे भी जवान: नरवणे
बैठक से ठीक एक दिन पहले सेना प्रमुख ने शनिवार को दो टूक कहा कि जब तक चीनी सैनिक वहां मौजूद रहेंगे, तब तक हमारे जवान भी डटे रहेंगे।

सेना उनकी हर गतिविधि पर नजर रख रही है और किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने अफगानिस्तान के आतंकियों की घुसपैठ को भी गंभीर मसला बताया।

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का एलएसी के उस पार बुनियादी ढांचे बनाना चिंता का विषय जरूर है, लेकिन हमारी तैयारी भी टक्कर की है।

हमारे सैनिक हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं और दुश्मन का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस बार की सर्दियों में भी चीनी सैनिक एलएसी पर बने रहे तो वहां भी एलओसी जैसे हालात हो जाएंगे। हालांकि हालात पाकिस्तान जैसी नहीं होगी लेकिन हमारे सैनिक वहां भी मोर्चे पर डटे रहेंगे।

पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा- चीन के आर्थिक विकास से शक्ति संतुलन हमारे खिलाफ बदल गया है

पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने शनिवार को कहा कि चीन के आर्थिक विकास के बाद भारत-चीन संबंधों में शक्ति संतुलन ‘हमारे खिलाफ स्थानांतरित’ हो गया है और इस बदलते परिदृश्य के बीच अगले कुछ वर्षों में नई दिल्ली को ‘काफी फुर्तीला’ होना होगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और चीन में राजदूत के तौर पर कार्य कर चुके मेनन ने नई दिल्ली में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के दौरान पिछले साल पूर्वी लद्दाख में तनाव में बढ़ोतरी का उल्लेख किया और कहा कि ‘सैन्य रूप से भारत जानता है कि चीन से कैसे निपटना है और मुझे नहीं लगता कि बीजिंग ने वह हासिल किया जो वह सामरिक रूप से करना चाहता था।’

यह पूछे जाने पर कि वर्तमान शासन चीन के साथ किस तरह निपट रहा है, मेनन ने कहा, ‘मौजूदा शासन हो या पिछली सरकारें, मूल रूप से हमने संबंधों को प्रबंधित किया है। निश्चित रूप से समस्या यह है कि शक्ति संतुलन हमारे खिलाफ स्थानांतरित हो गया है।’

मेनन ने कहा, ‘जब हमने राजीव गांधी के समय में एक तरह का ‘जियो और जीने दो’ का रुख अपनाया तो हमारी अर्थव्यवस्थाएं मोटे तौर पर एक ही आकार की थीं और तकनीकी स्तर भी समान थे।

भारत शायद दुनिया में अधिक एकीकृत था।’ उन्होंने कहा, ‘अब चीन अर्थव्यवस्था में पांच गुना बड़ा है, तकनीकी रूप से भारत से काफी आगे है.और दुनिया में बहुत अधिक एकीकृत है।’

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में ‘ड्रैगन टीथ: इज द वर्ल्ड रेडी फॉर ए चाइनीज सेंचुरी’ सत्र का आयोजन किया गया।

सत्र में मेनन ने कहा, ‘संतुलन बदल गया है, इसलिए चीन का व्यवहार बदल गया है, क्योंकि चीन सापेक्ष व्यवहार पर प्रतिक्रिया करता है। इसलिए, हमें अपना व्यवहार बदलने की जरूरत है, और हम इसे पुन: निर्धारित करने की प्रक्रिया में हैं।’

उन्होंने कहा कि चीन के व्यवहार में इस बदलाव के बाद, राजनीतिक रूप से भारत ने क्वाड ग्रुप और अन्य कार्यों के साथ बाहरी संतुलन बनाया है।

मेनन ने कहा, चीनी कार्रवाइयों के लिए धन्यवाद, ‘हमारे हमारे बहुत सारे नए दोस्त हैं’ और भारत उनके साथ काम कर रहा है।

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