जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में विकास के साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दों को धार देना विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए फायदेमंद रहा। भाजपा की जीत में अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे राष्ट्रवाद के मुद्दों ने भाजपा के परंपरागत वोट बैंक के दिल में जगह बनाई, वहीं चुनाव के बीच भाजपा ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे को छेड़कर बहुसंख्यक समाज को लामबंद कर दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का रिकॉर्ड कायम किया है।
प्रदेश में सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को अपनी प्राथमिकता में रखा। अयोध्या में विकास कार्यों की नींव रखने के साथ 2017 से अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन कर योगी ने स्पष्ट संदेश दे दिया था कि अब वोट बैंक के नाम पर अयोध्या की अनदेखी नहीं होगी। नवंबर 2019 में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि विवाद का फैसला आने के बाद योगी के प्रयास से 5 अगस्त 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने मंदिर निर्माण का शिलापूजन किया।
सरकार एक ओर जहां रामनगरी में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सहित अन्य सुविधाएं देकर नया स्वरूप देने में जुटी थी, वहीं भाजपा और आरएसएस राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को जनभावना से जोड़ रहे थे। विधानसभा चुनाव के दौरान अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में कांटे का मुकाबला होने का आभास होने के बाद सीएम ने खुद अयोध्या की कमान संभाली। उन्होंने अयोध्या में न सिर्फ सांधु-संतों को सक्रिय किया, बल्कि खुद दो दिन अयोध्या में प्रचार किया। अवध में भाजपा का परचम फहराने में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे ने बड़ी भूमिका निभाई।
काशी विश्वनाथ मंदिर दुनियाभर के हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। लेकिन 2014 से पहले तक यह राजनीतिक उपेक्षा का शिकार था। पीएम मोदी के नेतृत्व में एक ओर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण शुरू हुआ तो दूसरी ओर पूरे वाराणसी का विकास द्वार खोला। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पीएम ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण कर पूर्वांचल में भगवा बयार बहाई।
भाजपा, आरएसएस और अन्य वैचारिक संगठनों ने काशी विश्वनाथ का प्रसाद घर-घर पहुंचाकर यह संदेश देने में सफल रहे कि 1853 में जिस तरह महाराजा रणजीत सिंह ने काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर को सोने से मंडित कराया था। उसी तरह 168 साल बाद पीएम मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर को नया स्वरूप दिया है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा रहा कारगर
विधानसभा चुनाव के आगाज से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अयोध्या की तर्ज पर मथुरा में भी बांके बिहारी मंदिर निर्माण का मुद्दा छेड़ा। पार्टी के नेताओं ने चुनावी सभाओं में मथुरा में भी मंदिर निर्माण के मुद्दे को उठाकर जनता के मन में विश्वास जगाने में सफल रहे कि प्रदेश में फिर भाजपा की सरकार बनी तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विवाद का भी हल निकलेगा। ब्रज क्षेत्र में भाजपा को मिली जीत में मथुरा में मंदिर निर्माण के मुद्दे का भी असर रहा है।
समान नागरिक संहिता के मुद्दे ने भी दिखाया असर
चुनाव के बीच ही भाजपा की ओर से समान नागरिक संहिता लागू करने का मुद्दा उठाने की रणनीति सफल रही। सीएम योगी, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह सहित अन्य नेताओं ने भी अपनी चुनावी सभाओं में जनता को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए यूपी में भाजपा की सरकार बनाना आवश्यक है। भाजपा, आरएसएस जनता के बीच यह बात रखने में सफल हुए कि राम मंदिर निर्माण, जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद अब सरकार इस मुद्दे को भी पूरा करेगी।

