Thursday, February 12, 2026
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विश्व कल्याण की कामना के साथ चतुर्वेद परायण महायज्ञ का समापन

  • पूर्णाहुति पर बड़ी संख्या में पहुचें श्रद्धालु

जनवाणी संवाददाता  |

बिनौली: महाभारत कालीन लाक्षगृह पर स्थित श्री महानंद संस्कृत विद्यालय गुरुकुल में चल रहे आठ दिवसीय 63 वें विश्व कल्याण चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का रविवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच स्वाहाकार के उदघोष के बीच हो गया। समापन पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुचकर विश्व कल्याण के कामना करते हुए आहुतियां दी।

यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य गुरुवचन शास्त्री ने कहा कि विश्व कल्याण के लिए यज्ञ जरूरी है। यज्ञ करने से धर्म की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने भी विश्व की शांति के लिए यज्ञ किया था। यज्ञ से ही विश्व का कल्याण होता है। यज्ञ से ही सभी जीवों की उत्पत्ति होती है|

किसी भी कार्य को प्रारंभ करने से पहले यज्ञ कर भगवान की उपासना की जाती है। प्रधानाचार्य आचार्य अरविंद कुमार शास्त्री ने सभी यज्ञमानो को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ववल भविष्य की कामना की।

पूर्व प्रधानाचार्य आचार्य विनोद कुमार शास्त्री, आचार्य सोमदत्त भारद्वाज, सुनील शास्त्री, देवेंद्र शास्त्री, आचार्य रविदत्त शास्त्री आदि विद्वानों ने

भी वेदोपदेश दिए। गुरुकुल के ब्रह्मचारी जयकृष्ण शास्त्री, रोहित शास्त्री, मोहित शास्त्री, कपिल शास्त्री ने सस्वर मंत्रोचारण के बीच

वेदपाठ किया। बीएसएनएल के पूर्व जीएम चंद्रहास, प्रधान यशोधर्मा सौलंकी, मंत्री राजपाल त्यागी, गंगाशरण, सेवाराम आर्य, राजगुरु तोमर,  अजय त्यागी, ब्रह्मप्रकाश त्यागी, अरुण त्यागी, कविराज त्यागी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति शामिल होकर विश्वकल्याण की कामना की।

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