- हरियाणा की शराब का रैपर बदलकर धड़ल्ले बेच रहे शराब माफिया
- आबकारी विभाग बना अंजान, लग रहा करोड़ों के राजस्व का चूना
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: होली का त्योहार आते ही जिले भर में शराब माफिया सक्रिय हो जाते हैं। वहीं, देहात के कई इलाकों में माफिया हरियाणा से तस्करी के जरिए शराब लाकर बेच रहे हैं। इस धंधे में लिप्त माफिया सरकार को भी करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहे हैं। जबकि आबकारी विभाग इस ओर से अंजान बना बैठा है।
भावनपुर क्षेत्र के औरंगाबाद गांव में इन दिनों शराब माफिया अवैध शराब के धंधे के जरिए खूब चांदी काट रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार गांव में दो शराब माफिया सक्रिय है, जो हरियाणा से तस्करी शराब लाते हैं। इस शराब के रैपरों को हटाकर उनपर जिले में बिकने वाली शराब के लेबल लगा दिए जाते हैं।
इसके बाद इन्हे अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है। यह शराब माफिया सरकारी ठेकों से कुछ शराब खरीदकर लाते हैं। जिसकी आड़ में हरियाणा की शराब की बिक्री की जा रही है। वहीं, इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी आलोक कुमार सिंह का कहना है कि उनके संज्ञान में इस तरह अवैध शराब बिकने की जानकारी नहीं है, अगर ऐसा है तो वह इसकी जांच कराएंगे।
गांव में नहीं है सरकारी शराब का ठेका
औरंगाबाद गांव की आबादी काफी घनी है, बावजूद इसके यहां पर एक भी शराब की लाइसेंसी दुकान नहीं है। शराब के शौकीन दूसरी जगहों से शराब लाकर पीते है, इसी बात का फायदा उठाकर शराब माफिया अवैध शराब की धड़ल्ले से बिक्री कर रहे है। औरंगाबाद के साथ ही छिलौरा, कस्तला, ज्ञानपुर, भूड़पुर आदि गांवों में भी शराब के ठेके नहीं है, इन गांवों में रहने वाले शराब के शौकीन भी औरंगाबाद में ही शराब माफियाओं से अवैध रूप से शराब खरीदकर पीते हैं।
रैपर बदलकर बेचते हैं अवैध शराब
माफिया हरियाणा से बै्रस्टो ब्रांड की शराब के पव्वे तस्करी के जरिए लाते हैं, इसके बाद इस अवैध शराब पर मेरठ में बिकने वाली मिस्टर इंडिया के लेवल चिपका दिये जाते हैं। लोगों को यह बताया जाता है कि शराब मेरठ के ही किसी ठेके से खरीद कर लाई गई है, जबकि यह हरियाणा की शराब होती है।
होली पर शराब की बढ़ती है खपत
होली के त्योहार पर शराब की खपत अधिक होती है, औरंगाबाद में अवैध शराब के धंधे में लिप्त शराब माफियाओं ने इसको लेकर भी तैयारी कर ली है। माफियाओं ने अपने घरों में अवैध शराब का जखीरा जमा कर लिया है। बताया जा रहा है कि शराब के शौकीन लोगो को सुबह से देर रात तक आसानी से शराब उपलब्ध कराई जाती है। यह धंधा देहात के कई गांवों में धड़ल्ले से जारी है।
सरकार को लगा रहे राजस्व का चूना
सरकार को हर साल शराब से करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है, लेकिन अवैध रूप से बिकने वाली शराब से राजस्व की प्राप्ति नहीं होती। अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए विभाग द्वारा अलग-अलग टीमे बनाई गई है जो चौबीसों घंटे सक्रिय रहती है। बावजूद इसके देहात के क्षेत्रों में अवैध शराब का धंधा खूब फलफूल रहा है।

