Monday, March 23, 2026
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त्योहार का रंग फीका न कर दे मिलावटी मावा, पनीर

  • चिकित्सकों की राय में मिलावटी मावा और पनीर शरीर में करता है धीमे जहर का काम
  • त्योहारों पर बच्चों को मिठाई और पनीर खिला रहे हैं तो हो जाए सावधान

जनवाणी संवाददाता |

परीक्षितगढ़: त्योहार आ गए हैं, ऐसे में घरों में पकवान और मिठाइयां बननी शुरू हो जाती हैं। अगर आप बाजार से पनीर या खोआ लाते हैं तो आपको सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि त्योहारों के मौसम में ज्यादा खपत के चलते बाजार में मिलावटी और नकली पनीर व खोआ आ जाता है। ये सेहत के लिए खतरनाक होते है और इनका सेवन करने से आप कई बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि आप जो पनीर, मावा या खोआ खरीदकर ला रहे हैं वो असली है या नकली।

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त्योहारी सीजन शुरू होते ही मिलावट खोर सक्रिय हो जाते हैं। अक्सर होली के आसपास अधिकारी हलवाई और थोक विक्रेताओं की दुकान पर छापेमारी कर मिलावटी पनीर, मावा बरामद करते रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से मिलावटी सामान की जानकारी मिलने पर शिकायत की अपील की है। होली पर दूध, पनीर और मावा की मांग बढ़ जाती है। आंकड़ों की माने तो सिंथेटिक दूध और मावा तैयार कर बाजार की खपत पूरी की जाती रही है। सूत्र बताते हैं कि सिथेटिक दूध पानी में डिटर्जेंट पाउडर, चिकनाहट लाने के लिए रिफाइंड और एसेंट पाउडर डालकर बनाया जाता है। जिससे दही और पनीर तैयार किया जाता है। जो पेट के लिए हानिकारक होता है।

रंग-गुलाल के साथ व्यंजनों का पर्व होली मिलावट से बदरंग हो सकता है। मिलावटी और सिंथेटिक मावा का व्यापार होली नजदीक आते जोर पकड़ने लगा है। मावे की सफेदी देखकर खरीदारी करने की गलती सेहत पर खासा असर डाल सकती है। लिहाजा बाजार में खोया खरीदते समय असली-नकली की पहचान करना जरूरी है। होली पर अतिथियों का स्वागत गुझियों से करने की परंपरा है। जिससे लगभग प्रत्येक घर में गुझिया बनाने के लिए मावा खरीदा जाता है। एक किलोग्राम मावा तैयार करने में करीब चार से पांच लीटर दूध लगता है।

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इस हिसाब से डिमांड के सापेक्ष प्रतिदिन हो रहे दूध उत्पादन से मावा की डिमांड पूरी होना संभव नहीं है। ऐसे में कुछ लोग मिलावट करके व सिंथेटिक तरीके से नकली मावा बनाकर मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में रहते हैं। त्योहार कोई-सा भी हो, घर में जबतक मिठाई नहीं होती तब तक त्योहार, त्योहार नहीं लगता है। घर में भी मिठाई लाने की बच्चे जिद पर अड़े रहते हैं। यही नहीं अगर त्योहार की मुबारकबाद दूसरे के घर पर जाकर दे रहे हैं तो साथ में मिठाई जरूर होनी चाहिए, लेकिन जरा सावधान हो जाएं।

जो मिठाई आप या फिर आप किसी के लिये लेकर जा रहे हैं। वो मिठाई कम जहर तो नहीं इसका भी आपको पता होना चाहिए। असल में त्योहार आते ही। मिलावट खोर गैंग सक्रिय हो जाते हैं। जो करोड़ों रुपये मिलावटी चीजें बनाकर कमा लेते हैं। जो नकली खोया, मावा, पनीर, देशी घी और इनसे बनने वाली मिठाइयों बना भी रहे हैं। जिनके पास लाखों रुपये का आॅर्डर इन चीजों को लेने का आ चुका है। फूड एंड सप्लाई विभाग के अधिकारी भी इन जैसे गैंग को पकड़ने के लिये छापेमारी कर रहे हैं।

रंगीन कचरी-पापड़ से रहे दूर, इनसे सेहत का खतरा

होली में गुझियों के साथ ही कचरी-पापड़ से भी लोगों का स्वागत किया जाता है, जिससे बाजार में तरह-तरह के रेडीमेड कचरी-पापड़ बिकने लगे हैं। चटख रंगीन कचरी-पापड़ में अखाद्य रंगों की मिलावट किए जाने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है, जिसके खाने से पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। बाजार में इनकी डिमांड बढ़ने से मिलावटखोर फायदा उठाने के प्रयास में हैं।

ऐसे भी होती है मिलावट

उबलते हुए आलू, दूध पाउडर, अरारोट, सूजी और रिफाइंड की मिलावट करके भी मावा तैयार किया जाता है। इन सामग्रियों को हाथ से मिलाया जाता है। काफी देर मथने के बाद यह मावे की तरह नजर आने लगता है। इसमे थोड़ी चीनी भी मिलाई जाती है। यह कृत्रिम मावा 240 रुपये किलो तक बिकता है।

सिंथेटिक दूध की प्रक्रिया

पानी में कास्टिक सोड़ा, यूरिया, फार्मलिन मिलाकर उसे आग पर तपाया जाता है। इसके बाद घोल में बराबर का दूध पाउडर अथवा असली दूध मिलाया जाता है। दूध उबालते समय मलाई लाने के लिए अरारोट भी मिलाया जाता है। वहीं देहात क्षेत्र में मिलावटी पनीर तैयार किया जा रहा है। जिससे दिल्ली, मेरठ व अन्य स्थानों पर बेचा जा रहा है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इस मावे को अधिकांश हलवाई खरीदते हैं, जो होली या दीवाली जैसे त्योहारों पर सीजनल दुकानें लगते हैं। यहां दुकानों पर मिलावटी मावे से बनी मिठाइयों सप्लाई होती है। होली में मावे की गुझिया की सबसे ज्यादा मांग होती है।

कैसे करें साबित?

मावे में सूजी मिलाई जाती है तो हथेली पर रखकर मसाले दाने नहीं पिसेंगे तो मिलावट है। यदि चिकनाई ज्यादा दिख रही हो तो उसमें निश्चित रूप से चर्बी, रिफाइंड या वनस्पति घी मिलाया गया है। चखक कर भी मिलावट का पता लगा सकते हैं। मावे में थोड़ी चीनी डालकर गरम करें, यदि पानी छोड़ने लगे तो यह नकली मावा है। इसके अलावा मावा को चखकर पहचान की जा सकती है, जिससे मुंह में चिपकने पर मावा नकली होगा।

सीएचसी प्रभारी डा. संदीप गौतम ने बताया कि मिलावटी मावा व पनीर के सेवन करने से लोगों के स्वास्थ्य पर घातक परिणाम सामने आ सकते हैं। इसके सेवन से गर्भवती महिला के बच्चे पर बुरा प्रभाव होता है।

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इंफे क्शन के कारण पेट में दर्द, दस्त व जानलेवा बीमारी की जकड़ में आ जाता है। यह सेहत के लिए धीमे जहर की तरह काम करता है। जहां तक मिलावटी मावा और पनीर से जितना बचा जा सकता है, उतना बचना चाहिए।

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