Tuesday, March 17, 2026
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बढ़िया उत्पादन के लिए समय रहते बागों में करें कीट व रोग प्रबंधन

 

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आम की फसल में बौर और फल लगते समय सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है, अगर इस समय फसल बचा ली तो किसान नुकसान से बच सकते हैं। इस समय ज्यादातर आम के बागों में बौर आ जाते हैं, पेड़ों में बौर लगते ही कई तरह के कीट व रोग लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। अगर सही समय नियंत्रण न किया गया तो किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय बागवानी उपोष्ण संस्थान ने आम, अमरूद व बेल जैसी खेती करने वाले बागवानी किसानों के लिए कृषि सलाह जारी की है, जिससे अपनाकर किसान नुकसान से बच सकते हैं। इस समय आम के पेड़ों में बौर लगे होते हैं और इसी समय बौर में खर्रा रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है। अगर 10 प्रति से अधिक पुष्पगुच्छों पर खर्रा रोग दिए तो टेबुकोनाजोल ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन (0.5 ग्राम/लीटर) या हेक्साकोनाजोल (0.1 मिली/लीटर) या सल्फर (0.2 ग्राम/लीटर) का छिड़काव किया जा सकता है।

पिछले कुछ दिनों में आम के बौर पर थ्रिप्स का प्रकोप देखा गया है। अगर आम के बगीचों में इसका प्रकोप देखा जाता है तो मोनोक्रोटोफॉस (1.5 मिली./लीटर) या थायामेथोक्साम (0.03 ग्राम/लीटर) के स्प्रे कर इसका प्रबंधन करें। मिज कीट का प्रकोप जनवरी महीने के अंत से लेकर जुलाई महीने तक कोमल प्ररोह तनों और पत्तियों पर होता है। सबसे अधिक नुकसान मिज कीट बौर, छोटे फलों को पहुंचाते हैं। इसका कीट के लक्षण बौर के डंठल, पत्तियों की शिराओं पर धब्बे के रूप में दिखते हैं। इनके नियंत्रण के लिए आवश्यकतानुसार डायमेथोएट (30 प्रतिशत सक्रिय तत्व) का छिड़काव करें।

आम का भुनगा कीट, जिसे फुदगा या लस्सी कीट भी कहा जाता है, बौर, पत्तियों और फलों के मुलायम हिस्सों से रस चूस लेते हैं, जिससे अच्छी गुणवत्ता के फलों की उपज प्रभावित होती है। इस कीट के नियंत्रण के आवश्यकतानुसार इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें। फफूंदी से होने वाले झुलसा रोग के संक्रमण से फूल और अविकसित फल झड़ने लगते हैं। इस रोग का प्रकोप हवा ज्यादा नमी के कारण होता है। इस रोग के नियंत्रण के लिए मेन्काजेब या कार्बेंडाजिम के 2.0 ग्राम प्रति लीटर या ट्राइफ्लोक्सिस्ट्रोबिन 75 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव करें।

बेल के फलों का करें सही इस्तेमाल

बेल के परिपक्व कच्चे फलों के गिरने की समस्या को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे फलों का इस्तेमाल कई तरह के उत्पाद बनाने में करें। बेल के फलों से बेल ड्रिंक्स, मिश्रित फ्रूट बार जैसे वैल्यू एडेड उत्पाद बना सकते हैं। फलों को इकट्ठा करने के बाद, धोकर, उन्हें स्टेनलेस स्टील के चाकू से एक समान स्लाइस में काटकर बीज निकाल देना चाहिए। फिर स्लाइस को 800 पीपीएम पोटेशियम मेटाबाईसल्फाइट के घोल में 3 मिनट के लिए डुबो देना चाहिए। इसके बाद, टुकड़ों को 65 सेल्सियस पर कैबिनेट डिहाइड्रेटर में 24 घंटे के लिए 6-8 प्रतिशत नमी की अवस्था तक सुखाया जाना चाहिए। सूखे टुकड़ों को मिक्सर ग्राइंडर या छोटी मिलिंग मशीन के माध्यम से पाउडर बना ले। इस चूर्ण को एयरटाइट डिब्बे में छह महीने तक भंडारित किया जा सकता है।

अमरूद के बाग में निपटा लें जरूरी काम

अमरूद के बीजू पौधों को कई तरह की किस्मों में बदला जा सकता है। इस समय सर्दियों की फसल की तुड़ाई के बाद या गर्मियों में पेड़ों की डालियों को ठूंठ छोड़ते हुए काट देना चाहिए। अतिरिक्त, संक्रमित, सूखी और कमजोर शाखाओं को हटा देना चाहिए। खाद और उर्वरक की मदद और उचित देखभाल के बाद पौधों में नई वृद्धि हो जाती है। परिपक्व टहनियों पर अगले मौसम (जनवरी-फरवरी) में ग्राफ्टिंग की जाती है। अमरूद की उन्नत किस्मों की सांकुर शाखाओं को विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है। अमरूद में वेज ग्राफ्टिंग फरवरी-मार्च (वसंत के मौसम) के दौरान आंवला, बेल, अमरूद, आम, जामुन जैसे पौधों में पेंसिल की मोटाई वाले एक साल पुराने मूलवृंत पर मातृ वृक्ष से सांकुर शाख लेकर वेज ग्राफ्टिंग की जा सकती है।

अमरूद दो मौसमों (बारिश और सर्दी) में फल देता है और अधिकांश किसान अच्छे स्वाद और गुणवत्ता के कारण सर्दियों के मौसम के फल लेना पसंद करते हैं। मार्च से जून के महीने के दौरान सिंचाई और उर्वरकों के प्रयोग को रोककर पौधों में तनाव पैदा करके सर्दियों के मौसम की बेहतर फसल प्राप्त की जा सकती है। मई के तीसरे सप्ताह के दौरान वार्षिक वृद्धि के 60-75 प्रतिशत की छंटाई और क्षत्रक के अंदर उत्पन्न होने वाले अंकुरों के साथ-साथ टेढ़ी-मेढ़ी शाखाओं, मृत और सूखी लकड़ियों को हटा देना चाहिए। टहनियों और शाखाओं के कटे हुए हिस्से पर कॉपर आॅक्सी-क्लोराइड का पेस्ट लगाना चाहिए।


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