- वर्तमान व्याधियों का तीन हजार वर्ष पूर्व इलाज बता दिया था आचार्य चरक ने
- मधुमेह प्रबंधन में बिना किसी नुकसान एलोपैथ से अधिक कारगर है आयुर्वेद : प्रो. रेड्डी
- गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आयुर्वेद कॉलेज) में दीक्षा पाठ्यचर्या समारोह का तीसरा दिन
जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ/गोरखपुर: आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, नई दिल्ली के डीन (रिसर्च) प्रो. महेश व्यास ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा के प्राचीनतम उपाय आज भी कारगर हैं और भविष्य में भी रहेंगे। आचार्य चरक ने तीन हजार वर्ष पूर्व उन व्याधियों का इलाज भी बता दिया था जो वर्तमान काल में आईं। आयुर्वेद में छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी हर बीमारी का इलाज है।
प्रो. व्यास बुधवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम की संस्था गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आयुर्वेद कॉलेज) में बीएएमएस प्रथम वर्ष के नवागत विद्यार्थियों के दीक्षा पाठ्यचर्या (ट्रांजिशनल करिकुलम) समारोह के तीसरे दिन “आयुर्वेद का इतिहास, दर्शन एवं अवधारणा” विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विशुद्ध भारतीय चिकित्सा पद्धति है।
इस पद्धति में इलाज से किसी भी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए व्यवस्थित दिनचर्या, संतुलित आहार और पूर्ण निद्रा आवश्यक है। जिन लोगों ने कोरोना काल में सही दिनचर्या का पालन किया, वह संक्रमण से बचे रहे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, अंग्रेजी चिकित्सा पद्धति से अधिक कारगर है।
कोरोना संकट में पूरी दुनिया ने इसे देखा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना की दूसरी लहर में कई लोगों की मृत्यु अंग्रेजी दवाओं की अधिकता के कारण हुई जबकि आयुर्वेद की दवाएं किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाती।

प्रो. व्यास ने कहा कि आयुर्वेद की महत्ता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसके लिए एक रिसर्च सेंटर खोलने का निर्णय लिया है। भारत में नीति आयोग की तरफ से एलोपैथ और आयुर्वेद को एक साथ बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की जिन बातों को कल्पनीय मान लिया जाता था, वे आज भी प्रमाणित हैं।
मसलन, मेगासूत्र बच्चों की मेमोरी को बढ़ाने में कारगर है। यह आयुर्वेद की ही देन है। दिल्ली के कुछ अस्पतालों में कोमा में रहे मरीजों की चेतना को महामृत्युंजय एवं गायत्री मंत्र से जागृत किया गया। उन्होंने बीएएमएस के छात्रों से कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें स्पष्ट विजन, सुदृढ़ संसाधन और शानदार वातावरण वाले गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज में अध्ययन का अवसर मिला है।
एक अन्य सत्र में “रिसेंट एडवांसेज इन आयुर्वेद” विषय पर अपना वक्तव्य देते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्रो. के. रामचंद्र रेड्डी ने मधुमेह की आयुर्वेदिक दवा पर अपने शोध से विद्यार्थियों को रूबरू कराया। उन्होंने छात्रों के समक्ष एक तुलनात्मक नजरिया भी प्रस्तुत किया कि मधुमेह के इलाज में एलोपैथ और आयुर्वेद का अप्रोच क्या होगा।
बताया कि आयुर्वेद बिना किसी नुकसान के मधुमेह प्रबंधन में एलोपैथ से अधिक प्रभावी है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के ही क्षेत्र में हर्बल कॉफी पर शोध किया जा रहा है। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पीयूष वर्षा ने विद्यार्थियों को प्राकृतिक चिकित्सा के मूलभूत बातों को बारीकी से समझाया। विशेषज्ञ वक्ताओं का स्वागत गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्राचार्य डॉ. पी. सुरेश ने किया।
दीक्षा पाठ्यचर्या समारोह में बुधवार के पहले सत्र में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव ने संस्था के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि भारतीयता की श्रेष्ठ भावना के धरातल पर अद्यानुतन ज्ञान, शोध व अनुसंधान का प्रसार और जनहित में उसका उपयोग संस्था का लक्ष्य है।
उन्होंने संस्था के दायित्वों के साथ ही विद्यार्थियों के कर्तव्यों पर भी चर्चा की। कार्यक्रमों में प्रो. (डॉ) एसएन सिंह, प्रो. (डॉ) गणेश पाटिल, डॉ सुमित, डॉ प्रज्ञा सिंह, डॉ प्रिया नायर आदि की सक्रिय सहभागिता रही।

